जानिए घर पर पूजा करने की सही विधि और उससे संबंधित 30 आवश्यक नियम !

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14 . शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ने वाला बिल्व-पात्र को 6 महीने तक बासी नहीं माना जाता अतः हम इन बिल्लव पत्रों पर जल छिड़कर उन्हें पुनः शिवलिंग में चढ़ा सकते है.

15 . तुलसी के वृक्ष से टूटे हुए तुलसी के पत्तो को 11 दिन तक बासी नहीं माना जाता अतः 11 दिन तक हम इनमे जल छिड़कर पुनः प्रयोग में ला सकते है.

16 . आमतौर पर फूलों को हाथों में रखकर हाथों से भगवान को अर्पित किया जाता है. ऐसा नहीं करना चाहिए। फूल चढ़ाने के लिए फूलों को किसी पवित्र पात्र में रखना चाहिए और इसी पात्र में से लेकर देवी-देवताओं को अर्पित करना चाहिए.

17 .ताम्बे के बर्तन में चंदन, घिसा हुआ चंदन या चंदन का पानी नहीं रखना चाहिए, ऐसा करना शास्त्रों के अनुसार अपवित्र माना गया है.

18 .कभी भी दीपक से दीपक को ना जलाए क्योकि शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने वाला व्यक्ति रोग से ग्रसित हो जाता है.

19 .रविवार और बुधवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए.

20 . पूजा ( pooja ) हमेशा पूर्व की ओर या उत्तर की ओर मुख करके की जानी चाहिए. तथा पूजा ( pooja ) करने का उत्तम समय प्रातः काल छः बजे से आठ बजे तक का होता है.

21 . पूजा ( pooja ) करते समय आसन के लिए ध्यान रखें कि बैठने का आसन ऊनी होगा तो श्रेष्ठ रहेगा.

22 . घर में मंदिर में सुबह और शाम दीपक अवश्य जलाए. एक दीपक भी का और एक दीपक तेल का जलाना चाहिए .

23 . भगवान की पूजन का कार्य और आरती पूर्ण होने के पश्चात उसी स्थान पर 3 परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए.

24 . रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए.

25 . भगवान की आरती करते समय निम्न बाते ध्यान रखनी चाहिए. भगवान के चरणों की आरती चार बार करनी चाहिए इसके बाद क्रमश उनके नाभि की आरती दो बार तथा उनके मुख की आरती एक या तीन बार करनी चाहिए. इस प्रकार भगवान के समस्त अंगो की सात बार आरती होनी चाहिए.

26 . पूजाघर ( pooja ) में मूर्तियाँ 1 ,3 , 5 , 7 , 9 ,11 इंच तक की होनी चाहिए, इससे बड़ी नहीं तथा खड़े हुए गणेश जी,सरस्वतीजी, लक्ष्मीजी, की मूर्तियाँ घर में नहीं होनी चाहिए .

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