जानिये महादेव शिव के जन्म से जुडी अनसुनी कथाएं तथा उनके बाल्य रूप का वर्णन !

Lord Shiva balak roop

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तब सिर्फ़ भगवान विष्णु जल सतह पर अपने शेषनाग पर लेटे हुए थे उस समय उनके नाभि से कमल नाल पर ब्रह्म देव प्रकट हुए. जब भगवान विष्णु व ब्र्ह्मा जी सृष्टि के बारे में बात कर रहे तब तभी शिव उनके समाने प्रकट हुए परन्तु ब्र्ह्मा ने शिव को पहचाने से इंकार कर दिया. तब शिव के रूठ जाने के भय से भगवान विष्णु ने ब्र्ह्मा को दिव्य दृष्टि प्रदान करी व उन्हें भगवान शिव की याद दिलाई. ब्र्ह्मा जी को अपने गलती का अहसास हुआ और अपने पछाताप के लिए उन्होंने भगवान शिव से उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने की बात कहि. शिव ने ब्र्ह्मा को क्षमा करते हुए उन्हें उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद दिया.

कालांतर में विष्णु के कान के मल से उतपन्न मधु केटभ का वध कर ब्रह्म देव को सृष्टि के निर्माण के समय एक बच्चे की जरूरत पड़ी तब ब्रह्म देव को भगवान शिव के आशीर्वाद का ध्यान आया तथा इस प्रकार ब्रह्म देव की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके गोद में बालक के रूप में प्रकट हुए.

श्रीमद भगवद में बतलाया गया है की जब भगवान विष्णु और ब्रह्म देव दोनों में अहंकार उत्तपन हो गया था तथा वे एक-दूसरे से अपने आपको श्रेष्ठ बतलाने के लिए लड़ने लगे तब उनके सामने भगवान शिव एक तेज प्रकाशवान खम्भे के रूप में प्रकट हुए जिसका ओर-छोर ब्र्ह्मा व विष्णु नहीं समझ पाये थे.

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