किसकी भक्ति श्रेष्ठ ? भक्त और भगवान से जुडी एक रोचक कथा !

Story of lord krishna and radha

Story of lord krishna and radha

Story of lord krishna and radha:

एक बार नारद मुनि को यह अहंकार हो गया था की भगवान विष्णु का उनसे बड़ा भक्त तीनोलोक में कोई नही. अपने इसी अहंकार की मस्ती में वह एक दिन पृथ्वीलोक पहुंचे परन्तु वहा पहुंच उन्हें आश्चर्य हुआ की हर कोई व्यक्ति भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण के नाम के साथ राधे का नाम ले रहा था. हर जगह राधा की स्तुति श्री कृष्ण के नाम के साथ सुन वे खीझ गए तथा सोचने लगे भगवान विष्णु को सबसे ज्यादा प्रेम तो मैं करता हूँ, दिन रात उनके नाम का जाप करते रहता हु, इसके बावजूद उनके नाम के साथ मेरा नाम जोड़ने की बजाए आखिर राधा नाम क्यों जोड़ा जा रहा है.

अपनी इस समस्या को लेकर नारद मुनि भगवान श्री कृष्ण के पास गए. परन्तु जब वे श्री कृष्ण के पास पहुंचे तो उन्होंने पाया की वे तो अस्वस्थ है तथा सर की पीड़ा से कराह रहे है. उन्हें इस हाल में देख नारद का हृदय द्रवित हो उठा तथा उन्होंने श्री कृष्ण से पूछा की है भगवान मुझे तुरंत बताइये की किस प्रकार में आपकी इस पीड़ा का अंत कर सकता हूँ. यदि इसके लिए मुझे अपने शरीर का दान भी करना पड़े तो मैं इसमें जरा भी देरी नही करूंगा. भगवान श्री कृष्ण बोले नारद जी आपको मेरे इस पीड़ा के लिए अपने शरीर के दान करने की आवश्यकता नही मुझे तो यदि कोई मेरा भक्त अपने चरणो का धुला हुआ पानी पिला दे तो मैं इस पीड़ा से मुक्ति पाउ.