जानिए 86 राजाओ को बंधी बनाने वाले राजा जरासंध की कुछ रोचक व अनसुनी बाते !

story of jarasandha

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Story of jarasandha;

महाभारत के अनेको बलशाली योद्धाओ में से एक था जरासंध जो भगवान कृष्ण के मामा कंश का ससुर होने के साथ-साथ उसका परम मित्र भी था. जरासंध ने अपनी दोनों पुत्रिया आसीत व प्रापित का विवाह कंश से कराया था अतः कृष्ण द्वारा कंश का वध होने पर वह कृष्ण को अपना सबसे बड़ा शत्रु मानता था. कृष्ण से अपने पुत्रियों के सुहाग का प्रतिशोध लेने के लये जरासंध ने 17 बार मथुरा में चढ़ाई करी परन्तु वह भगवान श्री कृष्ण को पराजित नही कर पाया, हर बार उसे हार का सामना करते हुए वापस लोटना पड़ा.

जरासंध मगध देश  के राजा बृहद्रथ के पुत्र थे जिनकी दो रनिया थी. जरासंध के जन्म से पूर्व राजा बृहद्रथ की दोनों रानिया निसंतान होने के कारण प्रायः दुखी रहा करती थी तथा उन्होंने अपनी यह समस्या राजा को बताई. पुत्रप्राप्ति की इच्छा से राजा बृहद्रथ महात्मा चण्डकौशिक  के अाश्रम में गए तथा वहा रहकर उनकी सेवा करी. महात्मा चण्डकौशिक ने राजा से प्रसन्न होकर उन्हें एक फल दिया तथा बोले की इस फल को अपनी पत्नी को खिला देना, इस फल को खाने से तुम्हे संतान की प्राप्ति होगी. क्योकि राजा बृहद्रथ की दो पत्निया थी अतः बिना कुछ सोचे विचारे उन्होंने वह फल दो टुकड़ो में काट अपनी दोनों पत्नियों को दे दिया. उस फल के प्रभाव से रानियों ने कुछ समय पश्चात शिशु शरीर के दो अलग-अलग टुकड़ो को जन्म दिया उन टुकड़ो को जीवित देख रानियों ने डर से उसे महल के बहार फिकवा दिया.जरा नाम की एक राक्षसी ने मार्ग से गुजरते हुए जब उन टुकड़ो को देखा तो उसने अपनी माया के प्रभाव से उन शिशु टुकड़ो को जोड़ एक कर दिया. एक शरीर होते ही वह शिशु जोर-जोर से रोने लगा तथा उसकी आवाज सुन राजा सहित उनकी दोनों रानिया महल से बहार आये तथा उस राक्षसी के समीप गए व राक्षसी से उसका परिचय पूछा. तब राक्षसी  के पूरी बात बताने व अपने पुत्र का एक शरीर देख राजा बहुत खुस हुआ तथा उसने अपने पुत्र का नाम राक्षसी के नाम को जोड़ते हुए जरासंध रखा.

जरासंध भगवान शिव का भक्त था तथा अत्यंत बलशाली व पराक्रमी था. उसने अपने ताकत के बल पर कई राजाओ का वध किया था तथा 86 राजाओ को एक पहाड़ी किले में बंदी बना कर रखा था. जरासंध की एक इच्छा थी की वह 100 राजाओ को मारकर चक्रवर्ती सम्राट बने. जरासंध को मारने के लिए भगवान कृष्ण को एक योजना का निर्माण करना पड़ा तथा उस योजना अनुसार वे एक ब्राह्मण वेश में भीम व अर्जुन  के साथ जरासंध के पास गए तथा उसे कुश्ती के लिए ललकारा. जरासंध उन आसाधारण से प्रतीत होने वाले ब्राह्मणो के देख पहचान गया तथा उनसे उनका वास्तविक परिचय पूछा. तब भगवान श्री कृष्ण ने जरासंध को अपना व उनके साथ आये भीम व अर्जुन का वास्तविक परिचय दिया. जरासंध ने कुश्ती के लिए भीम को अपना प्रतिद्वंदी चुना. दोनों में बहुत भयंकर युद्ध हुआ तथा यह युद्ध कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से 13 दिन तक लगातार चलता रहा .चोदवे दिन जब भगवान श्री कृष्ण ने भीम को एक तिनके को बीच से दो टुकड़े में चिर कर दिखाया तो वे भगवान श्री कृष्ण का संकेत समझ गए व जरासंध के शरीर के दो टुकड़े कर दिए.

इस तरह भगवान श्री कृष्ण ने राजा जरासंध का वध करवाकर उसके कैद में फसे सारे राजाओ को मुक्त किया तथा मगध का सम्राज्य जरासंध के पुत्र सहदेव  के हाथो में सोप दिया !

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