क्या आप जानते है महाभारत युद्ध के इन 18 दिनों के रहस्यों को ?

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तीसरे दिन का युद्ध :-

कौरवों ने गरूड़ तथा पांडवों ने अर्धचंद्राकार जैसी सैन्य व्यूह रचना की. कौरवों की ओर से दुर्योधन तथा पांडवों की ओर से भीम व अर्जुन सुरक्षा कर रहे थे. इस दिन भीम ने घटोत्कच के साथ मिलकर दुर्योधन की सेना को युद्ध से भगा दिया. यह देखकर भीष्म भीषण संहार मचा देते हैं. श्रीकृष्ण अर्जुन को भीष्म वध करने को कहते हैं, परंतु अर्जुन उत्साह से युद्ध नहीं कर पाता जिससे श्रीकृष्ण स्वयं भीष्म को मारने के लिए उद्यत हो जाते हैं, परंतु अर्जुन उन्हें प्रतिज्ञारूपी आश्वासन देकर कौरव सेना का भीषण संहार करते हैं. वे एक दिन में ही समस्त प्राच्य, सौवीर, क्षुद्रक और मालव क्षत्रियगणों को मार गिराते हैं.भीम के बाण से दुर्योधन अचेत हो गया और तभी उसका सारथी रथ को भगा ले गया. भीम ने सैकड़ों सैनिकों को मार गिराया. इस दिन भी कौरवों को ही अधिक क्षति उठाना पड़ती है. उनके प्राच्य, सौवीर, क्षुद्रक और मालव वीर योद्धा मारे जाते हैं.

कौन मजबूत रहा : इस दोनों ही पक्ष ने डट कर मुकाबला किया.

युद्ध का चौथा दिन :-

महाभारत ( mahabharat ) के इस दिन कौरवों की सेना को  युद्ध  भारी नुक्सान पहुंचा. इस दिन कौरवों ने अर्जुन को अपने बाणों से ढक दिया. परन्तु अर्जुन ने अपने सामर्थ्य से सभी को मार भगाया. भीम ने इस दिन कौरवों के सेना में खलबली मचा के रख दी थी. दुर्योधन ने अपनी गज सेना को भीम को मारने के लिए भेजा परन्तु भीम ने अपने पुत्र घटोत्कच की सहायता से सभी का नाश कर दिया. इस युद्ध में 14 कौरव भी मारे गए. परन्तु राजा भगदत्त द्वारा जल्द ही भीम पर नियंत्रण पा लिया गया. भीम और अर्जुन ने मिलकर भीष्म को कभी कड़ी चुनौती दी.

कौन मजबूत रहा :- इस दिन कौरवों को भारी नुक्सान उठाना पड़ा और पांडवो का पक्ष भारी रहा

पांचवें दिन का युद्ध :-

श्रीकृष्ण के उपदेश के बाद युद्ध की शुरुआत हुई और फिर भयंकर मार-काट मची. दोनों ही पक्षों के सैनिकों का भारी संख्या में वध हुआ. इस दिन भीष्म ने पांडव सेना को अपने बाणों से ढंक दिया. उन पर रोक लगाने के लिए क्रमशः अर्जुन और भीम ने उनसे भयंकर युद्ध किया. सात्यकि ने द्रोणाचार्य को भीषण संहार करने से रोके रखा. भीष्म द्वारा सात्यकि को युद्ध क्षेत्र से भगा दिया गया. सात्यकि के 10 पुत्र मारे गए.

कौन मजबूत रहा : इस दोनों ही पक्ष ने डट कर मुकाबला किया.

छठे दिन का युद्ध :-

कौरवों ने क्रोंचव्यूह तथा पांडवों ने मकरव्यूह के आकार की सेना कुरुक्षे‍त्र में उतारी. भयंकर युद्ध के बाद द्रोण का सारथी मारा गया. युद्ध में बार-बार अपनी हार से दुर्योधन क्रोधित होता रहा, परंतु भीष्म उसे ढांढस बंधाते रहे. अंत में भीष्म द्वारा पांचाल सेना का भयंकर संहार किया गया.

कौन मजबूत रहा : इस दोनों ही पक्ष ने डट कर मुकाबला किया.

सातवें दिन का युद्ध :-

महाभारत   ( mahabharat ) के  सातवें दिन कौरवों ने मण्डलाकर व्यूह की रचना करी और पांडवो ने व्रज व्यूह की रचना बनाई मंडलाकार में एक हाथी के पास सात रथ, एक रथ की रक्षार्थ सात अश्‍वारोही, एक अश्‍वारोही की रक्षार्थ सात धनुर्धर तथा एक धनुर्धर की रक्षार्थ दस सैनिक लगाए गए थे. सेना के मध्य दुर्योधन था. वज्राकार में दसों मोर्चों पर घमासान युद्ध हुआ.

महाभारत ( mahabharat ) के इस दिन अर्जुन अपनी युक्ति से कौरव सेना में भगदड़ मचा देता है. धृष्टद्युम्न दुर्योधन को युद्ध में हरा देता है. अर्जुन पुत्र इरावान द्वारा विन्द और अनुविन्द को हरा दिया जाता है, भगदत्त घटोत्कच को और नकुल सहदेव मिलकर शल्य को युद्ध क्षेत्र से भगा देते हैं. यह देखकर एकभार भीष्म फिर से पांडव सेना का भयंकर संहार करते हैं.विराट पुत्र शंख के मारे जाने से इस दिन कौरव पक्ष की क्षति होती है.

कौन मजबूत रहा : इस दोनों ही पक्ष ने डट कर मुकाबला किया.

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