जानिये आखिर क्यों भगवान श्री कृष्ण ने पूरी काशी को अपने सुदर्शन चक्र से किया भस्म, तथा कैसे हुआ काशी का वाराणसी के रूप में पुनर्जन्म !

Kasi Viswanath City:- 

काशी ( kasi viswanath city ) को हिन्दू धर्म में पूण्य तीर्थ स्थल माना जाता है तथा यह आध्यात्मिक नगरी कहलाती है. इसका उल्लेख अनेक धार्मिक ग्रंथो और पुराणों में मिलता है. परन्तु क्या आप को पता है की काशी ( kasi viswanath city ) जैसी पूण्य भूमि को एक बार भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से भस्म कर दिया था. आइये जानते है आखिर क्यों भगवान श्री कृष्ण को काशी नगरी ( kasi viswanath city ) को भस्म करना पड़ा.

यह कथा द्वापर युग की है तथा इस कथा का संबंध जरासंध से भी है. मगध का राजा जरासंध अत्यन्त क्रूर था तथा उसके पास असंख्य सैनिक तथा विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र थे. उसकी सेना इतनी शक्तिशाली थी की वह पल भर में ही अनेको बड़े-बड़े सम्राज्यो को धरासायी कर सकती थी.इसलिए अधिकतर राजा जरासंध से डरे रहते थे तथा उसे अपना मित्र बनाये रखना चाहते थे. जरासंध की दो पुत्रिया थी जिनका नाम अस्ति और प्रस्ती था. जरासंध ने अपनी दोनों पुत्रियों का विवाह मथुरा राज्य के राजा कंश से कर दिया.

कंश एक अत्याचारी राजा था जिसके अत्याचार से उसकी प्रजा बहुत दुखी हो चुकी थी. उसके अत्याचार से मथुरा के लोगो को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने कंश का वध कर दिया. अपने दामाद की मृत्यु से क्रोधित होकर जरासंध प्रतिशोध की ज्वाला में जलने लगा. उसने अनेको बार मथुरा में आक्रमण किया परन्तु श्री कृष्ण के हाथो वह परास्त होता रहा और हर बार युद्ध के बाद श्री कृष्ण जरासंध को जीवित झोड़ देते.

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