जानिए होली से जुडी सभी बातो का क्या है पुराणिक कथाओ से सबंध !

holy story connection to puran

holy story connection to puran:

होली हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है जिसे पुरे भारत भर में बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है. इस दिन सभी लोग छोटे-बड़े का भेदभाव भुलाकर एक दूसरे पर रंगो की बारिश करते है तथा हर तरफ रंग ही रंग व गुलाल आदि से रंगे लोग दिखाई देते है. होली का त्यौहार फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और यह भी अन्य हिन्दू त्योहारो की तरह बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक माना जाता है. होली का त्यौहार सिर्फ एक दिन का नही होता, भारत के अनेको राज्यों में यह तीन दिन तक मनाया जाता है. होली के पहले दिन यानि पूर्णिमा वाले दिन एक बड़ी थाली में रंगो को सजाया जाता है और जो परिवार का सबसे बड़ा सदस्य होता है वह सबसे पहले परिवार के अन्य सदस्यों पर रंग झिड़कता है. दूसरे दिन भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद की याद में होलिका का चित्र या पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है जिसमे अग्नि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए माँ अपने बच्चे के साथ जलती हुई होलिका के पांच फेरे लेती है. होली का यह दूसरा दिन ”पुनो” के नाम से जाना जाता है. होली का तीसरा दिन ”पर्व” कहलाता है जिसमे बच्चे और बड़े एक दूसरे पर रंगीन पानी डालकर होली खेलते है तथा राधा व कृष्णा की मूर्तियों में भी इस दिन रंग डालकर पूजा की जाती है. आइये जानते है पुराणो के अनुसार कैसे शुरुवात हुई होली की तथा होली से जुडी सभी बातो का धार्मिक संबंध.

आगे पढ़े…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *