इन 6 कारणों से हुआ था लंकापति रावण का ”सर्वनाश” !

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Ravana :-

ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अनुसार रावण ( ravana ) एक बहुत ही पराक्रमी एवं विद्वान योद्धा था. उसे अपने जीवन काल में अनेक शूरवीरों के साथ युद्ध किया तथा उन सभी युद्धों में उसने अकेले अपने बल पर विजयी हासिल करी.

लेकिन इतने पराक्रमी होने के बाद भी रावण ( ravana ) के जीवन में छः ऐसी घटनाएं घटित हुई, जो आगे चलकर रावण ( ravana )  के मृत्यु का कारण बनी. रावण जैसे बुद्धिमान व्यक्ति के संबंध में कहा जाता है की जब रावण ( ravana ) अपनी अंतिम साँसे ले रहा था तब उसकी विद्वानता के कारण स्वयं भगवान श्री राम ने अपने भाई लक्ष्मण को उससे ज्ञान लेने के लिए भेजा था. इस बात का उल्लेख रामायण में मिलता है.

लंकापति रावण ( ravana )  के मृत्य के छः कारण :-

1 . एक बार रावण ( ravana )  भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत गया. कैलाश पर्वत के बाहर से भगवान शिव के वाहन नंदी पहरेदारी कर रहे थे. जब रावण ( ravana )  ने नंदी जी को देखा तो वह जोर-जोर से हसने लगा.

रावण ( ravana )  ने नंदी के स्वरूप का मजाक उड़ाते हुए उन्हें बन्दर के मुंह वाला कह दिया. रावण ( ravana )  के इस तरह नंदी को अपमानित करने पर नंदी क्रोध में आ गए तथा वे रावण ( ravana )  से बोले की आज जिस तरह तु मुझे वानर कह के चिढ़ा रहा है परन्तु भविष्य में एक दिन वानरों के कारण ही तेरे सहित तेरी पूरी लंका का सर्वनाश हो जाएगा.

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2 . एक बार विश्व विजय की इच्छा लिए रावण ( ravana )  स्वर्ग लोक पहुंचा वहां उसे रम्भा नाम की एक अप्सरा मिली. वासना के लालसा लिए रावण  ने उस अप्सरा को पकड़ लिया. तब वह अप्सरा रावण ( ravana )  से बोली की आप मुझे इस प्रकार से स्पर्श मत करिये में आपके बड़े भाई कुबेर के पुत्र नलकुबेर के लिए आरक्षित हु.

लेकिन रावण ( ravana )  नहीं माना तथा उसने उस अप्सरा के साथ दुराचार किया. जब यह बात नलकुबेर को पता चली तो उसने क्रोधित होकर रावण ( ravana )  को श्राप दिया की ‘यदि वह किसी स्त्री के इच्छा के बिना उस स्त्री को स्पर्श करता है तो उसका सर तुरंत सौ टुकड़ो में फट जाएगा.

3 . भगवान राम के वंश में एक बहुत परम प्रतापी राजा हुआ करता था जिसका नाम था अनरण्य. जब रावण   विश्वविजय के लिए निकला तो राजा अनरण्य के साथ भी उसका बहुत भयकर युद्ध हुआ. जब रावण ( ravana )  को लगा की अनरण्य को युद्ध में परास्त करना असम्भव सा प्रतीत हो रहा है तो उसने छल का सहारा लिया.

छल की सहयता से रावण ( ravana )  ने राजा अनरण्य का वध तो कर दिया था परन्तु मृत्यु के समय राजा अनरण्य ने रावण को श्राप दिया था की मेरे वंश में उतपन्न एक युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा.

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4 . रावण ( ravana )  ने अपनी पत्नी की बहन माया के साथ से भी एक बार छल किया था. माया के पति राजा शंभर, वैजयंतपुर के राजा थे. एक दिन रावण उनके राज्य में अतिथि के रूप में गया तथा उसने किसी तरह राजा शंभर की पत्नी को अपनी बातो में फसा लिया. जब राजा शंभर को इस बात का पता चला तो वह क्रोधित हो गया.

इस बात को लेकर रावण और शंभर में भयंकर युद्ध हुआ तथा अंत में रावण ( ravana )  ने शंभर का वध कर दिया. अपने पति के मृत्यु पर जब रानी माया सती होने के लिए चली तो रावण ने उसे अपने साथ लंका चलने की बात कहि.

तब रानी माया रावण से बोली की जिस तरह छल से तुमने मेरा पतिव्रता धर्म भंग किया है ठीक उसी प्रकार यदि तुमने फिर से किसी स्त्री के पतिव्रता धर्म भंग करने का प्रयास किया तो वही स्त्री तुम्हारे मृत्यु का कारण बनेगी.

5 .एक बार रावण पुष्पक विमान से घूमने जा रहा था तभी उसने एक पर्वत पर किसी सुन्दर स्त्री को तपस्या करते देखा. वह भगवान विष्णु को पुरुष के रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रही थी. रावण ने जब बाल पकड़ कर उसे अपने साथ लंका ले जाने की कोशिश करी तो तुरंत उस स्त्री ने अग्नि उतपन्न कर उसमे अपनी देह त्याग दी. तथा रावण को श्राप दिया की स्त्री ही तेरी मृत्यु का कारण बनेगी.

6 .रावण की बहन शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था. वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था. रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ. उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का वध कर दिया.

तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को शाप दिया कि ‘मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा.

जाने आखिर स्त्रियों के वे कौन से 8 अवगुण है जो महापंडित रावण ने मंदोदरी को बताए थे !