जाने आखिर क्या कारण था रावण के भाई कुम्भकर्ण के छः महीने सोने का रहस्य और उससे जुडी कुछ रोचक बाते !

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कुम्भकर्ण को नारद ने दिया था तत्वज्ञान :-

रामायण में बताया गया है की कुम्भकर्ण ( kumbhkaran ) छः महीने के लिए सोया करता था और जब वह जागता था तो उसका पूरा दिन भोजन करने और परिवार का हाल-समाचार पूछने में निकल जाता था. इस तरह कुम्भकर्ण ( kumbhkaran ) अपने भ्राता रावण के कार्यो से दूर रहता था. कुम्भकर्ण ( kumbhkaran ) के राक्षस होने के बावजूद उसने कभी अपने जिंदगी में कोई अधर्म का कार्य नहीं किया था. यही कारण था की स्वयं देवऋषि नारद ने उसे तत्वज्ञान दिया था.

सदैव धर्म के मार्ग चलने के बावजूद अपने भ्राता रावण का मान रखने के लिए किया था राम से युद्ध :

रामायण में  जब रावण को बार-बार कुम्भकर्ण ( kumbhkaran ) के समझाने पर भी रावण ने राम से युद्ध करने की जिद नहीं छोड़ी तो अपने भ्राता का मान रखने के लिए कुम्भकर्ण ने राम से युद्ध किया. वह जानता था की श्री राम भगवान विष्णु के अवतार है .

कुम्भकर्ण ( kumbhkaran ) भक्ति भाव से राम से युद्ध करने गया ताकि उसे उनके हाथो मुक्ति प्राप्त हो सके. प्रभु श्री राम का बाण लगते ही कुम्भकर्ण ( kumbhkaran ) ने अपना शरीर त्याग दिया था और वह वैकुंठ लोक को प्राप्त हुआ.

जाने लंकाधिपति रावण के वे अनोखे सात सपने, जिन्हे वह अपने जीवन काल में पूर्ण करने में असमर्थ रहा !