पांडवो द्वारा निर्मित बिना छत वाला शिकारी माता का रहस्मयी मंदिर !

Shikari mata temple

Shikari mata temple

Shikari mata temple:

हिमांचल प्रदेश के मंडी स्थान पर शिकारी माता का एक अनोखा मंदिर है जिसका निर्माण पांडवो ने अपने अज्ञातवास के दौरान किया था. इस मंदिर में देवी की मूर्ति की स्थापना खुले आकाश के नीचे की गई है यानि यह मंदिर बगैर छत का बना हुआ है. यहा के लोगो के अनुसार इस मंदिर में अनेको बार छत लगाने का प्रयास किया गया परन्तु माता की शक्ति के प्रभाव से इस मंदिर के छत का निर्माण कभी नही हुआ.हर बार छत के निर्माण को लेकर कई बाधाए आई परन्तु मंदिर के छत के निर्माण का कार्य कभी पूरा नही हो सका. मान्यता है की पांडवो द्वारा माता के मंदिर का निर्माण बगैर छत के ही हुआ था तथा उन्होंने मंदिर में माता की मूर्ति खुले स्थान में स्थापित की थी जिस कारण माता अब खुले आसमान के नीचे रहना ही पसंद करती है. शिकारी माता का यह मंदिर चौहार घाटी में एक उच्चे शिखर पर 2850 मीटर की उचाई में स्थित है.

यहा के लोगो के अनुसार बताया जाता है की मार्कण्डेय ऋषि ने मंदिर वाली जगह पर वर्षो तक माँ दुर्गा की तपश्या करी तथा माँ दुर्गा ने उनके तप से प्रसन्न होकर उन्हें शक्ति के रूप में दर्शन दिया व यहा स्थापित हुई. इसके बाद पांडव अपने अज्ञातवास के समय यहा आये थे तथा उन्होंने शक्ति रूप में विध्यमान माता की तपश्या करी जिस से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें महाभारत के युद्ध में कौरवो से विजयी प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया. पांडव ने यहा से जाते वक्त माँ के मंदिर का निर्माण किया परन्तु यह कोई भी जानता की आखिर इस मंदिर के छत का निर्माण पांडवो द्वारा क्यों नही किया गया.

यहा सर्दी के मौसम में अत्यधिक बर्फबारी होती है तथा इस मंदिर के आस-पास के सारी पहाड़िया बर्फ की चादर से धक जाती है. इतनी बर्फबारी के बावजूद मुख्य मंदिर में कभी भी बर्फ नही टिकती, स्थानीय लोग इस शिकारी माता का देवीय चमत्कार मानते है. मंदिर के नामकरण के बारे में यहा के लोग बताते है की बहुत सालो पहले यहाँ पर बहुत घना जंगल हुआ करता था तथा यह स्थान बहुत से शिकारी कबीलो का घर हुआ करता था. शिकारी अपने शिकार में सफलता पाने के लिए इस मंदिर में माता की पूजा किया करते थे तथा उन्हें अपने शिकार में सफलता भी मिलने लगी थी जिस कारण उन्होंने इस मंदिर का नाम शिकारी देवी रख दिया. इस मंदिर में माता की प्रतिमा मंदिर के चबूतरे के बीचो-बीच रखी है साथ ही यहा माता चंडी और कमरुनाग देवता की मूर्ति भी स्थापित है. माता के चमत्कारों को सुन दूर-दूर से भक्त यहा आते है तथा अपनी मनोकामनाए माता के समक्ष रखते है, शिकारी माता के द्वार में आने वाले हर व्यक्ति की प्रत्येक इच्छा पूर्ण होती है.

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