भीष्म ने युधिस्ठर को बताई थी चार महत्वपूर्ण बाते, जिनसे अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है !

4 Things Bheema Told Yudhisthira :

(4 Things Bheema Told Yudhisthira) हर किसी के जन्म से पूर्व ही उसके मृत्यु का निर्धारण हो जाता है इसमें वह कुछ भी नहीं कर सकता क्योकि यही सृष्टि का नियम है. जो इस मृत्युलोक में जन्म लेगा एक न एक दिन उसकी मृत्यु होना तय है. परन्तु प्रसिद्ध हिन्दूधर्म ग्रन्थ महाभारत के अनुसार यह बताया गया है की मनुष्य में इतना सामर्थ्य होता है की वह अपने आचरण से अपने भाग्य को बदल सकता है.

जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तब युधिस्ठर हस्तिनापुर का राजा बनने के बाद तीरो के शैय्या में लेटे भीष्म पितामह से ज्ञान लेने आये. (4 Things Bheema Told Yudhisthira) तब भीष्म पितामह ने राजा युधिस्ठर को चार बहुत ही अनमोल एवं महत्वपूर्ण बात बताई जिन्हे यदि कोई मनुष्य अपने आचरण में अपना ले तो वह न केवल अपने भाग्य को बदल सकता बल्कि अपने अकाल मृत्यु को भी मात दे सकता है. आइये जानते है उन चार बातो को जिन्हे अपनाकर आप भी अपनी मृत्यु को टाल सकते हो.

हिंसा का त्याग कर :-
यदि कोई मनुष्य हिंसा का त्याग कर अहिंसा को अपने जीवन में अपना ले तो वह व्यक्ति अपने सम्पूर्ण जीवन में सदैव सुखी रहेगा. किसी को पीटना , किसी के साथ मारपीट करना या किसी के साथ हिंसा करना इस प्रकार के व्यक्ति ऐसा कर दूसरों को तो चोट पहुंचाते है साथ ही वे खुद भी इस के चपेट में आ जाते है और अपने आप को नुकसान पहुंचा बैठते है.

जो व्यक्ति सदैव दूसरे के साथ प्रेम पूर्वक व्यवहार करता है तथा दूसरों के मदद के लिए सदैव त्तपर रहता है ऐसे व्यक्ति हमेशा भगवान को प्रिय होते है तथा वे उनकी रक्षा करते है. इस प्रकार के गुण को अपनाने वाले व्यक्ति की आयु निश्चित ही लम्बी होती है. पुराणों और धर्म ग्रंथो में अहिंसा को मनुष्य का परम धर्म बताया गया है अतः हमे इन तीनो (मन, वचन, कर्म) प्रकार के हिंसा से सदैव बचकर रहना चाहिए. मन से हिंसा का अभिप्राय किसी के बारे में बुरे विचार सोचने से है, वचन से अभिप्राय दूसरे के बारे में बुरा बोलने व कर्म से अभिप्राय किसी को शारीरिक कष्ट पहुंचाने से है.

कभी झूठ न बोलना :-
मनुष्य को सदैव सत्य बोलना चाहिए क्योकि असत्य के सहारे वह कुछ पल के लिए अपने आपको मुसीबत से बचा तो लेता है परन्तु आगे चलकर उसको इस झूठ का बहुत भयंकर परिणाम झेलना पड़ता है. समाज के सामने ऐसे व्यक्ति की छवि धूमिल होने के साथ ही साथ वह व्यक्ति अपने परिवार का प्रेम और विश्वाश भी खो बैठता है. असत्य बोलने वाला व्यक्ति सदैव भयभीत और बेचैन रहता है तथा इसका प्रभाव उसके स्वास्थ पर भी पड़ता है जिस कारण उसकी आयु कम हो जाती है. यदि मनुष्य अपनी लम्बी उम्र चाहता है तो उसे सदैव सत्य बोलना चाहिए क्योकि असत्य का सहारा लेने पर वह सदैव उस असत्य के कारण अंदर से भयभीत रहेगा तथा उसे बहुत सी बीमारिया आ घेरेगी व अंत में वह अपनी पूर्ण आयु जीये बिना ही मृत्यु को प्राप्त हो जायेगा.

छल-कपट न करना :-
जो व्यक्ति सदैव सदाचार का पालन कर अपना जीवन व्यतीत करता है तथा हमेशा छल कपट के भावना से दूर रहता है इस प्रकार के व्यक्ति का मन सदैव प्रसन्न रहता है. मनुष्य को छल-कपट की भावना से बचते हुए अपने आपको ईश्वर भक्ति और समाज के भलाई के कार्यो में लगाना चाहिए. ऐसा कर मनुष्य के मन को बहुत शांति महसूस होती है और शांत मन के कारण मनुष्य को कभी कोई बीमारी नहीं होती तथा कहा भी गया है की शांत मन स्वस्थ शरीर की निशानी होती है. इस गुण का पालन कर मनुष्य अधिक समय तक जीवित रह सकता है.

क्रोध न करना :-
क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है क्योकि क्रोध किसी भी मनुष्य के सोचने समझने की क्षमता को हर लेता है तथा क्रोध के आवेश में मनुष्य अनेक बार ऐसा कार्य कर देता है जिसका उसे अपनी पूरी जिंदगी पछतावा होता है. बगैर किसी कारण हर बार गुस्सा करने से मनुष्य के मष्तिक-मन में बुरा प्रभाव पड़ता है और दिन प्रतिदिन उसकी आयु कम होती जाती है.

क्रोध धीरे-धीरे मनुष्य के स्वभाव को हिंसक बना देता है तथा वह मन और शरीर दोनों प्रकार से अस्वस्थ होने लगता है. क्रोध न करने वाले व्यक्ति का मन सदैव शांत बना रहता है और उसका स्वास्थ्य उत्तम होता है व उसकी आयु भी बहुत लम्बी होती है !

अपने इस पूर्व जन्म के कर्मो के कारण 58 दिनों तक बाणो की शैय्या में लेटना पड़ा था भीष्म पितामह को !