बद्रीनाथ से जुडी एक रोचक कथा, जब भगवान शिव को गंवाना पडा अपना ही घर !

story about badrinath:

बद्रीनाथ के संबंध में पुराणों में एक अनोखी कथा मिलती है जिसमे भगवान विष्णु ने अपनी लीला द्वारा महादेव शिव और माता पार्वती का घर छीन लिया था. जहा आज बद्रीनाथ का पवित्र मंदिर स्थित है वहां पहले भगवान शिव और माता पार्वती का घर हुआ करता था.

एक बार नारद मुनि वैकुंठ धाम भगवान विष्णु से भेट करने गए तो उन्होंने पाया की भगवान विष्णु शेष नाग की शैया में विश्राम कर रहे है. उन्हें इस तरह लेटे देखकर नारद मुनि ने उन्हें उनकी विश्राम अवस्था से जगाया तथा उनसे शिकायत करने के अंदाज में बोले, भगवन ! आप सम्पूर्ण मानवता के लिए एक बुरे उदाहरण बनते जा रहे हो तथा हर समय आप इसी तरह लेटे रहते हो.

माता लक्ष्मी आपकी सेवा में लगी रहती है तथा आप आलस भरते रहते हो. आप इस तरह अपना समय व्यतीत करेंगे तो जगत के लिए आप बिलकुल भी अच्छे उदाहरण नहीं रह जायेंगे. नारद मुनि की बात सुन भगवान विष्णु अपने इस समालोचना से मुक्त होने के लिए हिमालय आये व तपस्या के लिए कोई शांत एवं पवित्र स्थान ढूढ़ने लगे. जब अपनी तपस्या के लिए स्थान ढूढ़ते हुए भगवान विष्णु ने बद्रीनाथ को देखा तो वह स्थान उन्हें बहुत पसंद आया.

बद्रीनाथ बिलकुल वैसा ही स्थान था जैसा भगवान विष्णु ने अपने तपस्या के लिए सोचा था. तभी भगवान विष्णु को वहां पर एक कुटिया दिखाई दी, जब वे उस कुटिया के दरवाजे के समीप गए तो अंदर उन्होंने माता पार्वती और भगवान शिव को पाया. भगवान विष्णु अपने मन में सोचने लगे की यह कुटिया तो भगवान शिव और माता पर्वती का घर है यदि में इनके घर में घुसा तो बहुत ही भयानक होगा, क्योकि भगवान शिव का क्रोध बहुत ही भयानक होता है.

तभी भगवान विष्णु को एक उपाय सुझा तथा उन्होंने एक शिशु का रूप धारण कर लिया. शिशु का रूप धारण कर वे भगवान शिव के घर के दरवाजे के आगे लेट गए तथा जोर-जोर से रोने लगे. बच्चे की रोने की आवज सुन पार्वती के हृदय में माँ की ममता जाग गई तथा दौड़ कर उन्होंने उस बालक को अपने गोद में ले लिया.भगवान शिव माता पार्वती से बोले की इस बालक को मत छुओ परन्तु माता पार्वती भगवान शिव की बात न मानते हुए उल्टा उनसे कहने लगी की आप कितने निर्दयी हो. आप इस छोटे से शिशु को बाहर इस तरह रोते-बिलखते कैसे देख सकते हो ?

पार्वती उस शिशु को घर के भीतर ले आई तथा उसे गर्म दूध पिलाया. शिशु के सो जाने के बाद उसे घर में छोड़ माता पर्वती भगवान शिव के साथ पास ही के कुंड में स्नान करने गयी. जब वे दोनों वापस घर लोटे तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था. पार्वती आश्चर्यचकित रह गयी तब भगवान शिव उनसे बोले की मैने कहा था ना बच्चे को मत उठाओ, अब उसने अंदर से घर का दरवाजा बंद कर लिया है.

माता पार्वती शिव से बोली की अब हम क्या करें ? भगवान शिव के पास दो मार्ग थे पहला अपने सामने हर चीज को जला देना व दूसरा कहि ओर चले जाना. भगवान शिव माता से बोले चलो अब कहि अन्य स्थान पर चलते है क्योकि में इस बालक का कुछ नहीं कर सकता, यह तुम्हे प्रिय था.

इस तरह भगवान शिव और माता पार्वती को अपना घर गंवाना पडा तथा दोनों कोई दूसरा स्थान ढूढ़ते हुए केदारनाथ पहुंचे व उसे उन्होंने अपना निवास स्थान बनाया. तब से बद्रीनाथ भगवान विष्णु के निवास स्थान के रूप में तथा केदारनाथ भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में विख्यात हुआ.

जानिये पांच अनमोल बाते, जो स्वयं महादेव शिव ने बताई थी माँ पार्वती को !