किसकी भक्ति श्रेष्ठ ? भक्त और भगवान से जुडी एक रोचक कथा !

Story of lord krishna and radha

Story of lord krishna and radha

Story of lord krishna and radha:

नारद ने मन में विचार किया की स्वयं पुरे जगत के पालक को यदि मैं अपने पेरो का धुला जल दूंगा तो मुझे घोर नरक की प्राप्ति होगी मैं इतने बड़े पाप को अपने ऊपर नही ले सकता तथा उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को अपनी असमर्थता जताई. भगवान श्री कृष्ण नारद जी से बोले यदि आप यह कार्य नही कर सकते तो कृपया रुक्मणी को जाकर सारी बात बताये.

सम्भवतः वे मेरी इस पीड़ा को दूर करने में मदद कर दे. कृष्ण की आज्ञा से नारद रुक्मणी के पास गए और उन्हें सारा वृतांत बताया परन्तु रुक्मणी ने भी यह पाप करने से मना कर दिया. नारद मुनि श्री कृष्ण के पास गए और उन्हें पूरी बात बताई तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें राधा से मदद लाने को कहा.

राधा के पास जाकर जैसे ही नारद ने उन्हें कृष्ण का हाल सुनाया, राधा ने बगैर सोचे-विचारे एक जल से भरा पात्र लिया तथा उसमे अपने दोनो पेरो को धोया. राधा ने अपने पेरो से धुले हुए उस जल को नारद को पकड़ाते हुए बोली की मैं जानती हूँ की मेरे इस कार्य द्वारा मुझे रौरव नामक नरक तथा उसी के समान अनेक नरको की प्राप्ति होगी परन्तु मैं अपने प्रियतम को होने वाली पीड़ा को बिलकुल भी सहन नही कर सकती, उन्हें पीड़ा से मुक्त करने के लिए मैं अनेको नरक की यातना झेलने को तैयार हूँ. अब नारद को ज्ञात हो चूका था की क्यों पृथ्वीलोक में सभी राधा के प्रेम का स्तुतिगान गा रहे थे. नारद ने स्वयं भी वीणा पकड़ी और राधा के नाम का धुन गाने लगे !

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