आखिर क्यों दिए थे हनुमान जी ने भीम को अपने शरीर के तीन बाल, एक अनसुनी कथा !

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इस पर पुरुष मृगा ने उन्हें खाना चाहा, इसी दौरान भगवान कृष्ण और युधिस्ठर दरवाजे पर पहुंच गए. दोनों को देखकर युधिस्ठर ने भी बहस करनी शुरू कर दी, तब युधिस्ठर से पुरुष मृग ने न्याय करने को कहा.

तब युधिस्ठर ने ऋषि पुरुष मृगा से कहा की भीम के केवल पैर ही द्वार के बहार रह गए थे अतः आप केवन भीम ( bheem ) के पैर ही खा सकते है. युधिस्ठर के न्याय से ऋषि पुरुष मृगा प्रसन्न हुए तथा उन्होंने भीम ( bheem ) को जीवनदान दिया. इसके बाद ऋषि यज्ञ में भी सम्लित हुए तथा सबको आशीर्वाद दिया.

बजरंग बलि और एक महिला भक्त की अनोखी कथा जो शायद ही पहले आपने कभी सुनी हो !

आखिर क्यों बोलना पड़ा हनुमान जी को प्रभु श्री राम से झूठ, जाने क्या था वह झूठ व उससे जुड़ा राज !

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