जाने देवी दुर्गा के नवरात्र के सबसे पहले व्रतों को करने वाली भक्त की कथा !

navratri vrat katha and puja vidhi

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Navratri vrat katha and puja vidhi:

नवरात्रि एक ऐसा पर्व है जो हिन्दू धर्म गर्न्थो और पुराणों में माता की आराधना के लिए सर्वेष्ठ बताया गया है. नवरात्रियों में भक्त माता की आराधना से उन्हें प्रसन्न कर मनवांछित फल प्राप्त कर सकते है. नवरात्रो में माता दुर्गा के नौ रूपों को प्रसन्न किया जाता है तथा भक्तो द्वारा उपवास रखे जाते है . पुराणों में नवरात्रो की महिमा का बहुत सुन्दर गुणगान मिलता है. स्वयं ब्र्ह्मदेव ने माता के नवरात्रो की महिमा ब्र्ह्स्प्ति देव को बताते हुए उस ब्राह्मण पुत्री के बारे में कथा सुनाई जिसने सबसे पहले देवी दुर्गा के नवरात्र का उपवास रखा था.

बहुत वर्षो पूर्व पीठत नाम के मनोहर नगर में एक ब्राह्मण रहता था तथा वह माता दुर्गा का परम भक्त था व उनकी भक्ति में दिन रात खोया रहता था. उसकी एक पुत्री थी जिसका नाम सुमति था. वह अपने पिता के हर कार्यो में उनका साथ दिया करती थी. प्रत्येक दिन नियम पूर्वक पिता और पुत्री दोनों माँ दुर्गा की पूजा व यज्ञ किया करते थे. एक दिन सुमति अपने सहेलियों के साथ खेल में इतना मग्न हो गई की उसे ध्यान ही न रहा की कब माँ भगवती की पूजा का समय बीत गया. खेलने के बाद सुमति जब घर वापस आई तो उसने अपने पिता को अत्यन्त क्रोध में पाया. पूजा में सम्लित नहीं होने के कारण क्रोध में ब्राह्मण ने अपनी पुत्री को उसका विवाह कोढ़ी एवं दरिद्र से करने की बात कह दी.

अपने पिता के अपने ऊपर इस तरह कुपित होने पर सुमति को बहुत दुःख हुआ तथा वह अपने पिता से बोली में आपकी पुत्री हु अतः मुझे आपकी हर आज्ञा स्वीकार है. जैसा आप चाहे वैसा ही होगा परन्तु आप मेरे भाग्य को नहीं बदल सकते और मुझे अपने भाग्य पर पूर्ण विश्वाश है. मनुष्य कितने भी मनोरथ का चिंतन कर ले परन्तु अंत में होना वही है जो उसके भाग्य में होगा. मनुष्य को कर्म करना चाहिए तथा फल तो उस परमपिता के ही अधीन है. इस बात को सुन ब्राह्मण को और भी अधिक क्रोध आ गया और उसने अपनी पुत्री का विवाह एक कुष्ठ रोग से ग्रसित व्यक्ति से करा दिया.

सुमति अपने पिता की आज्ञा पूरी करने के लिए अपने पति के साथ चल दी. सुमति के पति का अपना घर न होने के कारण उसे रात वन में घास पर लेट कर बितानी पड़ी. गरीब कन्या की यह दशा माँ भगवती से सहन नहीं हुई तथा उसके पूर्व जन्मों के फलस्वरूप माता ने उसे दर्शन दिए.

माँ भगवती को साक्षात् अपने समीप देख सुमति ने उन्हें प्रणाम किया तथा माँ बोली में तुम्हारे पूर्व जन्मों के पुण्यो के फलस्वरूप तुम्हे वर देना चाहती हु, मांगो तुम्हे क्या चाहिए. सुमति ने पहले माँ भगवती से अपने पूर्व जन्म के बारे में बतलाने का निवेदन किया. तब माँ भगवती सुमति से बोली की तुम पूर्व जन्म में भील की पतिव्रता स्त्री थी. एक दिन कुछ सिपाहियों ने चोरी के आरोप में तुम्हारे पति के साथ तुम्हे भी कैदखाने में बंद कर दिया. उन लोगो ने तुम्हारे पति के साथ तुम्हे भी खाने और पीने को कुछ नहीं दिया. इस तरह नवरात्रो के नौ दिनों तक ना तो तुमने कुछ खाया और नहीं कुछ पिया जिसके परिणाम स्वरूप तुम्हे नवरात्रो का पूण्य प्राप्त हुआ.

तुमने अनजाने में ही नवरात्रियों के नौ दिनों का व्रत करा तथा में तुम्हारे पूर्व जन्म के इस पूण्य के कारण तुम पर प्रसन्न हु व तुम्हे वरदान देना चाहती हु अतः अपनी इच्छा बताओ पुत्री. सुमति ने माता भगवती से वरदान स्वरूप अपने पति के कुष्ठ रोग को दूर करने को कहा. माता के आशीर्वाद से सुमति के पति को कुष्ठ के रोग से मुक्ति मिली तथा दोनों खुसी से रहने लगे.

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