तांत्रिको की सिद्धि प्राप्ति का प्रसिद्ध स्थान, कामख्या मंदिर !

Kamakhya Temple:

देवी शक्ति ( Adi Shakti ) के 51 शक्तिपीठों ( 51 Shakti Peeth )  में से एक कमाख्या शक्तिपीठ भारत के असम राज्य में स्थित है. कामाख्या मंदिर(Kamakhya Temple) असम राज्य के राजधानी दिसपुर के पास गुवाहटी से 10 किलोमीटर दूर नीलाचल पर्वत पर स्थित है. उच्ची पहाड़ी में स्थित कामख्या मंदिर को तांत्रिक महत्व से भी देखा जाता है. कालिका पुराण और शक्ति पुराण में कामाख्या शक्तिपीठ  Kamakhya Devi Temple को सर्वोच्च बताया गया है. प्राचीन काल से ही यह एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रहा है तथा वर्तमान में तांत्रिक लोगो के मन्त्र सिद्ध करने की दृष्टि से यह सर्वोच्च स्थान बन चूका है|

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Kamakhya Temple Guwahati

कामाख्या मंदिर बेहद खूबसूरत और अपनी एक अलग संस्कृति लिए हुए पूर्व उत्तर भारत का प्रवेश द्वार गुवाहाटी असम Kamakhya Temple Assam का सबसे बड़ा शहर है। ब्रम्पुत्र नदी के किनारे यह स्थित शहर प्राकृतिक सुंदरता से ओतप्रोत है। यहाँ न सिर्फ राज्य पुरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की विविधता साफ़ तोर पर देखी जा सकती है। संस्कृति, व्य्वसाय और धार्मिक गतिविधिओ का केंद्र होने के कारण आप यहाँ विभिन्न नस्लों धर्म और क्षेत्रों के लोगो के एक साथ देख सकते है। यूँ तो इस शहर में घूमने और देखने के लिए बहुत कुछ है परन्तु यह शहर पर्यटन सथलो से भरा पड़ा है। यदि आपने यहाँ का रहस्मयी कामाख्या मंदिर नहीं देखा और उसके दर्शन नहीं किये तो समझ लीजिये आपकी यात्रा अधूरी है। जानिए माँ भगवती का नाम कैसे पड़ा दुर्गा !

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Kamakhya temple history in hindi:

जब भगवान विष्णु ( lord vishnu ) ने देवी सती के शरीर को अपने चक्रों द्वारा 51 टुकड़ो में विभाजित कर दिया था तो उनके शरीर के प्रत्येक हिस्से पृथ्वी के अलग-अलग जगह पर गिरे वे जगह आज शक्तिपीठ के नाम से विख्यात है. यहाँ माता की योनि आकर गिरी थी तथा इस मंदिर में देवी सती की पूजा योनि रूप में की जाती है.

कामाख्या मंदिर ( Kamakhya Temple ) में देवी सती की प्रतिमा की पूजा नहीं होती बल्कि यहाँ योनि के आकार का एक शिलाखण्ड है जिसमे लाल रंग के गेरू के धारा गिराई जाती है और वह लाल रंग के वस्त्र से ढका रहता है. यहाँ कामाख्या शक्तिपीठ में पशुबलि की प्रथा भी प्रचलित है.

Kamakhya temple black magic

Kamakhya Temple

Kamakhya Temple Images

ऐसा माना जाता ही की काली शक्ति और तांत्रिक शक्ति ( Black Magic In Kamakhya Temple ) का जमाना चले गया है परन्तु कामख्या में यह आज भी जीवन शैली का एक हिस्सा है. यहाँ लगने वाले अम्बुबाची मेले में यह आसानी से देखने को मिल जाता है. इस मेले में तांत्रिको ( Kamakhya Tantrik ) की भीड़ लगी रहती है क्योकि यह दिन  तांत्रिको की दृष्टि से उनके मन्त्र सिद्ध करने का उचित समय होता है.

इस मेले के अवसर पर सभी तांत्रिक अपने एकांतवास से बाहर आते है और अपने शक्तियों का प्रदर्शन करते है, ये तांत्रिक अपने शक्तियों का प्रयोग लाचारों और दुखियो के दुःख से मुक्ति दिलाने के लिए करते है. मान्यता है के अम्बुबाची पर्व के दौरान कामख्या माता ( Maa Kamakhya )  के मंदिर (Kamakhya Temple) का गर्भ द्वार अपने आप ही बंद हो जाता है. इन दिनों माता के दर्शन करना निषेध माना जाता है.

Kamakhya temple mystery

Kamakhya Temple

Kamakhya Temple Inside

कामख्या मंदिर (Kamakhya Temple) के समीप ही कुछ दुरी पर उत्तर की ओर एक तालाब कुंड है जिसे देवी का क्रीड़ा स्थल भी कहा जाता है. यह कुंड सौभाग्य कुंड के नाम से प्रसिद्ध है तथा इस कुंड को लेकर यह मान्यता है की जो भी इस कुंड की परिक्रमा करता है उसे पूण्य की प्राप्ति होती है तथा वह अपने समस्त पापो से मुक्त हो जाता है. दुनिया का कोई भी तांत्रिक कामख्या मंदिर के दर्शन के बिना पाने जीवन को अधूरा मानता है. मुख्य मंदिर जो कामाख्या माता को समर्पित है वही यह मंदिर का एक परिसर भी है जो 10 महाविद्याओ को समर्पित है.

How To Reach Kamakhya Temple

कामाख्या मंदिर भारत के असम के कामरूप जिले के ऊपरी निलाचल पहाड़ियों और गुवाहाटी शहर के बहुत से केंद्र में स्थित है। बसों और ऑटोरिक्शा अक्सर गुवाहाटी के विभिन्न हिस्सों से जुड़ते हैं।

Roadways
आगंतुक गुवाहाटी रेलवे स्टेशन या शहर के किसी अन्य हिस्से से ऑटो-रिक्शा / ट्रेकर / टैक्सी किराए पर ले सकते हैं। असम पर्यटन विभाग की नियमित बसें भी कामख्या मंदिर को गुवाहाटी के हिस्सों से जोड़ती हैं।

Airways
मंदिर गुवाहाटी हवाई अड्डे से लगभग 20 किमी दूर है, जो पूरे भारत के सभी प्रमुख हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है। नियमित उड़ानें इसे कोलकाता, नई दिल्ली, बागदोगरा, चेन्नई और भारत के अन्य शहरों से जोड़ती हैं।

Railways
कामाख्या मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से करीब 6 किमी दूर है, जो उत्तर-पूर्वी भारत का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है। यह नियमित ट्रेनों के माध्यम से सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
एक अलग कामख्या रेलवे स्टेशन भी है, जो मंदिर के नजदीक है, लेकिन तुलनात्मक रूप से छोटा है।

By Foot
यदि आपके पास पर्वतारोहण की भावना है और चढ़ाई करके मंदिर के ऊपर पहुंचने की इच्छा है, तो आप निलाचल पहाड़ी के नीचे कामख्या मंदिर से जोड़ने से दो रॉक कट सीढ़ियों का उपयोग कर ऐसा कर सकते हैं।

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