श्री राम के केवल सात शब्दों के ”तारक मन्त्र” से पाई जा सकती है हर प्रकार की बाधा से मुक्ति !

shri ram tarak mantra

”श्री राम, जय राम , जय जय राम”
धार्मिक गर्न्थो में बताया गया है की मात्र सात शब्दों के इस तारक मन्त्र में असिमित शक्तियों का भंडार है तथा जो इस मन्त्र का नित्य जाप करंता है उसे किसी भी प्रकार का कोई भय नहीं सताता. इस मन्त्र के प्रभाव से अपार सुख और सौभाग्य प्राप्त होता है.

हमारा जीवन अनेको प्रकार के सुख और दुखो से भरा है, वास्तविकता में देखा जाये तो ये सब हम पर निर्भर करता है की हम इन्हे कैसे लेते है. सुख के समय तो सब खुश रहते है परन्तु दुःख के वक्त हमे हमारी जिंदगी पहाड़ के समान लगती है, किसी के लिए साधारण सी बात ही उसके सबसे बड़े दुःख का कारण बन जाती है. सुख-दुःख ये दोनों ही हमारे जीवन का हिस्सा है जैसे एक नाव में दो चप्पू. यदि किसी एक का भी संतुलन बिगड़ जाये तो हमारे जीवन रूपी पूरी नाव ही डूब जाएगी. जीवन की नय्या को संतुलित रखने का सर्वेष्ठ उपाय है राम नाम के तारक मंंत्र का जाप. इस साधारण से लगने वाले मन्त्र में असीम शक्ति छिपी हुई है जो उस मीठे फल के समान है जिसका अनुभव उसे चखने के बाद होता है. आज की व्यस्त दुनिया में खोकर हम राम के इस पवित्र नाम को भूल रहे है जिस कारण हमारी जिंदगी में विषमता और अधिक बढ़ती जा रही है.

हिन्दू धर्म में बच्चे के जन्म के समय राम के नाम का सोहर होता है तथा विवाह जैसे मंगल कार्यो में भी भगवान राम के नाम के गीत गाये जाते है. राम के नाम को जीवन का महामंत्र माना गया है. राम सर्वमय और सर्वमुक्त है . राम सबकी चेतना का सजीव नाम है. प्रत्येक राम भक्त के लिए राम का नाम उनके हृदय में वास करने वाला और उन्हें परम सुख की अनुभूति कराने वाला है. तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस में बताया गया है की भगवान के सभी नमो में श्री राम का नाम प्रभावशाली और शीघ्र फल देने वाला है.

भगवान राम का नाम अत्यन्त सरल, सुरक्षित तथा निश्चित ही लक्ष्य को प्राप्त करवाने वाला है. भगवान श्री राम के तारक मन्त्र जाप के लिए किसी भी प्रकार की आयु सीमा, जात-पात या विशेष स्थान की जरूरत नहीं है. उनके तारक मन्त्र का जप कोई भी, कभी भी व किसी भी स्थान पर बैठकर कर सकता है. जब मन सहज रूप में लगे, तब ही मंत्र जप कर लें. तारक मंत्र ‘श्री’ से प्रारंभ होता है. ‘श्री’ को सीता अथवा शक्ति का प्रतीक माना गया है. राम शब्द ‘रा’ अर्थात् र-कार और ‘म’ म-कार से मिल कर बना है. ‘रा’ अग्नि स्वरुप है. यह हमारे दुष्कर्मों का दाह करता है. ‘म’ जल तत्व का द्योतक है. जल आत्मा की जीवात्मा पर विजय का कारक है.इस तरह पुरे तारक मन्त्र का सार – श्री राम, जय राम, जय जय राम निकलता है . श्री राम का तारक मन्त्र मनुष्य की सभी इच्छाएं स्वतः ही पूरी कर देता है तथा ये नाम सर्व समर्थ है.