शनि देव को प्रसन्न करने के सरल एवं प्रभावशाली उपाय, जिन्हे अपनाने से मिलती है शनि दोष से मुक्ति !

यदि यमराज को मृत्यु का देव कहा जाता है तो वही शनि देव भी कर्म के दण्डाधिकारी है. चाहे गलती जान बूझकर की गई हो या अनजाने में हर किसी को अपने कर्मो का दण्ड तो भुगतना ही पड़ता है. यदि किसी व्यक्ति पर शनि देव की साढ़े साती चल रही हो या उसके जन्मकुंडली में शनि अशुभ ग्रह के प्रभाव में हो तो उस व्यक्ति को अनेको परेशनियां घेर लेती है जैसे व्यवसाय में हानि, नौकरी आदि में समस्या, परिवार में मनमुटाव, धन-संचय में कमी, मित्रो के साथ दुश्मनी, कोट-मुकदमा तथा किसी बिमारी से लम्बे समय के लिए ग्रसित हो जाना आदि.

इन सभी प्रकार की समस्याओं और शनि ग्रह की अशुभता से मुक्ति प्राप्त करने के लिए उचित मंत्रो का जाप आवश्यक है. ज्योतिषों के अनुसार शनि देव की शीघ्र कृपा प्राप्त करने के लिए शनिवार का दिन विशेष माना जाता है. इस दिन कोई भी नया कार्य आरम्भ नहीं करना चाहिए. शनिवार को अखण्ड नारियल नदी में प्रवाहित करने से मानसिक शान्ति प्राप्त होती है. शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए तथा इस दिन शनि देव को तेल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते है.

शनि-दोष निवारण के उपाय :-

शनिदेव को शांत करने के लिए शनिवार के दिन उनकी पूजा और दान का विशेष प्रावधान है. शनि की अनिष्टता निवारण के लिए शनिवार के दिन शनि मंदिर में तेल चढ़ाना चाहिए और दान में काले कपडे, काली उड़द, काले तिल, काला कम्बल, काला छाता, लोहे की कोई धातु , चमड़े के जूते व काली रंग की वस्तुए दान करनी चाहिए. इस दिन शनि मंदिर के सामने पुराने जूते एवं वस्त्र का त्याग करना भी शनि-दोष निवारण के लिए अत्यन्त लाभकारी माना जाता है .

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इसके साथ ही शनिदेव का व्रत करने से भी शनि देव प्रसन्न होते है. शनि अनिष्टता के निवारण के लिए शनिवार के दिन एकाशना करना चाहिए. अगर व्रत ना कर सके तो मांसाहार और मदिरापान से विशेषकर इस दिन दूर रहना चाहिए तथा संयमपूर्वक शनि देव के नाम का स्मरण करना चाहिए.

शनि के ढैया से शांति :-

शनि ढैया के शमन के लिए शुक्रवार की रात्रि में 8 सौ ग्राम काले तिल पानी में भिगो दें और शनिवार को प्रातः उन्हें पीसकर एवं गुड़ में मिलाकर 8 लड्डू बनाएं और किसी काले घोड़े को खिला दें. आठ शनिवार तक यह प्रयोग करें.

शनि मुद्रिका से पहुंचता है लाभ :-

ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह अनुसार काले घोड़े के खुर की नाल की अभिमंत्रित अंगूठी मध्यमा अंगुली में धारण करना चाहिए.यह शनिदेव की अशुभ दशा से बचाता है तथा उनकी विशेष कृपा अंगूठी धारण करने वाले व्यक्ति को प्राप्त होती है.

शनि पीड़ा निवारण रत्न :-

शनि दोष के निवारण के लिए शनि रत्न नीलम को धारण करना चाहिए परन्तु यह केवल तुला, वृषभ, मकर व कुम्भ राशि या लग्न के व्यक्तियों को ही धारण करना चाहिए. शनिदोष के निवारण हेतु शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान से अभिमंत्रित यंत्र को धारण करने से शनि-पीड़ा से मुक्ति प्राप्त होती है.

शनि दोष निवारण के लिए किन देवो की करें पूजा :-

शनिदोष से पीड़ित जातको को भगवान शिव, सूर्य देव व हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए, भगवान शिव, सूर्य देव और हनुमान जी पूजा शनिवार के दिन करने शनि देव प्रसन्न होते है और शनि दोष से मुक्ति प्राप्त होती है.

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शनि दोष निवारण के लिए भगवान शिव के पंचाक्षर मन्त्र ओम नमः शिवाय का जप करना चाहिए तथा इसके साथ ही महामृत्युंजय जाप ‘ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनं उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्’ और अधिक लाभकारी एवं शीघ्र प्रभावशाली होता है.
इसके अलावा सूर्य देव के मंत्र ‘ॐ घृणिं सूर्याय नमः’ का जाप तथा आदि हृदय स्रोत का पाठ करना चाहिए.

हनुमान जी की पूजा देती है विशेष फल :-

शनिदेव को अति शीघ्र प्रसन्न करने के लिए मंगवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के पूजा विशेष फलदायी होती है. इन दोनों दिन हनुमान जी के मंत्र ”ॐ हनुमन्ते नमः” का जाप करना चाहिए. नित्य हनुमान चालीसा और सुंदरकांड के पाठ करने से शनि देव के अशुभ प्रभाव दूर होते है तथा परिवार में सुख-सम्पति में वृद्धि होती है.

पुराणों में छिपी इस कथा में है शनि देव की दृष्टि के नीचे रहने का रहस्य !

शनिश्चरा मंदिर, मुरैना – जिसकी शिला से बने शिंगणापुर के शनि और इस मंदिर में श्रद्धालु मिलते है शनि देव से गले !