बजरंग बलि और एक महिला भक्त की अनोखी कथा जो शायद ही पहले आपने कभी सुनी हो !

महादेव शिव के रूद्र अवतार कहे जाने वाले पवन पुत्र हनुमान जी को सदैव ही बृह्मचारी के रूप में जाना गया है. हिन्दू ग्रंथो में कहि भी हनुमान जी के स्त्री मिलाप का उल्लेख नहीं मिलता फिर भी सिर्फ़ एक कथा में हनुमान जी के विवाह का वर्णन आया है परन्तु यहाँ भी हनुमान जी अपना बृह्मचर्य नहीं खोते.

हनुमान जी की पूजा में एक विशेष नियम यह भी है की महिलाएं उनकी पूजा नहीं कर सकती और उसके लिए उचित तथ्यों का वर्णन भी किया गया है.

परन्तु आज हम आपको जो कथा बताने जा रहे है वह हनुमान जी की एकमात्र महिला भक्त के संबंध में है हालाकि इसकी कहि पुष्टि नहीं है, फिर भी भारत की लोककथाओं में उसका वर्णन आता है . यह कथा कलयुग के आरम्भ की है उस समय एक महिला हर रोज हनुमान जी के मंदिर में जाया करती थी तथा उन्हें गेहू के आटे की रोटी तथा घी व चीनी के बने लड्डू चढ़ाया करती थी.

हनुमान जी को भोग लगाने के साथ महिला यह मंत्र भी रोज कहा करती थी की ” लाल लंगोटी हाथ में घोटी (गदा), मैं आपको खिलाऊ खाइये रोटी” . इस मंत्र को कहने के बाद वह प्रसाद मंदिर में छोड़ आती थी तथा इसके पश्चात ही भोजन ग्रहण करती थी.

इसके बाद धीरे-धीरे समय बदला. उस महिला की एक अच्छे परिवार में शादी हो गई तथा उसके बच्चे हुए परन्तु फिर वह नित्य हनुमान मंदिर में जाकर भगवान को भोग लगाती अपना विशेष मन्त्र का जाप करती फिर भोजन करती. यहाँ तक की जब उस महिला के बच्चों के बच्चे हो गए तब भी उस महिला ने हनुमान जी के मंदिर में जाना नहीं छोड़ा. हालाकि अब उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो चुकी थी परन्तु फिर भी इस हालत में उस महिला ने अपनी श्रद्धा से मुंह नहीं फेरा.

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परन्तु एक दिन उस महिला की बहु ने महिला को ताना कस ही दिया की घर में राशन की कमी हो रही है और आप हनुमान जी को खाना खिला कर आ रही है. परन्तु जब इस पर भी उस महिला ने बजरंगबली को भोग लगाना नहीं छोड़ा तो इस पर महिला की बहु ने उस महिला को उसके कमरे के अंदर ही बंद कर दिया.

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