क्या आप जानते है महाभारत युद्ध के इन 18 दिनों के रहस्यों को ?

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कौरवों की ओर से ये यौद्धा लड़े थे : भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा, मद्रनरेश शल्य, भूरिश्र्वा, अलम्बुष, कृतवर्मा, कलिंगराज, श्रुतायुध, शकुनि, भगदत्त, जयद्रथ, विन्द-अनुविन्द, काम्बोजराज, सुदक्षिण, बृहद्वल, दुर्योधन व उसके 99 भाई सहित अन्य हजारों यौद्धा.

पांडवों की ओर थे ये जनपद : पांचाल, चेदि, काशी, करुष, मत्स्य, केकय, सृंजय, दक्षार्ण, सोमक, कुन्ति, आनप्त, दाशेरक, प्रभद्रक, अनूपक, किरात, पटच्चर, तित्तिर, चोल, पाण्ड्य, अग्निवेश्य, हुण्ड, दानभारि, शबर, उद्भस, वत्स, पौण्ड्र, पिशाच, पुण्ड्र, कुण्डीविष, मारुत, धेनुक, तगंण और परतगंण.

पांडवों की ओर से लड़े थे ये यौद्धा : भीम, नकुल, सहदेव, अर्जुन, युधिष्टर, द्रौपदी के पांचों पुत्र, सात्यकि, उत्तमौजा, विराट, द्रुपद, धृष्टद्युम्न, अभिमन्यु, पाण्ड्यराज, घटोत्कच, शिखण्डी, युयुत्सु, कुन्तिभोज, उत्तमौजा, शैब्य और अनूपराज नील.

तटस्थ जनपद : विदर्भ, शाल्व, चीन, लौहित्य, शोणित, नेपा, कोंकण, कर्नाटक, केरल, आन्ध्र, द्रविड़ आदि ने इस युद्ध में भाग नहीं लिया.

पितामह भीष्म की सलाह पर दोनों दलों ने एकत्र होकर युद्ध के कुछ नियम बनाए. उनके बनाए हुए नियम निम्नलिखित हैं

1 .प्रतिदिन युद्ध सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक ही होगा , सूर्यास्त होते ही सब लोग अपने शिविरों की ओर लोट जायेंगे.

2 . युद्ध समाप्त होने के पश्चात सभी लोग छल-कपट छोड़कर एक दूसरे के साथ भाइयो वाला व्यवहार करेंगे.

3 .जो रथ पर होगा वह दूसरे रथी से ही युद्ध करेगा इसी तरह हाथी वाल हाथी वाले से और पैदल वाले पैदल वालो से.

4 . एक वीर से केवल एक ही वीर युद्ध कर सकता है.

5 . भय आदि से भागते हुए या शरण में आये शरणार्थियों पर कोई भी अस्त्र-शस्त्र नहीं चलाएगा.

6 . जो भी व्यक्ति युद्ध में निहत्था हो जायेगा उस पर भी शस्त्र नहीं चलाया जायेगा.

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8 . युद्ध में जो व्यक्ति सेवक का कार्य करेगा उस पर कोई अस्त्र शस्त्र का प्रयोग नहीं करेगा.

प्रथम दिन का युद्ध :-

महाभारत ( mahabharat ) के प्रथम दिन जब अर्जुन ने दूसरी तरफ खड़ी दुश्मन सेना में अपने ही सगे भाई बन्धुओ ,गुरु , पितामाह आदि को देखा तो उन्होंने कृष्ण से अपने ही सगे संबंधियों के विरुद्ध युद्ध नहीं करने की बात कही तब भगवान श्री कृष्ण उन्हें समझाते हुए गीता का उपदेश दिया. उसी समय भीष्म पितामह ने सभी योद्धाओं से कहा की कुछ ही देर में युद्ध आरम्भ होने वाला है अतः जो भी योद्धा अपना पक्ष बदलना चाहता है वह इसके लिए स्वतंत्र है. तभी कौरव की सेना में से युयुत्सु अपनी सेना लेते हुए पांडवो के पक्ष में हो लिया. ऐसा युधिस्ठर के क्रियाकलापों के कारण सम्भव हुआ. कृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता उपदेश देने के पश्चात अर्जुन ने देवदत्त नामक संख बजाकर युद्ध का आरम्भ किया.

महाभारत के  इस दिन युद्ध में 10 सैनिक मारे गए. भीम ने दुःशासन के साथ युद्ध करा वही अर्जुन पुत्र अभिमन्यु ने भीष्म के साथ युद्ध करते हुए उनके रथ का ध्वजदंड उखाड़ दिया. इस युद्ध में पांडवो को भारी नुक्सान उठाना पड़ा. पांडवो की ओर से लड़ रहे विराट नरेश के पुत्र उत्तर और श्वेत क्रमश शल्य और भीष्म के हाथो मारे गए. भीष्म ने पांडवो की सेना को काफी नुकसान पहुंचाया.

कौन मजबूत रहा :- पहले दी पांडवो की सेना को भारी नुक्सान पहुंचा तथा कौरवों के सेना उन पर भारी पड़ी.

दूसरे दिन का युद्ध :

कृष्ण के उपदेश के बाद अर्जुन तथा भीष्म, धृष्टद्युम्न तथा द्रोण के मध्य युद्ध हुआ. सात्यकि ने भीष्म के सारथी को घायल कर दिया.द्रोणाचार्य ने धृष्टद्युम्न को कई बार हराया और उसके कई धनुष काट दिए, भीष्म द्वारा अर्जुन और श्रीकृष्ण को कई बार घायल किया गया. इस दिन भीम का कलिंगों और निषादों से युद्ध हुआ तथा भीम द्वारा सहस्रों कलिंग और निषाद मार गिराए गए, अर्जुन ने भी भीष्म को भीषण संहार मचाने से रोके रखा. कौरवों की ओर से लड़ने वाले कलिंगराज भानुमान, केतुमान, अन्य कलिंग वीर योद्धा मार गए.

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कौन मजबूत रहा : दूसरे दिन कौरवों को नुकसान उठाना पड़ा और पांडव पक्ष मजबूत रहा.

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