जानिए भगवान गणेश से जुड़े ऐसे 5 रहस्य जिनके बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा !

Facts about lord ganesha:

महादेव शिव तथा माता पार्वती के पुत्र भगवान गणेश सभी देवो में प्रथम पूजनीय माने गए है तथा गणो के स्वामी होने के कारण इनका एक नाम गणपति भी है. हर शुभ कार्यो में भगवान गणेश की पूजा होती है व इन्हे मंगल के प्रतीक के रूप में माना गया है. इनका वाहन मूषक है तथा इनके दर्शन मात्र से ही सभी दुखो का निवारण हो जाता है. भगवान गणेश अपने भक्तो को सभी सुख प्रदान करते है व शत्रुओ को उनसे दूर रखते है. भगवान गणेश की पूजा से मन को शन्ति प्राप्त होती है तथा हर कार्य सफल होते है. पंचायन पूजा में भी ये पांच प्रमुख देवो (ब्र्ह्मा, विष्णु, महेश, दुर्गा, गणेश ) में से एक माने जाते है तथा इन्ही के साथ पूजे जाते है.

ganesha, ganesh, lord ganesha names, ganesh ji, ganesha, ganesh statue, god ganesh, god ganesha, shri ganesh, hindu god ganesh, dagdusheth ganpati, shree ganesh, sri ganesh, dancing ganesha, ganpati, ganpati bappa morya

1 .भविष्य पुराण में बतलाया गया ही की एक बार भगवान गणेश अपने बाल्यावस्था के नटखटपन में उनके बड़े भाई कार्तिकेय के साथ शरारत करने लगे जिससे क्रोधित कार्तिकेय ने उनका एक दाँत तोड़ दिया. जब गणेश पिता शिव के पास अपने बड़े भाई की शिकायत लेकर गए तो कार्तिकेय ने उन्हें उनका दाँत वापस कर दिया परन्तु इसके साथ ही यह श्राप भी दे दिया की उन्हें सदैव अपने दाँत को अपने हाथो में पकड़े रहना पड़ेगा अन्यथा वे भष्म हो जाएंगे.

ganesha, ganesh, lord ganesha names, ganesh ji, ganesha, ganesh statue, god ganesh, god ganesha, shri ganesh, hindu god ganesh, dagdusheth ganpati, shree ganesh, sri ganesh, dancing ganesha, ganpati, ganpati bappa morya

2 . शिव पुराण में बताया गया है की भगवान गणेश के उतपत्ति माता पार्वती के मित्रो जया और विजया के सुझाव के कारण हुई थी. जया और विजया ने माता पार्वती को कहा था की भगवान शिव के सेवा के लिए कैलाश पर्वत में नंदी व अन्य गण मौजूद है परन्तु आपकी सेवा के लिए यहाँ कोई नहीं, कैलाश पर्वत में ऐसा कोई होना चाहिए जो आपकी आज्ञा का पालन करें. उन दोनों के इस तरह के सुझाव के पश्चात ही माता पार्वती ने अपने मेल द्वारा भगवान गणेश की उतपत्ति करी थी.
बर्ह्मवैवर्त पुराण के अनुसार देवी पार्वती ने पुत्र की प्राप्ति के लिए पुण्यक उपवास रखा था जिस के परिणाम स्वरूप स्वयं भगवान विष्णु ने उनके पुत्र के रूप में जन्म लिया.

ganesha, ganesh, lord ganesha names, ganesh ji, ganesha, ganesh statue, god ganesh, god ganesha, shri ganesh, hindu god ganesh, dagdusheth ganpati, shree ganesh, sri ganesh, dancing ganesha, ganpati, ganpati bappa morya

3 . बर्ह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है की जब सभी देवी देवता माता पार्वती के पुत्र गणेश को आशीर्वाद दे रहे थे तो उस समय शनि देव ने अपना सर नीचे झुकाया हुआ था. माता पार्वती के द्वारा शनि देव से उनके नीचे सर झुकाए जाने का कारण पूछने पर शनि देव बोले की यदि मेरी सीधी दृष्टि पुत्र गणेश पर पड़ी तो उनका सर धड़ से अलग हो जायेगा. परन्तु माता पार्वती के जिद करने पर शनि देव ने पुत्र गणेश को देखने के लिए अपना सर उठाया तो उनका सर धड़ से अलग हो गया. बर्ह्मवैवर्त पुराण में यह भी बताया गया है की गणेश के सर का धड़ से अलग होने के एक कारण यह भी था की एक बार भगवान शिव ने सूर्य देव पर त्रिशूल से आक्रमण किया था जिस पर सूर्य देव के पिता ने क्रोधित होकर भगवान शिव को यह श्राप दिया था की उन्हें एक दिन अपने पुत्र के शरीर का खंडन देखना पड़ेगा.

ganesha, ganesh, lord ganesha names, ganesh ji, ganesha, ganesh statue, god ganesh, god ganesha, shri ganesh, hindu god ganesh, dagdusheth ganpati, shree ganesh, sri ganesh, dancing ganesha, ganpati, ganpati bappa morya

4 . बर्ह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जब देवी पार्वती के जिद पर शनि देव ने गणेश को अपने सीधी दृष्टि से देखा तो उसी समय गणेश का शीश धड़ से अलग हो गया. इस पर तुरंत श्री हरी विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ पर उत्तर दिशा की ओर उड़ान भरी और पुष्पभद्रा नदी की तरफ पहुंचे. वहां उन्होंने एक हथिनी को अपने बच्चे के साथ लेटे हुए पाया जिस पर तुरंत भगवान विष्णु ने हथिनी के बच्चे का शीश अलग करके भगवान गणेश के शरीर में लगाया तथा इस प्रकार गणेश को नया जीवनदान मिला.
शिव पुराण में यह बतलाया गया है की भगवान श्री गणेश का विवाह ऋद्धि और सिद्धि के साथ हुआ था तथा उनसे उन्हें दो पुत्र प्राप्त हुए जिनका नाम शुभ और लाभ था.

7 Facts about lord ganesha:

ganesha, ganesh, lord ganesha names, ganesh ji, ganesha, ganesh statue, god ganesh, god ganesha, shri ganesh, hindu god ganesh, dagdusheth ganpati, shree ganesh, sri ganesh, dancing ganesha, ganpati, ganpati bappa morya

5 . शिव पुराण में बतलाया गया है की जब देवताओ के अनुरोध पर भगवान शिव त्रिपुर को नष्ट करने के लिए जा रहे थे तब उसी समय एक भविष्यवाणी हुई जिसमे कहा गया की त्रिपुर तब तक नष्ट नहीं हो सकता जब तक गणेश भगवान की पूजा न की जाये. तब भगवान शिव ने भद्रकाली के साथ मिलकर गणेश भगवान की पूजा करी व इसके बाद त्रिपुर को नष्ट कर दिया.
बर्ह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक दिन परशुराम भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत गए. परन्तु उनके ध्यान में मग्न होने के कारण भगवान गणेश ने परशुराम को मध्य मार्ग में ही रोक दिया जिस पर क्रोधित होकर परशुराम ने उन पर कुल्हाड़ी से वार किया जो स्वयं भगवान शिव ने उन्हें दी थी. भगवान शिव के अस्त्र का वार कभी खाली नहीं जाता. परशुराम के द्वारा किये गए वार से गणेश जी का एक दाँत टूट गया तथा तभी से वे एकदंत कहलाने लगे.

कनिपक्कम गणपति मंदिर – यहाँ हर रोज बढ़ता है गणपति की मूर्ति का आकार !

क्या आप जानते है कि शिवजी के कितने पुत्र थे ?