Related Posts

shiv-parvati-kartikeya

आखिर क्यों क्रोध में आकर माँ पार्वती ने दिया अपने ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय को श्राप !

एक दिन कैलाश पर्वत में भगवान शिव और माँ पार्वती के बीच चौसर का खेल खेला जा रहा था, इस खेल में माँ पर्वती बार-बार विजय हो रही थी तथा कुछ समय पश्चात माँ पार्वती से भगवान शिव अपना सब कुछ हार गए. शिव अपनी लीला रचाने के लिए हारने के बाद पत्तो के वस्त्र पहन कर माँ पार्वती से रुठने का नाटक करते हुए गंगा नदी के तट पर चले गए. कार्तिकेय अपने पिता को अपनी माता की अपेक्षा अधिक प्रेम करते थे अतः जब उन्होंने भगवान शिव का माता पर्वती से चौसर के खेल में हारने की बात सुनी तो वे अपने पिता का हारा हुआ समान प्राप्त करने के लिए माता पर्वती के पास गए. कार्तिकेय ने माँ पार्वती को चौसर के खेल में हराते हुए भगवान शिव की सभी वस्तुए प्राप्त कर ली तथा उन्हें अपने पिता को लौटाने गंगा नदी के तट पर चल दिए.

इधर माँ पार्वती परेशान हो गयी की पुत्र कार्तिकेय से हार कर शिव का सारा समान भी गया और वे भी उनसे दूर चले गए. यह बात जब माँ पर्वती ने पुत्र गणेश को बतलाई तो अपनी माँ की इस समस्या का निवारण करने के लिए वे भगवान शिव को ढूढ़ने निकल गए. गंगा के तट पर जब उनकी भेट भगवान शिव से हुई तो उन्होंने उनके साथ चौसर का खेल खेला तथा उन्हें हारकर उनकी सभी वस्तुए पुनः प्राप्त कर ली. भगवान शिव के सभी वस्तुए लेकर गणेश माँ पार्वती के पास पहुंचे तथा उन्हें अपनी विजय का समाचार सुनाया. गणेश को अकेले देख वे बोली की तुम्हे अपने पिता को भी साथ लेकर आना चाहिए था. तब गणेश पुनः भगवान शिव को ढूढ़ने निकल पड़े.

भगवान शिव गणेश को हरिद्वार में कार्तिकेय के साथ भ्रमण करते हुए मिले. भगवान विष्णु भगवान शिव की इच्छा से एक पासे में परिवर्तित हो गए तथा भगवान शिव ने नारद मुनि को भी अपने साथ ले लिया. जब भगवान गणेश ने शिव से वापस कैलाश पर्वत चलने की बात कहि तो शिव ने इनकार कर दिया परन्तु गणेश के बार-बार निवेदन करने पर शिव बोले की मैंने एक नया पासा प्राप्त किया है यदि तुम्हारी माता मेरे साथ उस पासे से चौसर का खेल खेले तो में तुम्हारे साथ चल सकता हूँ. गणेश के आश्वासन देने पर नारद और कार्तिकेय के साथ भगवान शिव कैलाश पर्वत की ओर चल दिए.

जब गणेश ने माँ पार्वती को भगवान शिव की शर्त बतलाई तो वे हस्ते हुए शिव से बोली की आप के पास हारने के लिए अब बचा ही क्या है. तब नारद जी ने अपनी वीणा और अन्य वस्तुए उन्हें दी. इस बार भगवान शिव चौसर के खेल में माँ पर्वती से बार-बार जितने लगे. जब गणेश को पासे का वास्त्विक रहस्य का पता चला तो उन्होंने यह सच्चाई माता पार्वती को बताई. माँ पार्वती ने क्रोधित होते हुए भगवान शिव से कहा की आप हमेसा अपने सर के उपर जटाओ में माँ गंगा का बोझ सहोगे. नारद को कभी एक जगह न टिकने का श्राप मिला तथा विष्णु को धरती में जन्म लेकर स्त्री वियोग का श्राप मिला. माँ पार्वती ने अपने ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय पर क्रोधित होते हुए श्राप दिया की वे सदेव बाल्यवस्था में ही बने रहेंगे.

अब आप बिना Internet अपने फ़ोन पर पंचांग, राशिफल, आरती, चालीसा, व्रत कथा, पौराणिक कथाएं और प्रमुख एवं अजीबो गरीब मंदिरो की जानकारी प्राप्त कर सकते है ! Click here to download

 आखिर क्यों भागे शिव सती का विकराल रूप देख – देवी पुराण रोचक कथा !

आइये जानते है कौन है महादेव और कैसे हुआ महादेव का जन्म !

meghnath ramayan

युद्ध में एक बार स्वयं भगवान श्री राम और दो बार लक्ष्मण को हराने वाला योद्धा मेघनाद, जाने इस योद्धा से जुड़े अनसुने रहस्य !

Meghnath ka janam kaise hua वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण ramayan के अनुसार जब मेघनाद का जन्म हुआ तो वह समान्य शिशुओं की तरह रोया नहीं

related posts

meghnath ramayan

युद्ध में एक बार स्वयं भगवान श्री राम और दो बार लक्ष्मण को हराने वाला योद्धा मेघनाद, जाने इस योद्धा से जुड़े अनसुने रहस्य !

Meghnath ka janam kaise hua वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण ramayan के अनुसार जब मेघनाद का जन्म हुआ तो वह समान्य

Read More
meghnath ramayan

युद्ध में एक बार स्वयं भगवान श्री राम और दो बार लक्ष्मण को हराने वाला योद्धा मेघनाद, जाने इस योद्धा से जुड़े अनसुने रहस्य !

Meghnath ka janam kaise hua वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण ramayan के अनुसार जब मेघनाद का जन्म हुआ तो वह समान्य