क्या आप जानते है महाभारत युद्ध के इन 18 दिनों के रहस्यों को ?

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Mahabharat :- 

माना जाता ही की महाभारत ( mahabharat ) जैसे भीषण युद्ध में एक मात्र जीवित बचने वाला कौरव युतुत्सु था तथा 24,165 कौरव सैनिक लापता हो गये थे. महाभारत( mahabharat )के एक पात्र शल्य , लव कुश के 50 वी पीढ़ी में हुए थे जो महाभारत ( mahabharat ) के युद्ध में कौरवों की पक्ष से लड़े थे.

शोधानुसार यह ज्ञात किया गया है की जब महाभारत ( mahabharat ) का युद्ध हुआ था तब भगवान श्री कृष्ण की आयु 83 वर्ष थी, उन्होंने महाभारत ( mahabharat ) युद्ध के 36 वर्ष बाद अपनी देह त्यागी थी . इस से यह ज्ञात होता है भगवान श्री कृष्ण 119 वर्ष तक धरती में विद्यमान रहे. उन्होंने द्वापर युग के अंत एवं कलयुग के आरम्भ में दोनों के संधि के समय अपना मनुष्य शरीर त्यागा. ज्योतिषिय गणना के अनुसार कलियुग का आरंभ शक संवत से 3176 वर्ष पूर्व की चैत्र शुक्ल एकम (प्रतिपदा) को हुआ था. वर्तमान में 1936 शक संवत है. इस प्रकार कलियुग को आरंभ हुए 5112 वर्ष हो गए हैं.

इस प्रकार भारतीय मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण विद्यमानता या काल शक संवत पूर्व 3263 की भाद्रपद कृ. 8 बुधवार के शक संवत पूर्व 3144 तक है. भारत का सर्वाधिक प्राचीन युधिष्ठिर संवत जिसकी गणना कलियुग से 40 वर्ष पूर्व से की जाती है, उक्त मान्यता को पुष्ट करता है. कलियुग के आरंभ होने से 6 माह पूर्व मार्गशीर्ष शुक्ल 14 को महाभारत ( mahabharat )का युद्ध का आरंभ हुआ था, जो 18 दिनों तक चला था. आओ जानते हैं महाभारत ( mahabharat ) युद्ध के 18 दिनों के रोचक घटनाक्रम को.

महाभारत ( mahabharat ) युद्ध से पूर्व पांडवों ने अपनी सेना का पड़ाव कुरुक्षेत्र के पश्चिमी क्षेत्र में सरस्वती नदी के दक्षिणी तट पर बसे समन्त्र तीर्थ के पास हिरण्यवती नदी के तट पर डाला. कौरवों ने कुरुक्षेत्र के दक्षिणी भाग में वहां से कुछ योजन की दुरी पर एक समतल मैदान में अपना पड़ाव डाला. पांडव और कौरवों दोनों के शिवरों में उत्तम व्यवस्था का इंतजाम किया गया था. उन के हजारो शिवरों में से अनेक शिविर में प्रचुर मात्रा में खाद्य समग्री भरी पड़ी थी, घोड़ो, हाथी एवं रथो की व्यवस्था थी. तथा कुछ शिविर अस्त्र शस्त्र, संख, तथा अन्य युद्ध में प्रयोग होने वाली वस्तुओं से भरी पड़ी थी. वध और शिल्पी भी इन शिविरों में वेतन पर रखे गए थे.

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