क्या आप जानते है महाभारत युद्ध के इन 18 दिनों के रहस्यों को ?

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बारहवें दिन का युद्ध :-

कल के युद्ध में अर्जुन के कारण युधिष्ठिर को बंदी न बना पाने के कारण शकुनि व दुर्योधन अर्जुन को युधिष्ठिर से काफी दूर भेजने के लिए त्रिगर्त देश के राजा को उससे युद्ध कर उसे वहीं युद्ध में व्यस्त बनाए रखने को कहते हैं, वे ऐसा करते भी हैं, परंतु एक बार फिर अर्जुन समय पर पहुंच जाता है और द्रोण असफल हो जाते हैं.होता यह है कि जब त्रिगर्त, अर्जुन को दूर ले जाते हैं तब सात्यकि, युधिष्ठिर के रक्षक थे. वापस लौटने पर अर्जुन ने प्राग्ज्योतिषपुर (पूर्वोत्तर का कोई राज्य) के राजा भगदत्त को अर्धचंद्र को बाण से मार डाला. सात्यकि ने द्रोण के रथ का पहिया काटा और उसके घोड़े मार डाले. द्रोण ने अर्धचंद्र बाण द्वारा सात्यकि का सिर काट ‍लिया.

सात्यकि ने कौरवों के अनेक उच्च कोटि के योद्धाओं को मार डाला जिनमें से प्रमुख जलसंधि, त्रिगर्तों की गजसेना, सुदर्शन, म्लेच्छों की सेना, भूरिश्रवा, कर्णपुत्र प्रसन थे. युद्ध भूमि में सात्यकि को भूरिश्रवा से कड़ी टक्कर झेलनी पड़ी. हर बार सात्यकि को कृष्ण और अर्जुन ने बचाया.

पांडव पक्ष की क्षति : द्रुपद

कौरव पक्ष की क्षति : त्रिगर्त नरेश

तेरहवें दिन का युद्ध :-

महाभारत ( mahabharat ) के इस दिन  कौरवों ने चक्रव्यूह की रचना की. इस दिन दुर्योधन राजा भगदत्त को अर्जुन को व्यस्त बनाए रखने को कहते हैं. भगदत्त युद्ध में एक बार फिर से पांडव वीरों को भगाकर भीम को एक बार फिर हरा देते हैं फिर अर्जुन के साथ भयंकर युद्ध करते हैं. श्रीकृष्ण भगदत्त के वैष्णवास्त्र को अपने ऊपर ले उससे अर्जुन की रक्षा करते हैं.अंततः अर्जुन भगदत्त की आंखों की पट्टी को तोड़ देता है जिससे उसे दिखना बंद हो जाता है और अर्जुन इस अवस्था में ही छल से उनका वध कर देता है. इसी दिन द्रोण युधिष्ठिर के लिए चक्रव्यूह रचते हैं जिसे केवल अभिमन्यु तोड़ना जानता था, परंतु निकलना नहीं जानता था. अतः अर्जुन युधिष्ठिर, भीम आदि को उसके साथ भेजता है, परंतु चक्रव्यूह के द्वार पर वे सबके सब जयद्रथ द्वारा शिव के वरदान के कारण रोक दिए जाते हैं और केवल अभिमन्यु ही प्रवेश कर पाता है.

ये लोग करते हैं अभिमन्यु का वध : कर्ण के कहने पर सातों महारथियों कर्ण, जयद्रथ, द्रोण, अश्वत्थामा, दुर्योधन, लक्ष्मण तथा शकुनि ने एकसाथ अभिमन्यु पर आक्रमण किया. लक्ष्मण ने जो गदा अभिमन्यु के सिर पर मारी वही गदा अभिमन्यु ने लक्ष्मण को फेंककर मारी. इससे दोनों की उसी समय मृत्यु हो गई.अभिमन्यु के मारे जाने का समाचार सुनकर जयद्रथ को कल सूर्यास्त से पूर्व मारने की अर्जुन ने प्रतिज्ञा की अन्यथा अग्नि समाधि ले लेने का वचन दिया.

पांडव पक्ष की क्षति : अभिमन्यु

कौन मजबूत रहा : पांडव

चौदहवें दिन का युद्ध :-

महाभारत ( mahabharat ) के इस दिन  अर्जुन की अग्नि समाधि वाली बात सुनकर कौरव पक्ष में हर्ष व्याप्त हो जाता है और फिर वे यह योजना बनाते हैं कि आज युद्ध में जयद्रथ को बचाने के लिए सब कौरव योद्धा अपनी जान की बाजी लगा देंगे. द्रोण जयद्रथ को बचाने का पूर्ण आश्वासन देते हैं और उसे सेना के पिछले भाग में छिपा देते हैं.युद्ध शुरू होता है भूरिश्रवा, सात्यकि को मारना चाहता था तभी अर्जुन ने भूरिश्रवा के हाथ काट दिए, वह धरती पर गिर पड़ा तभी सात्यकि ने उसका सिर काट दिया. द्रोण द्रुपद और विराट को मार देते हैं.

तब कृष्ण अपनी माया से सूर्यास्त कर देते हैं. सूर्यास्त होते देख अर्जुन अग्नि समाधि की तैयारी करने लगे जाते हैं. छिपा हुआ जयद्रथ जिज्ञासावश अर्जुन को अग्नि समाधि लेते देखने के लिए बाहर आकर हंसने लगता है, उसी समय श्रीकृष्ण की कृपा से सूर्य पुन: निकल आता है और तुरंत ही अर्जुन सबको रौंदते हुए कृष्ण द्वारा किए गए क्षद्म सूर्यास्त के कारण बाहर आए जयद्रथ को मारकर उसका मस्तक उसके पिता के गोद में गिरा देते हैं.

पांडव पक्ष की क्षति : द्रुपद, विराट

कौरव पक्ष की क्षति : जयद्रथ, भगदत्त

पन्द्रहवें दिन का युद्ध :-

महाभारत ( mahabharat ) के इस दिन  द्रोण के संहारक शक्ति के बढ़ते जाने से पांडव सेना में हाहाकार मच गया. पिता पुत्र ने मिलकर महाभारत युद्ध में पांडवो की हार सुनिश्चित कर दी. गुरु द्रोण के इस तरह पांडवो की सेना को अति शीघ्र नष्ट करते देख अर्जुन ने श्री कृष्ण से उपाय माँगा. तब श्री कृष्ण ने उपाय सुझाते हुए अर्जुन से कहा की गुरु द्रोण को यह सुचना दो की आश्व्थामा मारा गया. गुरु द्रोण यह सुनते ही स्वयं अस्त्र शस्त्र झोड़ देंगे. इसके बाद भीम ने आश्व्थामा नामक हाथी को मार दिया. तथा यह सुचना गुरु द्रोण के कानो तक पहुंचाई . जब यह बात गुरु द्रोण को पता चली तो वे सर्वप्रथम युधिस्ठर के पास गए और उनसे सच जानना चाहा. युधिस्ठर ने कहा हां आश्व्थामा मारा गया है परन्तु ……. युधिस्ठर की पूरी बात कहने से पूर्व ही श्री कृष्ण ने संख इतनी जोर से बजाय की गुरु द्रोण सिर्फ यह सुन पाया की आश्व्थामा मारा गया. गुरु द्रोण के हथियार जमीन पर गेरते ही श्री कृष्ण ने उन पर अर्जुन से बाण चलने को कहा तथा कुछ पलो में है अर्जुन ने गुरु द्रोण को अपने बाणों से भेद डाला और इस तरह गुरु द्रोण का वध हो गया.

कौरव पक्ष की क्षति : द्रोण

कौन मजबूत रहा : पांडव

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