आखिर क्यों करना पड़ा माँ पार्वती को अपने समस्त पुण्यो का दान, जानिए माँ पर्वती और भगवान शिव की रोचक कथा !

story of lord shiva and mata parvati

story of lord shiva and mata parvati

Story of lord shiva and mata parvati:

माँ सती के वियोग में जब भगवान शिव घोर तपश्या  में लीन हो गए तो उनके अनुपस्थिति में तारकासुर नामक राक्षस ने तीनो लोक में हाहाकार मचा दिया. तारकासुर से परेशान होकर इंद्र देव  ब्रह्मा जी के पास गए तथा उन्हें तारकासुर के बारे में बताया तो ब्रह्मा जी बोले की माँ सती पुनः पर्वत राज हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लेगी व देवी पार्वती तथा भगवान शिव के पुत्र के द्वारा ही तारकासुर का वध होगा. देवी पार्वती ने हिमालयराज की पुत्री के रूप में जन्म लिया तथा बचपन से ही उनकी  भगवान शिव के प्रति  अगाध्य श्रद्धा  थी. जब वे बड़ी हुई तो उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपश्या करी जिससे भगवान शिव प्रसन्न होकर उनके समाने प्रकट हुए तथा उन्हें वरदान दिया.

विवाह से पूर्व भगवान शिव ने माँ पार्वती के परीक्षा लेनी चाहि अतः एक दिन जब माँ पार्वती नदी के पास से गुजर रही थी तो उन्हें किसी बालक के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी. वे उस दिशा की ओर गयी जहा से बालक के चिल्लाने की आवाज आ रही थी, उन्होंने एक बालक को मगर के मुह में पाया. बच्चे की दयनीय दशा को देख माँ पार्वती से रहा नही गया और वह उस मगर से बालक को छोड़ने की प्राथना करने लगी. मगर बोला की में इस बालक को नही छोड़ सकता क्योकि यह मुझे मेरे भोजन के रूप में प्राप्त हुआ है. यह मेरा आहार है तथा इसे स्वीकार करना यही मेरी नियति है.
माँ पर्वती मगर से बोली ‘हे मगर देव आप इस बालक के बदले जो भी मांगेंगे में आपको दूंगी परन्तु इस बालक को मुक्त कर दो’
मगर माँ पार्वती से बोला में इस बालक को एक शर्त पर छोड़ सकता हु अगर आप भगवान शिव से प्राप्त वरदान  का समस्त पुण्य मुझे दे दो.

READ  कैसे हुआ भगवान शिव की बहन का जन्म और क्यों हुई माँ पार्वती उनसे परेशान !

माँ पार्वती बोली आप सिर्फ इस बालक को मुक्त कर दो तथा बदले में मेरे इस जन्म के ही नही बल्कि समस्त जन्म के पुण्य रख लो ऐसा कह कर माँ पार्वती ने अपने सभी पुण्य मगर को देने का संकल्प लिया.जैसे ही माँ पार्वती ने अपने समस्त पुण्यो को मगर को दिया, मगर का समस्त शरीर तेज प्रकाश से चमकने लगा तथा वह बहुत सुन्दर दिखाई देने लगा. अपने किये गए वादे के अनुसार मगर ने उस बालक को मुक्त कर दिया तथा बोला ‘हे देवी ! एक साधारण से बालक के प्राण को बचाने के लिए आपने अपने समस्त पुण्यो का त्याग क्यों कर दिया ? माँ पार्वती मगर से बोली की तप के द्वारा पुण्य तो में फिर से प्राप्त कर सकती हु परन्तु इस निर्दोष बालक को इस तरह मृत्यु को प्राप्त होना में सहन नही कर पाती.

बालक और मगर अचानक माँ पार्वती के नजरो से ओझल हो गए तब माँ पार्वती पुनः तपश्या के लिए पर्वत की और गयी. जैसे ही माँ पर्वती ने ध्यान लगाने की चेष्टा करी तभी महादेव शिव शंकर  उनके सामने प्रकट हो गए. भगवान शिव को देख माँ पार्वती ने उन्हें प्रणाम किया. भगवान शिव ने  माँ पार्वती से उनके तपश्या करने का कारण पूछा तो माँ पार्वती बोली की एक बालक को मगर से बचाने के लिए मेने अपने समस्त पुण्यो का दान कर दिया है अतः में पुनः तपश्या कर रही हु . भगवान शिव मुस्कराते हुए माँ पार्वती से बोले की मगर और बालक दोनों के ही रूप में उस समय तुम्हारे समाने में था. तुम्हार चित्त प्राणी मात्र में आत्मीयता का अहसास करता है की नही यह जानने की लिए मेने तुम्हारी परीक्षा ली थी तथा में तुम से संतुष्ट हु. तब भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद देकर उनके तप के समस्त पुण्य उन्हें वापस लोटा दिए !

अब आप बिना Internet अपने फ़ोन पर पंचांग, राशिफल, आरती, चालीसा, व्रत कथा, पौराणिक कथाएं और प्रमुख एवं अजीबो गरीब मंदिरो की जानकारी प्राप्त कर सकते है ! Click here to download

जानिए कहा है दुनिया में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर !

READ  आखिर क्यों चढ़ाया जाता है भगवान शिव को कच्चा दूध जोर और कृष्ण को माखन !

Related Post