आखिर क्यों दिए थे हनुमान जी ने भीम को अपने शरीर के तीन बाल, एक अनसुनी कथा !

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कुछ दुरी पर ही चलकर भगवान शिव को पुरुष मृगा मिल गए जो महादेव शिव की स्तुति कर रहे थे. भीम ( bheem ) ने उनके पास जाकर उन्हें प्रणाम किया तथा अपने आने का प्रयोजन बताया. इस पर ऋषि पुरुष मृगा भी उनके साथ चलने को राजी हो गए.

पर इसके साथ ही पुरुष मृगा ने यह शर्त रखी की भीम ( bheem ) को ऋषि पुरुष मृगा से पहले हस्तिनापुर पहुंचना होगा नहीं तो वे उन्हें खा जाएंगे. भीम ने ऋषि पुरुष मृगा की यह शर्त स्वीकार कर ली तथा अपनी पूरी शक्ति के साथ वे हस्तिनापुर की और भागे.

काफी दौड़ने के बाद भागते-भागते भीम ( bheem ) ने जब पीछे की ओर यह जानने के लिए देखा की ऋषि पुरुष मृगा कितने पीछे रह गए तो उन्होंने पाया की ऋषि बस उन्हें पकड़ने ही वाले है. यह देख वो चौक गए और शीघ्रता से भागने लगे तभी उन्हें हनुमान जी के दिए उन तीन बालों की याद आई. भीम ( bheem ) ने उनमे से एक बाल दौड़ते-दौड़ते जमीन में फेक दिया. वह बाल जमीन में गिरते ही लाखो शिवलिंग में परिवर्तित हो गए.

भगवान शिव के परम भक्त होने के कारण ऋषि पुरुष मृगा प्रत्येक शिवलिंग को प्रणाम करते हुए आगे बढ़ने लगे और वही भीम ( bheem ) भी लगातार भागते रहे. जब भीम को लगा की ऋषि अब फिर से उन्हें पकड़ ही लेंगे उन्होंने फिर से एक बाल गिरा दिया और वह बहुत से शिवलिंग में परिवर्तित हो गए.

इस प्रकार से भीम ( bheem ) ने ऐसा तीन बार किया. अंत में जब भीम हस्तिनापुर के द्वार में घुसने ही वाले थे की ऋषि पुरुष मृगा ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया, हालाकि भीम ने छलांग लगाई थी परन्तु उनके पैर दरवाजे के बाहर ही रह गए थे.

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