जाने महादेव शिव के अनोखे स्वरूप नटराज का रहस्य !

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Nataraja :-

नटराज ( nataraja ) भगवान शिव के ही एक स्वरूप का नाम है जो न सिर्फ उनके सम्पूर्ण काल एवं स्थान को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह भी बिना किसी संशय स्थापित करता है की इस पुरे सृष्टि में सारा जीवन, उनके गति कम्पन तथा इस सृष्टि से भी परे शून्य की निशब्दता सब कुछ महादेव शिव और उनके नटराज ( nataraja ) स्वरूप में निहित है.

भगवान शिव के नटराज ( nataraja )  स्वरूप के उतपत्ति की विषयक धारणा ” आनंदम तांडवम ” से जुडी हुई है. नटराज  दो शब्दों के समावेश से मिलकर बना है नट (कला) और राज, यानि नटराज ( nataraja ) का अर्थ होता है नृत्य करने वालो का सम्राट या इस सृष्टि के सभी नृत्य करने वाले प्राणियों का नेतृत्वकर्ता. एक और अर्थ के अनुसार इस पुरे संसार में सर्जन और विनाश का जो निर्देशन करंता है वह भगवान शिव का स्वरूप नटराज ( nataraja ) है.

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शिव नटराज ( nataraja ) रूप में सभी कलाओं के आधार कहलाते है. शिव का तांडव नृत्य प्रसिद्ध है जिसके दो रूप है .

पहला उनके क्रोध से परिपूर्ण, प्रलयंकारी रौद्र तांडव तथा दुसरा सभी के मन को आनंद पहुंचाने वाला आनंद तांडव. अधिकांश लोग शिव के तांडव से अभिप्राय उनके क्रोधित स्वरूप से लेते है परन्तु वास्तविकता में जब शिव क्रोधित अवस्था में रौद्र तांडव करते है तो वे रूद्र कहलाते है तथा जब शिव आनंद की मुद्रा में तांडव करते है तो उनका यह रूप नटराज ( nataraja ) कहलाता है.

प्राचीन ऋषि मुनियों के अनुसार शिव के आनंद तांडव से ही सृष्टि आस्तित्व में आती है तथा उनके रौद्र तांडव से स्रष्टि का विनाश होता है.

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