आखिर क्यों चढ़ता है बेलपत्र भगवान शिव को और क्या है इसके पीछे की कथा !

Why we offer Bilva leaf to shiva

Why we offer Bilva leaf to shiva
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Why we offer Bilva leaf to shiva:

आपने अक्सर देखा होगा की भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें गंगा जल  से स्नान कराते है तथा उन पर बेलपत्र के पत्ते चढ़ाते है. बेलपत्र दिखने में तो एक साधारण सा पत्र है परन्तु भोले भंडारी  को यह अत्यंत  प्रिय है तथा उन पर बेलपत्र अर्पित करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. बेलपत्र में समान्यतः तीन पत्तिया जुडी होती है ये पत्तिया त्रिदेवो का रूप मानी जाती है.  ऐसी मान्यता है की भगवान शिव को जल व् बेलपत्री अर्पित करने से उनका मष्तिक शीतल रहता है तथा वे अति शीघ्र प्रसन्न होते है. बेलपत्र को बिल्व पत्र के नाम से भी पुकारा जाता है.

जो व्यक्ति भगवान शिव को दो या तीन बेलपत्री शुद्धता पूर्वक चढ़ाता है उसे भवसागर से मुक्ति की प्राप्ति होती है तथा जो भगवान शिव पर अखंडित बेल पत्र अर्पित करता है वह अंत समय में  भगवान शिव के धाम को प्राप्त होता है.  भगवान शिव के शिवलिंग को बिल्व वृक्ष के नीचे स्थापित कर हर दिन जल अर्पित करने से मनुष्य को सुख की प्राप्ति होती  है तथा बिल्व वृक्ष के दर्शन, स्पर्श व प्रणाम से  पुरे दिन का पाप  नष्ट हो जाता है. पुराणो  के अनुसार जिस जगह पर तुलसी और बिल्व के वृक्ष एक साथ हो वह स्थान काशी  के ही समान पवित्र मानी जाती है.वृक्षायुर्वेद के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने घर में बिल्व का वृक्ष लगता है तो उसे शिव का सानिध्य प्राप्त होता है और माँ लक्ष्मी का उस घर में सदेव निवास बना रहता है.

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स्कन्द पुराण  के अनुसार एक बार माँ पर्वती ने अपने माथे का पसीना पोछ कर फेका तथा उस पसीने की कुछ बुँदे मंदार पर्वत पर गिरी जिस से बिल्व वृक्ष की उत्तपति हुई. इस वृक्ष के जड़ो में गिरजा, तना में माहेश्वरी, शाखाओ  में दक्षयायनी, पत्तो में पार्वती, फूलो में गोरी व फलो में कात्यानी का निवास माना जाता है.  इसके वृक्षों के काँटों में भी असीम शक्तियों का वास है. एक पौराणिक कथा के अनुसार भील नामक डाकू था वह अपने परिवार का पालन पोषण राहगीरों को लूट कर करता था. एक दिन सावन मास के समय वह राहगीरों को लूटने की मंशा से एक वृक्ष में चढ़ा तथा उनका इंतजार करने लगा. पूरा दिन और रात बीत जाने के बाद भी जब कोई राहगीर उसे नही दिखाई दिया तो वह उस वृक्ष के पत्तो को बेचैनी में तोड़ जमीन में फेकने लगा. जिस वृक्ष में वह चढ़ा था वह बिल्व वृक्ष था तथा उस वृक्ष के नीचे है शिवलिंग  स्थापित था. उसके द्वारा फेके गए पत्ते भगवान शिव के शिवलिंग पर गिर रहे थे. लगतार भगवान शिव पर गिर रहे बिल्व पत्र से भगवान शिव प्रसन्न हुए तथा उस डाकू के सामने प्रकट होकर उसे वरदान दिया. उस दिन से बिल्व पत्र का महत्व और अधिक बढ़ गया.

भगवान शिव को बेलपत्र हमेशा उल्टा अर्पित करना चाहिए  अर्थात बेलपत्री का चिकना भाग शिवलिंग पर चढ़ाते समय ऊपर की ओर होना चाहिए. यदि बेल पत्र ना मिल रहा हो तो दूसरे का द्वार चढ़ाया बेलपत्र भी धो कर पूजा के प्रयोग में लाया जा सकता है. बेलपत्र 2 से 11 दल का होता है जितने ज्यादा दल वाला बेलपत्र होगा वह पूजा के लिए उतना ज्यादा उत्तम माना जाता है. भगवान शिव को बिल्व पत्र अर्पित करते समय निम्न मंत्रो का उच्चारण करना चाहिए.

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्.
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् !!

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