गुजरात में स्थित कष्टभंजन मंदिर, यहा स्त्री रूप में होती है शनि देव की पूजा !

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शनि देव का क्रोध बहुत भयंकर होता है तथा उनके क्रोध से बचने के लिए भक्त शनि देव के मंदिरो में तेल चढाकर  उन्हें प्रसन्न करते है. उनसे क्रोधी देवता अन्य कोई नही यदि वे किसी पर कुपित हो जाये तो उस व्यक्ति के साथ कुछ बुरा होना तय है. यहा तक की अन्य देवता तक उनके क्रोध से अछूते नही है उनकी कुदृष्टि के कारण ही भगवान शिव के पुत्र गणेश का शरीर मष्तक विहीन हुआ था. परन्तु शीघ्र क्रोधित हो जाने वाले शनि देवता  का भारत में एक ऐसा भी मंदिर है जहा उन्होंने श्री राम भक्त हनुमान के क्रोध से भयभीत होकर स्त्री का रूप धरा था तथा इस मंदिर में वे हनुमान जी के साथ स्त्री  रूप में पूजे जाते है.

हनुमान जी तथा स्त्री रूप में पूजे जाने वाले शनि देव का अत्यंत प्राचीन मंदिर गुजरात में भावनगर के सारंगपुर में स्थित है तथा यह मंदिर कष्टभंजन हनुमान(kastbhanjandev daily darshan)  जी के नाम से जाना जाता है. शनि देव का स्त्री रूप इस मंदिर में भक्तो का मुख्य आकर्षण का केंद्र है, इस मंदिर में शनि देव के स्त्री रूप की प्रतिमा हनुमान जी की प्रतिमा के चरणो में स्थित है. हनुमान जी और शनि देव की प्रतिमा मंदिर के जिस जगह पर स्थपित की गई है वह जगह पुराने जमाने के राज दरबार के भाति प्रतीत होती है.इस मंदिर में हनुमान जी 45 किलो सोने तथा 95 किलो चांदी से बने बहुत ही सुन्दर सिहासन पर विराजमान है तथा शनि देव की प्रतिमा आकर्षक स्त्री के आभूषणो से सुसज्जित हनुमान जी  के चरणो में स्थित है.हनुमान जी के मुकुट में भी कीमतों आभूषणो का प्रयोग किया गया है वो उनके समीप ही सोने से निर्मित गदा रखी है. हनुमान जी की प्रतिमा के पीछे उनकी वानर सेना की कुछ तस्वीरें बनी है.

लोक कथाओ के अनुसार एक बार शनि देव का कोप पृथ्वी लोक में बहुत बढ़ गया व पृथ्वीलोक के समस्त प्राणी उनके प्रकोप से बहुत कष्ट झेलने लगे. यहा तक की देवता भी शनि के कोप से परेशान हो उठे. जब महवीर हनुमान  को शनि देव के प्रकोप के कारण पृथ्वीलोक में रह रहे प्राणियों के कष्टो का पता लगा तो वे तुरंत अपनी गदा उठाये शनि देव को ढूढ़ने लगे. जैसे ही शनि देव को यह बात ज्ञात हुई की हनुमान जी क्रोध में उन्ही को धुंध रहे है तो वे भयभीत हो गए. वे यह जानते थे की उन्हें हनुमान जी के क्रोध से कोई नही बचा सकता अतः उन्होंने अपने आपको स्त्री के रूप में बदल लिया. शनि देव ने ऐसा इसलिए किया क्योकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी  थे तथा स्त्रियों का आदर करते थे. अतः शनि देव निश्चित थे की हनुमान जी स्त्री रूप में उन पर प्रहार नही करेंगे. वे स्त्री रूप में हनुमान जी के पास गए तथा उनके चरणो में झुक गए व क्षमा मांगने लगे. स्त्री रूप में शनि देव को देख हनुमान जी अपने क्रोध को भूल गए तथा उन्होंने शनि देव को क्षमा कर दिया. इस तरह शनि देव ने अपना कोप वापस लिया और वे स्त्री रूप में भी पूजे जाने लगे.

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