जानिए विजया एकादशी व्रत का महत्व तथा इस से प्राप्त होने वाले पुण्य !

importance of vijaya ekadashi

importance of jaya ekadashi

Importance of vijaya ekadashi:

शास्त्रो के अनुसार फाल्गुन मास को पड़ने वाली एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है. जैसे की इस एकादशी के नाम के शुरुवात  में ही विजय शब्द जुड़ा है अतः इस एकादशी को करने वाले व्यक्ति को अपने समस्त शत्रुओ पर विजयी प्राप्त होती है. प्रचीन काल में युद्ध में जाने से पूर्व कई राजा महराजा युद्ध में विजयी प्राप्त करने की कामना से इस व्रत को करते थे.मान्यता है की इस व्रत के महात्म्य को सुनने और पढ़ने वाला व्यक्ति को वाजपेय यज्ञ के द्वार प्राप्त होने वाले पुण्य के बराबर फल प्राप्त होता है.

विजयी एकादशी से प्राप्त होने वाले फल के बारे में जब नारद मुनि ने ब्रह्मा जी से पूछा तो उन्होंने नारद को बताया की यह व्रत समस्त व्रतो में उत्तम है  तथा इस व्रत से श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है. इस व्रत की महिमा बताते हुए ब्रह्मा जी बोले की एक बार  भगवान विष्णु के अवतार श्री राम  के समाने समुद्र को पार करने की एक गंभीर समस्या उत्तपन हुई. वे सोच में पड गए की वानरों की सेना के साथ आखिर कैसे वे इतने विशाल समुद्र को पार करे तथा अपनी यह समस्या उन्होंने लक्ष्मण को बताई. लक्ष्मण ने प्रभु राम से वकदाल्भ्य मुनि के पास जाने का उपाय सुझाया तथा दोनों भाई उनके आश्रम में पहुंचे व आने का कारण बताया. ऋषि वकदाल्भ्य राम से बोले की आपको अपनी सेना समेत फाल्गुन मास की एकादशी का व्रत करना चाहिए इस व्रत के प्रभाव से न केवल आप समुद्र पार करने में सफल होगे बल्कि रावण को भी पराजित करने में भी सफलता मिलेगी.इस तरह भगवान राम  विजयी एकादशी के प्रभाव से विशाल समुद्र को पार करने में समर्थ हुए.

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विजया एकादशी के व्रत के संबंध में मुनि ने श्री राम को जो बाते बताई थी उसके अनुसार इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को दशमी के दिन एक जल से भरा कलश स्थापित करना चाहिए तथा उसमे पल्ल्व डालना चाहिए, यह कलश सोने, चांदी, ताम्बे या मिटटी किसी का भी हो सकता है. सुबह के समय उस कलश के सामने व्रती को भगवान विष्णु का पाठ करना चाहिए तथा रात्रि को जागरण  करना चाहिए. एकादशी वाले दिन प्रातः व्रती को स्नान कर भगवान विष्णु के सोने का विग्रह स्थापित करना चाहिए तथा धुप, दीप, पुष्प, चन्दन, सुपारी आदि भगवान विष्णु को अर्पित कर कलश की पूजा करनी चाहिए. एकादशी व्रत के अगले दिन कलश में रखे समान को ब्राह्मण को दान कर कलश को नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए.

इस व्रत के पुण्य के प्रभाव से व्यक्ति के सभी ग्रह शांत होते है तथा उसे हर प्रतियोगिता में जीत हासिल होती है. घर में धन व समृद्धि निरंतर बढ़ती रहती है व नौकरी तथा व्यवसाय में उन्नति प्राप्त होती है. व्यक्ति का स्वास्थ उत्तम रहता है तथा उसे किसी तरह का रोग नही होता !

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