कैसे करें इस साल के नवरात्रो में माँ दुर्गा की पूजा और जाने कौन सा मुहर्त है शुभ माँ के कलश स्थापना के लिए !

Navratri puja vidhi

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navratri puja vidhi :

हिन्दू धर्म में माँ भगवती को सम्पूर्ण संसार की शक्ति का स्रोत माना गया है उन्ही की कृपा से इस संसार सभी कार्य सम्पन्न होते है. नवरात्रि ही एक ऐसा पर्व है जब हम माँ दुर्गा, माँ काली, लक्ष्मी तथा सरस्वती की पूजा द्वारा उन्हें प्रसन्न कर अपने जीवन को सार्थक बना सकते है. नवरात्रो में माँ दुर्गा की पूजा विशेष फलदाई होती है, जाने किन विधियों द्वारा माँ दुर्गा की पूजा कर इस साल आप माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते है.

नवरात्रि में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है. नवरात्र का आरंभ प्रतिप्रदा तिथि के दिन कलश स्थापना के साथ करना चाहिए. नवरात्रियों के पुरे नौ दिनों तक सुबह, दिन और रात के समय माँ दुर्गा के नाम का स्मरण करना चाहिए था इन नौ दिनों उपवास धारण कर उनकी पूजा करनी चाहिए. अष्टमी और नवमी के दिन कुमारी पूजा और ब्राह्मणो से हवन कराना चाहिए इससे माँ भगवती अपने भक्तो पर शीघ्र कृपा करती है.

चैत्र नवरात्र 2016 :-
इस चैत्र में माँ दुर्गा का विशेष पर्व नवरात्रि 8 अप्रैल से शुरू होगी और 16 अप्रैल तक मनाई जाएगी. इस नवरात्रि में कलश स्थापना का शुभ मुहर्त 11 : 57 से लेकर 12 : 48 तक के बीच का है.

माँ दुर्गा की पूजा विधि :-
नवरात्रो के नौ दिनों में जब भी आप माता की पूजा कर रहे हो तो इस मन्त्र का उच्चारण अवश्य करें ”ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै” तथा साथ में दुर्गा सप्तवशी का पाठ करें. नौ दिनों तक माता का उपवास करें. यदि शक्ति न हो तो पहले, चौथे और आठवें दिन का उपवास अवश्य करें. ध्यान रहे की माँ के पूजा में तुलसी दल और दूर्वा न चढ़े क्योकि ये दोनों ही माँ दुर्गा की पूजा में निषिद्ध है.
माँ दुर्गा , लक्ष्मी, सरस्वती की प्रतिमा और उनके यंत्र के समक्ष उनके प्रिय चीजे बिल्वपत्र, कुमकुम, हल्दी, लोंग, केसर, इलायची, बादाम, काजू, पिस्ता गुलाब की पंखुड़ी व मोगरा आदि चढ़ना चाहिए. पूजा के समय लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए और लाल रंग का ही तिलक भी लगाना चाहिए. नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नाम का दिव्य ज्योत अवश्य जलाए.

पूजन में हमेशा लाल रंग के आसन का प्रयोग करना चाहिए. पूजन में प्रयुक्त होने वाली सामग्री को किसी अन्य साधना करने वाले या मंदिर के ब्राह्मण को देना चाहिए. माँ को प्रातः काल शहद मिला दूध अर्पित करना चाहिए. पूजन के समय इसे गर्हण करने से आत्मा एवं शरीर दोनों को बल प्राप्त होता है.

यदि श्रद्धालु नवरात्रो के नौ दिनों तक पूजा नहीं कर सकता तो अष्टमी के दिन विशेष पूजा करके भी नवरात्रो के पूण्य को प्राप्त कर सकता है. नवरात्रि में अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं को घर में बुला कर उनका पूजन करना चाहिए और उन्हें भोजन कराना चाहिए.

आखिर नवरात्रियों के पावन अवसर पर केवल माता को ही क्यों पूजा जाता है ?

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