पुराणों में छिपी इस कथा में है शनि देव की दृष्टि के नीचे रहने का रहस्य !

Shani Dev Story :

( Story Of Shani Dev ) शनि देव को सूर्य पुत्र एवं कनफ़ल दाता माना जाता है लेकिन साथ ही पित्रिए शत्रु भी। शनि ग्रह के संबंध में अनेक क्रांति इसलिए इसे अशुभ एंव दुखकारक माना जाता है। ज्योत्षी भी इसे दुःख दुःख देने वाला मानते है लेकिन शनि इतना अशुभ और दुखकारक नहीं है जितना उससे माना जाता है इसलिए यह शत्रु नहीं मित्र है। Lord Shani Dev Story मोक्ष को देने वाला एक मात्र शनि ग्रह ही है। सत्य तो यह ही है की शनि प्राकृतिक में संतुलन पैदा करता है और हर प्राणी के साथ उचित न्याय करता है। जो लोग उनुचित विषमता अस्वभाविक क्षमता को आश्रय देते है शनि केवल उन्ही को दंडित करते है।

Story Of Shani Dev

Story Of Shani Dev :

( Shani Dev Story In Hindi ) एक बार कैलाश पर्वत में हर जगह उत्साह और आनंद का माहौल था व इस उत्साह का कारण था माता पार्वती ( Shiva Parvati ) के पुत्र गणेश का जन्म. महादेव शिव ( Lord Shiva ) और पर्वती को उनके पुत्र गणेश के जन्म की बधाई देने सभी देवता, ऋषि-मुनि, सूर्य-चन्द्रादि , सिद्धगण व पर्वत आदि कैलाश पर्वत पधारे हुए थे. शनिदेव (Shani Devभी इन सब के साथ कैलाश पर्वत आये थे परन्तु वे इन सबके पीछे खड़े थे. उनका मुखमंडल अति नम्र था तथा उन्होंने अपनी आँखे नीचे जमीन की ओर कर रखी थी व भगवान श्री कृष्ण ( Lord Krishna ) के भक्ति में लीन थे. वे तप, तेजस्वी, धधकती अग्नि शिखा के समान तेजवान, सुन्दर श्यामवर्णी, श्रेष्ठ थे और पीताम्बर धारण किये थे.

सर्वप्रथम (Story Of Shani Dev In Hindi ) शनि देव Shani Stotra  ने कैलाश पर्वत पहुंचकर ब्र्ह्मा, विष्णु , महेश, ऋषिगन और सूर्यादि को प्रणाम किया तथा इसके बाद वे उस स्थान पर पहुंचे जहाँ माता पार्वती अपने पुत्र गणेश के साथ उनके सखियो से घिरी हुई थी. माता पार्वती के पास पहुंच शनि देव ने माता पार्वती को नमन किया तथा उनसे आशीर्वाद गर्हण किया. परन्तु शनि देव ने शिशु गणेश ( Lord Ganesh ) की ओर एक बार अपनी नजरे घुमाने का प्रयास तक नहीं किया. शनि देव को नीचे की ओर मुंह करें देख माता पार्वती ने उनसे पूछा इस खुसी के अवसर पर आपने अपना मुंह क्यों झुका रखा है, आखिर तुम मेरे बालक की ओर क्यों नहीं देख रहे ?

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Story Of Shani Dev

Shani Dev Images

तब शनि देव ( Shani Dev Mantra ) ने कहा की हे माते ! सभी जन अपने कर्मो का फल भोगते है, कर्म चाहे जैसा भी हो परन्तु करोड़ो वर्षो कल्पो तक क्षय नहीं होता. अपने कर्मो के अनुसार ही जीव ब्र्ह्मा, सूर्य ( Surya Dev ) , देव आदि का स्थान पाता है तथा अपने कर्मो के अनुसार ही वह मनुष्य, वृक्ष, जीव-जन्तु आदि के योनि में आता है. अपने कर्मो के कारण ही प्राणी नरक और स्वर्ग भोगता है. कर्मो के कारण ही मनुष्य राजा बनता और उसी के कारण वह दास बनता है. कर्म ही मनुष्य को धनी बनाता है और यही निर्धन.

आज में आपको यह रहस्य बताता हु की क्यों मेरी दृष्टि नीचे रहती है. ( Story Of Shani Dev ) हे माते! मेरी बचपन से ही भगवान श्री कृष्ण ( Lord Krishna ) के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रही है. में हर समय भगवान कृष्ण की ही भक्ति में लगा रहता था. विषय भोगो से विरकत में हर समय उनकी तपस्या में लीन रहता था. जब में विवाह योग्य हुआ तो मेरे पिता ( सूर्यदेव ) ने मेरा विवाह चित्ररथ गन्धर्व की कन्या से कर दिया. वह तेजस्वनी सती साध्वी भी सदैव तपस्या में लीन रहती थी. एक दिन वह ऋतू स्नान कर मेरे समीप आई उस समय में भगवत चिंतन में लीन था. उस समय मुझे बाहरी ज्ञान बिल्कुल भी ज्ञात नहीं था. उस समय उस साध्वी ने अपना ऋतुकाल व्यर्थ जाता देख मुझे श्राप दिया की आज से तुम्हारी दृष्टि सदैव नीचे ही रहेगी यदि तुमने किसी पर अपनी दृष्टि डालने का भी प्रयास किया तो उसका अवश्य नाश होगा.

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यही कारण है माते की में सदैव अपनी दृष्टि नीचे किेए रहता हु, कहि मेरे कारण जीव हिंसा न हो जाये.और यही कारण है की में बालक गणेश ( Ganesha ) पर भी अपनी दृष्टि नहीं डाल सकता.

Shani Dev Birth Story – शनिदेव का जन्म

Shani Dev Birth Story सूर्य देव की पत्नी छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ। जब शनि देव छाया के गर्भ में थे तब छाया भगवन शंकर की भक्ति में इतनी धयान मगन थी की उहने अपने खाने पीने की सुध नहीं होती थी। इसी कारण शनि देव का वर्ण श्याम यानि काला हो गया। शनि के श्याम वर्ण को देख कर सूर्य ने अपनी पत्नी पर आरोप लगाया की शनि मेरा पुत्र नहीं है। तभी से शनि अपने पिता से शत्रु भाव रखते थे।

Story Of Shani Dev

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( Story Of Shani Dev ) शनि देव ने अपनी साधना तपस्या द्वारा शिव जी को प्रसन्न कर सूर्य की भाति शक्ति प्राप्त की और शिव जी ने शनि देव की वरदान मांगने को कहा तब शनि देव ने प्रार्थना कि की युगो युगो में मेरी माता छाया की पराजय होती रही है मेरे पिता सूर्य द्वारा बहुत बार अपमानित किया गया है अतः माता की इच्छा है की मेरा पुत्र अपने पिता से मेरे अपमान का बदला ले और उनसे ज्यादा शक्तिशाली बने। तब भगवान् शंकर ने वरदान देते हुए कहा की नवग्रहो में तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ स्थान होगा। मानव तो क्या देवता भी तुम्हारे नाम से भयभीत रहेंगे।

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इस चमत्कारिक मंदिर में शनिदेव का अभिषेक तेल से नही बल्कि दूध और पानी से होता है !

आखिर सूर्य देव ने क्यों किया शनि देव को अपने पुत्र मानने से इन्कार ?