भगवद गीता का सम्पूर्ण सार है इन 20 अनमोल श्लोको में, जो है मनुष्य की हर परेशानी का हल !

sloka of bhagwat gita in hindi:

हमारी जिंदगी में सुख और दुःख दोनों लगे हुए है, सुख के समय तो हम खुश रहते है लेकिन दुःख के समय यह हमे पहाड़ सा लगने लगता है और हम भगवान को इसका जिम्मेंदार ठहराने लगते है . परन्तु दुःख या संकट हमारे जिंदगी के लिए आवशयक है क्योकि ये हमे हमारे आगे की जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण सबक दे कर जाते है तथा जब भी हमारे जिंदगी में दुःख या संकट आते है तब भगवान हमारी मदद करते है व हमे उससे लड़ने की ताकत देते है.

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हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रन्थ भगवद गीता (srimad bhagavad gita ) में यह बताया गया है की मनुष्य अपने जीवन को किस तरह बेहतर ढंग से जी सकता है और अपने हर परेशानियों पर विजय पा सकता है. भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के दौरान करुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद गीता का ज्ञान दिया था. भगवद गीता में 18 अध्याय और लगभग 700 श्लोक है जिनमे में जीवन के हर समस्या का समाधान करने का उपाय है.भगवत गीता के ये श्लोक सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी लोगो के मार्गदर्शक है तथा भगवद गीता एक नई दिशा प्रदान करने वाला ग्रन्थ है. आइये जानते है भगवत गीता के वे 20 श्लोक के सार जो निश्चित ही आपमें एक नई ऊर्जा भर देंगे !

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1 . मन की लगाम सदैव अपने हाथो में रखो :- यदि मनुष्य अपने मन को काबू पर रखे तो वह दुनिया में किसी भी असम्भव कार्य को सम्भव में परिवर्तित कर सकता है. जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है.

2 . अपने विश्वास को अटल बनाओ :- कोई भी मनुष्य अपने विश्वास से निर्मत होता है तथा जैसा वह विश्वास करता है वैसा बन जाता है.

3 . क्रोध मनुष्य का दुश्मन है :- क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है और जब बुद्धि के व्यग्र नष्ट होने से बुद्धि की तर्क शक्ति समाप्त हो जाती है तो मनुष्य के पतन की शुरुवात होने लगती है.

4 . संदेह करना त्याग दो :- संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता न तो इस लोक में है और नहीं परलोक में.

5 . उठो और मजिल की तरफ बढ़ो :- आत्म-ज्ञान रूपी तलवार उठाओ तथा इसके माध्यम से अपने ह्रदय के अज्ञान रूपी संदेह को काटकर अलग कर दो, अनुशाषित रहो, उठो.

6 . इन तीन चीज़ो से सदैव दूर रहो :- भगवद गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को संदेश देते हुए वासना, क्रोध और लालच को नर्क के तीन मुख्य द्वारा बतलाया है.

7 . हर एक पल कुछ सिखाता है :- मनुष्य को उसके जिंदगी में घटित हो रहे हर एक छोटी – बड़ी चीज़ कुछ न कुछ सिख देकर जाती है. भगवद गीता में कहा गया ही की इस जीवन में न कुछ खोता है और न ही कुछ व्यर्थ होता है.

8 . अभ्यास आपको सफलता दिलाएगा :- मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन, लेकिन अभ्यास के द्वारा उसे भी वश में किया जा सकता है .

9 . सम्मान के साथ जियो :- लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे परन्तु उनको अपने पर हावी मत होने दो. एक सम्मानित व्यक्ति के लिए अपमान मृत्यु से भी बदतर है.

10 . खुद पर विश्वास रखो :- मनुष्य जो चाहे वह बन सकता है, विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करें.

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11 . कमजोर मत बनना :- हर व्यक्ति का विश्वास उसकी प्रकृति के अनुसार होता है.

12 . मृत्यु सत्य है उसे नकारा नहीं जा सकता :- जन्म लेने वाले के लिए मृत्य उतनी ही निश्चित है जितना की मृत होने वाले के लिए जन्म लेना. इसलिए जो अपरिहार्य है उस पर शोक मत करो.

13 . ऐसा मत करो जिस से खुद को तकलीफ होती हो :- अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है.

14 . मेरे लिए सब एक समान है :- भगवान श्री कृष्णा अर्जुन को भगवद का ज्ञान देते हुए कहते है की में सभी प्राणियों को समान रूप से देखता हु, न कोई मुझे कम प्रिय है न अधिक. लेकिन जो मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते है वो मेरे भीतर रहते है और में उनके जीवन में आता हु.

15 . बुद्धिमान बनो :- संसार के सुखो में खोकर अपने जीवन के मुख्य लक्ष्य से मत भटको. सदैव अपने लक्ष्य की ओर अपना सम्पूर्ण ध्यान केंद्रित करो.

16 . सभी मुझ से है :- भगवान श्री कृष्ण कहते है की में मधुर सुगंध हु. में ही अग्नि की ऊष्मा हु , सभी जीवित प्राणियों का जीवन और सन्यासियों का आत्मसंयम हु.

17 . में प्रत्येक वस्तु में वास करता हु :- भगवान प्रत्येक वस्तु में है तथा सबसे ऊपर भी .

18 . ज्ञान व्यक्ति को दूसरों से अलग बनाता है :- भगवान कृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते है की में उन्हें ज्ञान देता हु जो सदैव मुझ से जुड़े रहते है और जो मुझसे प्रेम करते है.

19 . खुद का कार्य करो :- किसी और का काम पूर्णता से करने से अच्छा है खुद का काम करो भले ही उसे अपूर्णता से क्यों न करें.

20 . डर को छोड़ कर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ो :- उससे मत डरो जो कभी वास्तविकता नहीं है, न कभी था और न कभी होगा. जो वास्त्विक है व हमेशा था और कभी नष्ट नहीं होगा .

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