दुर्योधन की मृत्यु के समय श्रीकृष्ण ने किया था इस रहस्य का खुलासा, पांडव एवं उनकी सम्पूर्ण सेना सिर्फ एक दिन में ही हो सकती थी पराजित !

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युद्ध के अठारहवे दिन भी दुर्योधन ने रात्रि में उल्लू और कौवे की सलाह पर अश्वथामा ( ashwathama ) को सेनापति बनाया था. उस एक रात्रि में ही अश्वथामा ( ashwathama ) ने पांडवो की बची लाखो सेनाओं और पुत्रों को मोत के घाट उतार दिया था.

अतः अगर दुर्योधन ऐसा पहले कर चुका होता था तो वह खुद भी न मरता और पांडवो पर जीत भी दर्ज कर चुका होता, हालाँकि यह काम अश्वथामा ( ashwathama ) ने युद्ध की समाप्ति पर किया था. जब अश्व्थामा ( ashwathama ) का यह कार्य दुर्योधन को पता चला था तो उसे शकुन की मृत्यु प्राप्त हुई थी.

 

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