जानिए भारत के विभिन्न राज्यों में किस तरह मनाया जाता है ”रंगो का त्यौहार” !

holi celebration in different country :

भारत के सबसे प्रमुख त्योहारो में से एक होली पुरे भारत में धूमधाम से मनाई जाती है. होली रंगो का त्यौहार है तथा होली के आने से पहले ही बच्चे रंगो और पिचकारियों के साथ खेलना शुरू कर देते है. होली का त्यौहार भारत के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न प्रकार के परम्पराओ और रीतिरिवाजों के साथ मनाया जाता है. आइये जानते है होली के इन विविध रूपों और इसको मनाने के अलग-अलग ढंगों को.

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छत्तीसगढ़ की होली:-
छत्तीसगढ़ में लोग होली को ”होरी” कहकर पुकारते है तथा यहाँ होली में लोकगीतों की अद्भुत परम्परा है. होली के आते ही छत्तीसगढ़ में हर जगह लोगो के दवारा नगाड़े बजने शुरू हो जाते है तथा हर कोई राधा कृष्णा से संबंधित होली गीतों में झूम उठता है. यहाँ के किसानो के घरो में होली के अवसर पर हर रोज नए नए तरह के पकवान बनने शुरू हो जाते है इसे तेलई चढ़ना कहा जाता है. इस दिन गाव में नई विवाहित स्त्रीया अपने पति के घर से अपने गाव में पहली होली मनाने आती है तथा होली के समाप्ति पर ही वह अपने ससुराल जाती है. इसी कारण गाव में नवविवाहित स्त्रियों की होली पर भीड़ सी लगी रहती है. यहाँ होली वाले दिन लोगो के मुह से अधिकतर कबीर के दोहे एवं छंद गाये जाते है, ऐसा सुबह से लेकर देर शाम तक निरंतर चलता रहता है. गुलाल एवं रंगो में मदमस्त पूरा छत्तीसगढ़ अपने फागुन महाराज को अगले वर्ष फिर से आने का निमंत्रण देता है.

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कुमाऊ की होली:-
उत्तराखंड के कुमाऊ मंडल में सिर्फ रंगो के साथ ही होली नही खेली जाती बल्कि वहा संगीत के रागो की अनूठी होली भी देखने को मिलती है. यहाँ होली के अवसर पर गुलाल के टिके के साथ-साथ बैठकी होली और खड़ी होली की भी शास्त्रीय परम्परा शामिल है. बैठकी होली में लोक संगीत गाये जाते है जिसकी भाषा ब्रज या खांटी शस्त्रीय गायन है. कुमाऊ में होली पर महिलाए भी अपने ढंग से होली मानती है, होली वाले दिन सभी महिलाये एक दूसरे के घर जाती है तथा एक दूसरे को गुलाल का टिका लगाती है. रंग पड़ने के दिन सभी महिलाये एक जगह एकत्रित होकर होली गीत गाती है तथा पुरुषो का वेश बनाकर उनकी नकल करती है.

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महाराष्ट्र की रंग पंचमी की होली:-
महारष्ट्र की रंग पंचमी में यहाँ सुखा गुलाल खेलने की परम्परा है इसके साथ ही इस दिन हर घरो में विशेष प्रकार का भोजन भी बनाया जाता है. यह होली अधिकतर मछुवारे के बस्ती में खेली जाती है जिसमे मौज मस्ती, संगीत आदि के साथ नाच-गाना होता है.

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गोआ की होली:-
गोआ में होली को कोकणी भाषा में शिमगो या शिमगोत्स्व कहा जाता है तथा वसंत पंचमी के आते ही यहाँ बसंत के स्वागत के लिए रंगो से खेलना शुरू हो जाता है. होली के अवसर पर गोवा में लोग पकवान के रूप विशेष तोर से मिट-चिकन की करी बनाते है जिसे यहाँ के लोगो द्वारा शिगोटी के नाम से पुकारा जाता है. गोवा में होली का सबसे प्रमुख आकर्षण है पंजिम का विशालकाय जुलुस जो अपने गंत्वय में पहुंचकर सांस्कृति कायक्रम में परिवर्तित हो जाता है. इस सांस्कृति कार्यक्रम में विभिन्न जाती-पाती के लोग हिस्सा लेते है तथा अलग-अलग तरह के संगीत और नाटक प्रस्तुत किये जाते है. होली का यह त्यौहार यहाँ बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.

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ब्रज की होली:-
जब बात होली के पर्व की हो तो ब्रज की होली हर जगह प्रसिद्ध है क्योकि इसका आकर्षण न केवल मथुरा बल्कि पुरे विश्व में विख्यात है. ब्रज में खेले जाने वाली होली में सबसे ज्यादा नाम लठमार होली का लिया जाता है जिसमे पुरष महिलाओ पर रंगो की बारिश करते है तथा वही महिलाए पुरुषो पर लकड़ी व कपड़ो के कोड़े से उन्हें पिटती है. ऐसी मान्यता है की जब श्री कृष्ण गोपियों को होली खेलने के लिए प्रतीक्षा करवाते थे तो गोपिया उन्हें दंडित करने के लिए लकडियो से पिटती थी. ब्रज की यह होली मथुरा और वृन्दावन के साथ 15 दिनों तक चलती है.

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मध्यप्रदेश:-
मध्यप्रेश की होली पर बड़ी-बड़ी गेर का आयोजन किया जाता है तथा सड़को पर सुगन्धित जल का मिश्रण झिड़का जाता है. सूखे रंगो से टिका लगाकर सभी लोग एक दूसरे के साथ रंगो से खेलते है तथा घरो में बढ़िया पकवान बनते है. खास तोर पर इंदौर में सड़को पर बड़े जुलुस निकलने की पुरानी परम्परा है जिसे गेर कहा जाता है. इस जुलुस में बेंड-बजा, नाचना, गाना सभी सम्लित होता है तथा टेंको में रंगीन पानी भर लोगो पर झिड़का जाता है. इस जुलुस में सभी धर्म के लोग शमिल होते है.

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बंगाल:-
बंगाल में होली पूरी से तरह से धार्मिक होती है तथा होली के अवसर पर यहाँ दोल यात्रा का आयोजन किया जाता है. इस दिन महिलाये लाल किनारी व सफेद साड़ी पहनकर शंख बजती है व राधा कृष्णा की पूजा के साथ दोल यात्रा के प्रभात फेरी का आयोजन करती है. दोल शब्द का अर्थ होता है झूला, महिलाये झूले में कृष्ण और राधा की मूर्ति रख उन्हें शहर भर में घुमाती है तथा लोग अबीर और गुलाल से झूले में रखी राधा और कृष्ण की मूर्ति के साथ होली खेलते है.

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