आइये जाने क्या है मुहूर्त तथा इसकी महत्ता !

Importance Of Muhurat :

(Importance Of Muhurat) हमारे हिन्दू धर्म ( Hindu Dharma ) में मान्यता है की कोई भी शुभ कार्य एक विशेष शुभ मुहूर्त ( Shubh Muhurat ) पर ही किया जाना चाहिए तथा इसके लिए हम अपने पंडित जी से सलाह लेते है. परन्तु क्या वास्तविकता में मुहूर्त ( Muhurat ) का प्रभाव हम पर पड़ता है और क्या ये सच में कारगर होता है. आइये जानते मुहूर्त के बारे में तथा क्या महत्व रखते है ये शुभ एवं अशुभ मुहर्त हमारे जीवन में.

किसी भी पूजा संबंधित या कोई महत्वपूर्ण कार्य के सफल रूप से सम्पादन के लिए ज्योतिष शास्त्र ( Jyotish Astrology ) अपनी गणना द्वारा जो समय निर्धारित करते है उसे मुहर्त ( Muhurat ) कहा जाता है. (Importance Of Muhurat) यदि कोई कार्य मुहूर्त के अनुसार किया जाये तो उस कार्य के सफलता की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है . किसी मनुष्य के गर्भ धारण से लेकर उसके अंतिम संस्कार तक मुहर्त की अहम भूमिका होती है तथा त्यौहार, गृह प्रवेश, विवाह, यात्रा व व्यापार आदि कार्यो में हम मुहूर्त की मदद लेते है. मुहूर्त के महत्व ( (Importance Of Muhurat) ) को हम यहाँ एक उदाहरण द्वारा जान सकते है. गेहू सूर्य के स्वाति नक्षत्र आने पर बोया जाता है, यदि इसकी बुवाई सूर्य के तुला राशि पर 6 अंश व 40 कला से 20 अंश के मध्य की जाये तो गेहू की फसल बहुत ही अच्छी होगी. इस प्रकार का समय हर वर्ष कार्तिक माह को पड़ता है तथा किसान ज्योतिसो द्वारा इस समय का पता लगाने के पश्चात गेहू की बुवाई करते है. इसके विपरीत यदि किसी अन्य समय में इसकी बुवाई हो तो परिणाम स्वरूप गेहू की फसल खराब होती है.

Importance Of Muhurat

(Importance Of Muhurat) अशुभ मुहर्त का परिणाम अशुभ ही होता है जैसे भारत को आजादी 15 अगस्त सन 1945 को मध्य रात्रि में वृष लगन में मिली थी, इस समय वृष लग्न में राहु था तथा केंद्र का स्थान खाली था. सारे गृह कालसृप के योग में थे जिसे ज्योतिष विज्ञानं में बहुत ही अशुभ मुहर्त माना जाता है. इसी के कारण स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात राष्ट्रपिता की हत्या और पुरे राष्ट्र को अन्य बहुत ही भयावक घटनाओं से होकर गुजरना पड़ा.

तेरहवीं शताब्दी में दक्षिण भारत के ज्योतिषाचार्य कालिदास ने एक प्रसिद्ध पुस्तक कालामृत ज्योतिस ( Jyotish In Hindi ) का निर्माण किया था जो पूरी तरह नक्षत्र-लग्न और मुहूर्त पर ही आधारित है. इस पुस्तक के आधार पर ही आज भी शुभ और अशुभ लग्नो का संसोधन होता है. (Importance Of Muhurat) मुहूर्त में तिथि व वार का बहुत अधिक महत्त्व होता है. सौरमंडल में विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े तारे बिखरे हुए है तथा ये सभी तारो का अपना एक समूह होता है, ये समूह ही नक्षत्र कहलाते है. नक्षत्र मुख्यतः सत्ताइस होते है किंतु उत्तराषाढ़ा के चतुर्थ चरण और श्रवण नक्षत्र के मान के पन्द्रहवें भाग (4 घटियां) के समय को अभिजित नक्षत्र की संज्ञा दी गई है, जिससे इनकी संख्या अट्ठाईस मानी गई है. अभिजित नक्षत्र सभी कार्यों हेतु शुभ माना गया है. अभिजित एक अति शुभ मुहूर्त है. प्रत्येक दिन का मध्याह्न भाग अभिजित मुहूर्त कहलाता है, जो मध्याह्न से पहले और बाद में 2 घड़ी अर्थात 48 मिनट का होता है. दिनमान के आधे समय को स्थानीय सूर्योदय के समय में जोड़ दें तो मध्याह्न काल स्पष्ट हो जाता है, जिसमें 24 मिनट घटाने और 24 मिनट जोड़ने पर अभिजित का प्रारंभ काल और समाप्ति काल निकल आता है. अभिजित काल में लगभग सभी दोषों के निवारण की अद्भुत शक्ति है. जब मुंडनादि शुभकार्यों के लिए शुद्ध लग्न न मिल रहा हो, तो अभिजित मुहूर्त ( Abhijeet Muhurat ) में शुभकार्य हो सकते हैं. अभिजित के बाद कृत्तिका अन्य सभी मुहूर्तों से अधिक शुभ मुहूर्त है. यह एक स्त्री संज्ञक मुहूर्त है जिसका संबंध अग्नि से है. इसे सात सिरों वाला नक्षत्र भी कहा गया है. चैघड़िया विचार: चैघड़िया मुहूर्त ( Choghadiya Muhurat ) में शुभ, चर, अमृत और लाभ के चैघड़िया शुभ और उद्वेग, रोग तथा काल के चैघड़िया अशुभ होते हैं.

Importance Of Muhurat

मुहूर्त के प्रभाव से पिछले कुकर्मो के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है. किसी भी कार्य की सफलता उपयुक्त एवं सुविवेचित मुहूर्त पर निर्धारित करती है, इसलिए शास्त्रों तथा ऋषि मुनयो ने सलाह दी है की हर कार्य शुभ मुहर्त को ध्यान में रख कर ही आरम्भ करना चाहिए.

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