जानिये महादेव शिव के जन्म से जुडी अनसुनी कथाएं तथा उनके बाल्य रूप का वर्णन !

Lord Shiva balak roop

Lord Shiva balak roop

विष्णु पुराण में वर्णित एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शिव के बाल्य रूप का वर्णन किया गया है , यह कथा बेहद मनभावन है जिसमे बताया गया है की एक बार ब्रह्म देव को बच्चे की जरूरत थी तथा उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए बेहद कठोर तपस्या करी. उनके तपस्या से प्रसन्न भगवान शिव रोते हुए बालक के रूप में ब्रह्म देव के गोद में प्रकट हुए. अपने गोद में एक छोटे से बच्चे को रोते देख जब ब्र्ह्मा ने उससे रोने का कारण पूछा तो बच्चे ने बड़ी मासूमियत से उत्तर दिया की उसका नाम ब्र्ह्मा नहीं है इसलिए वह रो रहा है. तब ब्र्ह्मा ने भगवान शिव का नाम रूद्र ( रूद्र का अर्थ होता है रोने वाला ) रखा परन्तु इस पर भी शिव रूपी वह बालक चुप नहीं हुआ.

तब ब्र्ह्मा ने उन्हें दुसरा नाम दिया परन्तु फिर भी जब वह बालक चुप नहीं हुआ तब ब्र्ह्मा जी उस बालक का नाम देते गए और वह रोता रहा. जब ब्रह्म देव ने उस बालक को उसका आठवाँ नाम दिया तब वह बालक चुप हुआ इस प्रकार भगवान शिव को ब्रह्म देव के इन आठ नमो ( रूद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव ) द्वारा जाने जाने लगा. शिव पुराण में यह उल्लेखित है की भगवान शिव के ये आठो नाम पृथ्वी पर लिखे गए थे.

शिव के इस प्रकार ब्र्ह्मा के पुत्र के रूप में जन्म लेने और उनके आठ नाम रखने के पीछे विष्णु पुराण में यह बतलाया गया है की जब धरती, पातल व बृह्माण्ड सभी जल मग्न थे उस समय भगवान ब्र्ह्मा, विष्णु तथा शिव के आल्वा कोई भी देव या प्राणी विध्यमान नहीं था.

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