क्या आप जानते है महाभारत युद्ध के इन 18 दिनों के रहस्यों को ?

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आठवें दिन का युद्ध :-

महाभारत ( mahabharat ) के  इस दिन कौरवों ने कछुआ व्यूह तो पांडवो ने तीन शिखरों वाल व्यूह रचा. पांडवो द्वारा इस दिन धृष्ट्राज के आठो पुत्रों का वध हो जाता है वही अर्जुन की दूसरी पत्नी उल्पी के पुत्र इरावन का बकासुर के पुत्र दवारा वध कर दिया जाता है. घटोत्कच द्वारा दुर्योधन पर शक्ति का प्रयोग परंतु बंगनरेश ने दुर्योधन को हटाकर शक्ति का प्रहार स्वयं के ऊपर ले लिया तथा बंगनरेश की मृत्यु हो जाती है. इस घटना से दुर्योधन के मन में मायावी घटोत्कच के प्रति भय व्याप्त हो जाता है.

तब भीष्म की आज्ञा से भगदत्त घटोत्कच को हराकर भीम, युधिष्ठिर व अन्य पांडव सैनिकों को पीछे ढकेल देता है. दिन के अंत तक भीमसेन धृतराष्ट्र के नौ और पुत्रों का वध कर देता है.

पांडव पक्ष की क्षति : अर्जुन पुत्र इरावान का अम्बलुष द्वारा वध.

कौरव पक्ष की क्षति : धृतराष्ट्र के 17 पुत्रों का भीम द्वारा वध.

कौन मजबूत रहा : इस दोनों ही पक्ष ने डट किया और दोनों की पक्ष को नुकसान उठाना पड़ा. हालांकि कौरवों को ज्यादा क्षति पहुंची.

नौवें दिन का युद्ध :-

महाभारत ( mahabharat ) के इस दिन के युद्ध में कृष्ण के उपदेश के चलते भयंकर युद्ध हुआ जिसमे भीष्म ने अपनी ताकत दिखाते हुए अर्जुन के रथ को जर्जर कर दिया और अर्जुन को घायल. भीष्म के इस भयंकर संहार और अपने रथ को जर्जर अवस्था में देख कृष्ण से रहा नहीं जाता और वे अपने रथ का पहिया लेकर भीष्म की ओर बढ़ते है परन्तु बाद में उन्हें जब अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान आता है तो वे शांत हो जाते है. परन्तु इस दिन भीष्म ने पांडवो की सेना को बहुत नुक्सान पहुंचाते है.

कौन मजबूत रहा :- इस दिन कौरवों का पक्ष मजबूत रहता है.

दसवां दिन का युद्ध :-

महाभारत ( mahabharat ) के इस दिन  भीष्म द्वारा बड़े पैमाने पर पांडवों की सेना को मार देने से घबराए पांडव पक्ष में भय फैल जाता है, तब श्रीकृष्ण के कहने पर पांडव भीष्म के सामने हाथ जोड़कर उनसे उनकी मृत्यु का उपाय पूछते हैं. भीष्म कुछ देर सोचने पर उपाय बता देते हैं.इसके बाद भीष्म पांचाल तथा मत्स्य सेना का भयंकर संहार कर देते हैं. फिर पांडव पक्ष युद्ध क्षे‍त्र में भीष्म के सामने शिखंडी को युद्ध करने के लिए लगा देते हैं. युद्ध क्षेत्र में शिखंडी को सामने डटा देखकर भीष्म ने अपने अस्त्र त्याग दिए. इस दौरान बड़े ही बेमन से अर्जुन ने अपने बाणों से भीष्म को छेद दिया. भीष्म बाणों की शरशय्या पर लेट गए. भीष्म ने बताया कि वे सूर्य के उत्तरायण होने पर ही शरीर छोड़ेंगे, क्योंकि उन्हें अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वर प्राप्त है.

पांडव पक्ष की क्षति : शतानीक

कौरव पक्ष की क्षति : भीष्म

कौन मजबूत रहा : पांडव

ग्याहरवें दिन का युद्ध :-

महाभारत ( mahabharat ) के इस दिन  भीष्म के शरशय्या में लेटें पर गुरु द्रोण को कौरवों द्वारा सेनापति नियुक्त किया जाता है ग्यारहवें दिन सुशर्मा तथा अर्जुन, शल्य तथा भीम, सात्यकि तथा कर्ण और सहदेव तथा शकुनि के मध्य युद्ध हुआ. कर्ण भी इस दिन पांडव सेना का भारी संहार करता है. दुर्योधन और शकुनि गुरु द्रोण से कहते है की यदि युधिस्ठर को युद्ध में हराकर बंदी बना लिया जाए तो युद्ध अपने आप समाप्त हो जाएगा उन दोनों के कहने पर गुरु द्रोण युधिस्ठर के साथ युद्ध कर उन्हें हरा देते है परन्तु जब वे उन्हें बंदी बना कर ले जाते है तभी अर्जुन वहां आकर अपनी बनो के वर्षा द्वारा उन्हें रोक देते है. नकुल भी युधिस्ठर के साथ तथा अर्जुन के साथ हो जाने से कौरव उन्हें बंधी नहीं बना पाते.

पांडव पक्ष की क्षति : विराट का वध

कौन मजबूत रहा : कौरव

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