क्या है मान्यता सर पर तिलक लगाने को लेकर और कितने प्रकार के तिलक होते है हिन्दू धर्म में !

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प्राचीन काल से ही हमारे हिन्दू धर्म में सर पर तिलक लगाने की परम्परा चली आ रही है हर पूजा एवं शुभ कार्य में किसी बड़े या ब्राह्मण दवारा हमारे सर में तिलक लगाया जाता है. मान्यता के अनुसार सर पर तिलक का लगा होना हमे समाज में गर्व की अनुभूति कराता है तिलक का मष्तक पर होना हिन्दू धर्म की संस्कृति का प्रतीक है. तिलक कई प्रकार के वस्तु या पदार्थो का होता है जिनमे चन्दन, हल्दी, केशर, सिंदूर, भष्म आदि प्रमुख है. आइये जानते है सर में तिलक लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण.

मनुष्य के शरीर के अंदर सात प्रकार के दिव्य सूक्ष्म ऊर्जा चक्र होते है तथा ये अपार ऊर्जा के भंडार होते है. मनुष्य का माथा, जहा पर तिलक लगाते है वह सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है तथा कहा जाता है यहा भगवान विष्णु निवास करते है. मनुष्य के माथे पर आज्ञा चक्र होता है तथा यही पर तीन प्रमुख नाड़ियो इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना का संगम भी होता है. यही वो स्थान होता जहा योग करते समय समस्त ऋषि और साधु ध्यान लगाते है, इसी जगह से हमारे सम्पूर्ण शरीर का संचालन होता है अतः यह पूजनीय स्थान कहलाता है तथा इसी कारण इस जगह पर तिलक लगाया जाता है. पुराणो में उल्लेखित है की जो व्यक्ति गंगा नदी में स्नान करने के बाद अपने मष्तक पर तिलक लगता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. वैज्ञानिक भी मानते है की तिलक मष्तिक में शीतलता प्रदान कर मनुष्य को तनावमुक्त रखता है.

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हिन्दू धर्म में तिलक लगाने के अलग-अलग प्रकार है, हर प्रकार के संत, सम्प्रदाय तथा पंथ अपनी प्रथा अनुसार तिलक लगाते है. सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव और अन्य मतों के अलग-अलग तिलक होते हैं.शैव मत के लोग अपने ललाट पर चन्दन से त्रिपुंड का तिलक करते है वही शाक्त परम्परा के अनुसार सिंदूर का तिलक लगाया जाता है. वैष्णव परम्परा में मुख्यतः चौसठ प्रकार के तिलक का प्रयोग किया जाता है जिनमे प्रमुख है लालश्री तिलक है, इसमें मनुष्य के ललाट पर आस-पास चन्दन लगाया जाता है तथा उसके मध्य में हल्दी से एक सीधी रेखा खीच दी जाती है. विष्णु स्वामी तिलक माथे पर दो रेखाओ को खींचकर बनाया जाता है व संकरा होते हुए भोहों तक आता है. विष्णु तिलक के मध्य यदि कुंकुम से सीधी रेखा खीच दे तो वह रामानंद तिलक कह लाता है.श्याम श्री तिलक कृष्ण के उपासको दवारा व भस्म का तिलक भगवान शिव के उपासको द्वारा लगाया जाता है. इसी तरह गाणपत्य, तांत्रिक, कापालिक आदि विभिन प्रकार के तिलक हिन्दू सनातन धर्म में प्रचलित है.

तंत्र शास्त्र के अनुसार तिलक इस लिए लगाया जाता है ताकि इससे ईश्वर की स्मृति सदेव हमारे में बनी रहे है तथा ध्यान करते समय ईश्वर हमारे ललाट में केंद्र शक्ति के रूप में दिखाई दे. शास्त्रानुसार मनुष्य को अपने मष्तिक में अनामिका ऊँगली द्वारा तिलक करना चाहिए वह भी चन्दन का. तिलक लगाते समय चंदन के साथ चावल का प्रयोग करने से माँ लक्ष्मी की कृपा तिलक लगाने वाले व्यक्ति पर होती है. देवताओ को तिलक मध्यमा उंगली से लगाया जाता है. चन्दन के साथ ही पीपल और तुलसी के मट्टी या गाय के खुर की मट्टी का तिलक भी पुराणो में पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है !

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