ज्योतिर्लिंग होने के साथ ही यह है चार पवित्र धाम में से भी एक , रामेश्वरम !

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Rameshwaram Temple:

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रामेश्वरम (Rameshwaram Temple) हिन्दुओ के सभी पवित्र तीर्थो ( Holy Place )  में से एक है तथा प्रकृति की सुंदरता के साथ यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है. इसे हिन्दुओ के प्रमुख चार धामों ( Char dham ) में से एक माना जाता है.

अद्भुत वास्तुकला से सुस्जित रामेशवरम मंदिर ( Rameshwaram Temple ) पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केन्द्र है. रामेश्वरम धाम शंख के आकर का एक सुन्दर द्वीप है तथा बंगाल की खाड़ी व हिन्द महासागर से चारो तरफ से घिरा हुआ है. प्राचीन काल में यह भारत की मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ था परन्तु समुद्र द्वारा धीरे-धीरे काटकर यह एक टापू बन गया.

Story about Rameshwaram Temple:

लंका पर चढ़ाई करने के लिए भगवान राम ( Lord Rama ) ने यही पर नल-नील व वानरों की सेना के साथ मिलकर पुल का निर्माण कराया था तथा यह पुल बाद में विभीषण ने तोड़ दिया. आज भी धनुषकोटि (Dhanush Koti In Rameshwaram )  नामक स्थान पर इस सागर में इस पुल के अवशेष दिखाई देते है.

रामेश्वरम मंदिर (Rameshwaram Temple) के भीतर ही चौबीस कुंडों का निर्माण कराया था जिनमे अब बाईस ही शेष बचे है ये कुंड बहुत है पवित्र माने जाते है जिनमे स्नान कर मनुष्य अपने समस्त पापो से मुक्ति पा सकता है.

मंदिर(Rameshwaram Temple) परिसर के भीतर स्थित इन कुंडों के बारे में यह मान्यता है की स्वयं भगवान श्री राम ने अपने अमोघ बाणों द्वारा इनका निर्माण किया था तथा इन कुंडों के भीतर अनेक तीर्थो ( Tirth )से उनका जल मांगकर इनमे डाला था. इसलिए इन कुंडों के तीर्थ के नाम से भी पुकारा जाता है.

पुराणों में रामेशवरम (Rameshwaram) का नाम गन्धमादन बताया गया है तथा इस की कला द्रविड़ शैली की है. मंदिर में बनी रथ यात्रा अत्यन्त  दर्शनीय है यहाँ शिव ( Shiva ) की मूर्तियों के साथ-साथ माता पर्वती की भी दो मुर्तिया स्थापित है जिनके अलग-अलग नाम है. पहली मूर्ति पर्वतवृद्धिनि तथा दूसरी मूर्ति विशालाक्षी के नाम से सम्बोधित की जाती है. इसकी साथ यहाँ अनेक अन्य दर्शनीय तीर्थ स्थल भी है जिनमे अमृतवाटिका, हनुमान (Hanuman) कुण्ड, ब्रह्म हत्या तीर्थ, विभीषण तीर्थ, माधवकुण्ड, सेतुमाधव, नन्दिकेश्वर तथा अष्टलक्ष्मीमण्डप आदि सम्लित है.

रामेशवरम में स्थित शिवलिंग शिव के 12  ज्योतिर्लिंगों ( Jyotirling ) में से एक है इस शिव लिंग के विषय में शिव पुराण ( Shiva Puran ) में एक अनोखी कथा मिलती है. जब भगवान श्री राम रावण का वध करने के पश्चात सीता, लक्ष्मण एवं हनुमान के साथ वापस लोटे तो उन्होंने रावण के वध के कारण अपने उपर लगे बर्ह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव ( Lord Shiva )  की पूजा करवाई. इसके लिए हनुमान जी कैलाश पर्वत भगवान शिव के पास शिवलिंग लाने गए.

परन्तु उस समय कैलाश पर्वत पर भगवान शिव नहीं थे तो उन्होंने उनकी तपस्या करी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए तथा शिवलिंग ( Shivling ) दिया. उधर हनुमान जी को विलम्ब होने के कारण भगवान राम ने बालू की रेत से शिवलिंग का निर्माण कर दिया. जब हनुमान जी वापस आये तो भगवान राम द्वारा निर्मित शिवलिंग को देख रुष्ट गए.तब श्री राम हनुमान से बोले की मुहर्त का समय बिता जा रहा था अतः शीघ्रता में मेने इस शिवलिंग का निर्माण किया, अब तुम इस शिवलिंग को हटाकर दूसरा शिवलिंग स्थापित कर दो.

हनुमान जी ने अपने पुरे सामर्थ्य के साथ शिवलिंग को हटाना चाहा परन्तु वह शिवलिंग को वहां से हिला तक नहीं पाये. अंत में हारकर हनुमान ने भगवान राम द्वार निर्मित के सामने ही दूसरा शिवलिंग भी स्थापित कर दिया तब भगवान श्री राम ने हनुमान को प्रसन्न करने के लिए यह आशीर्वाद दिया की इन शिवलिंगों के पूजा अर्चना के बाद है रामेश्वरम ( Rameshwaram ) की तीर्थ यात्रा सफल मानी जाएगी.

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