आखिर क्यों आया भगवान शिव को माता पार्वती पर क्रोध, दिया श्राप !

Shiv Parvati Katha In Hindi:

Shiv Parvati – महादेव शिव और देवी पार्वती का एक दूसरे के प्रति अतयन्त दृढ प्रेम है जो किसी भी तरह नहीं टूट सकता.लेकिन साधारण मनुष्यो के भाँती ही भगवान शिव और देवी पार्वती में भी झोटी-बड़ी नोक-झोक होती रहती है. परन्तु एक दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच की लड़ाई इतनी बड़ी हो गई की भगवान शिव ने अपने प्राणो से भी प्रिय माता पार्वती को श्राप दे डाला. क्या आप जानते है कि शिवजी के कितने पुत्र थे ?

Shiv Parvati

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Shiv Parvati Story In Hindi

माता पार्वती हमेशा भगवान शिव से जन्म मृत्यु के भेद इनके बन्धनों से मुक्ति तथा अमरत्व के युक्ति के संबंद्ध में सवाल किया करती थी तथा उनका वृत्तांत पूछा करती थी. Shiv Parvati इन सवालों के संबंध में भगवान शिव के उत्तर इतने लम्बे होते थे की इन उत्तरो के बीच-बीच में माता पार्वती को नींद की झपकियाँ आ जाती थी. एक दिन किसी कारण भगवान शिव का स्वभाव उखड़ा हुआ था तथा देवी पार्वती उनके पास आकर वेदो के बारे में पूछने लगी.

Shiv Parvati शिव ने जब उनसे किसी और दिन इस विषय में चर्चा करने की बात कही तो देवी पार्वती जिद करने लगी. अंत में देवी पार्वती के जिद के आगे विवश होकर भगवान शिव उन्हें वेदो का ज्ञान देने लगे. इसी बीच माता पार्वती को नींद आ गई, जब भगवान शिव की नजर माता पार्वती पर पड़ी तो वे क्रोधित हो गए तथा क्रोध में आकर उन्होंने पार्वती को भीलनी का श्राप दे डाला.

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Shiv Parvatiमाता पार्वती को श्राप देकर भगवान शिव उस स्थान से कही एकांत में ध्यान करने चले गए. जब उनकी ध्यान साधना टूटी तो माता पार्वती की खोज करते हुए वे कैलाश पर्वत आये तथा माता पार्वती को खोजने लगे. परन्तु माता पार्वती उन्हें कैलाश में कही नहीं मिली क्योकि वे भगवान शिव के श्राप के कारण भील के पुत्री के रूप में धरती में जन्म ले चुकी थी. भगवान शिव पार्वती को न पाकर विचलित हुए परन्तु उसी समय नारद जी उनके सामने प्रकट हुए तथा उन्हें दिलासा दी.

धीरे-धीरे समय बिता तथा जब माता पार्वती विवाह के योग्य हुई तो भगवान शिव ने अपने गण नंदी को एक महत्वपूर्ण उद्देश्य से धरती पर भेजा. Shiv Parvati नंदी ने एक बहुत ही विशाल मछली का रूप धरा तथा उस नदी में उत्पात मचाना शुरू कर दिया जहा भील कबीले के लोग मछलियाँ पकड़ते थे|

Shiv Parvati माता पार्वती के पिता भील कबीले के मुख्या थे तथा उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उस व्यक्ति से करने का प्रस्ताव रखा जो उन्हें नदी में उत्पात मचा रही भयानक मछली से मुक्ति दिलाएगा. तब भगवान शिव भील का रूप धारण कर नदी के समीप गए तथा नंदी रूपी उस विशाल मछली को वश में कर उसे वहाँ से भगा दिया. शर्त के अनुसार भील कबीले के मुखिया ने अपनी पुत्री का विवाह भगवान शिव से कराया तथा इस तरह भगवान शिव और माता पार्वती का पुनः मिलन हुआ!

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Shiv Parvati Vivah Story In Hindi

शिव को दुनिया का सर्वोत्कृष्ट तपस्वी या आत्मसंयमी कहा जाता है। वह सजगता की साक्षात मूरत हैं। लेकिन साथ ही मदमस्त व्यक्ति भी हैं। एक तरफ तो उन्हें सुंदरता की मूर्ति कहा जाता है तो दूसरी ओर उनका औघड़ व डरावना रूप भी है। शिव एक ऐसे शख्स हैं, जिनके न तो माता-पिता हैं, न कोई बचपन और न ही बुढ़ापा। उन्होंने अपना निर्माण स्वयं किया है। वह अपने आप में स्वयभू हैं।

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सिर्फ ‘शिव’… आपको इस शब्द की ताकत पता होनी चाहिए। यह सब सोचते हुए अब आप अपने तार्किक दिमाग में मत खो जाइए। ‘ क्या मैं शिव शब्द का उच्चारण करता हूं तो क्या मेरा धर्म पविर्तन हो रहा है?’ यह सब फिजूल की बातें हैं। यह तो उन मानवीय सीमाओं से परे जाने का एक रास्ता है, जिसमें इंसान अकसर फंसा रह जाता है। जीवन की बहुत गहन समझ के साथ हम उस ध्वनि या शब्द तक पहुंचे हैं, जिसे हम ‘शिव’ कहते हैं। यदि आपमें किसी चीज को ग्रहण करने की अच्छी क्षमता है, तो सिर्फ एक उच्चारण आपके भीतर बहुत शक्तिशाली तरीके से विस्फोट कर सकता है।

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