जानिये भारत के सबसे दुर्गम धार्मिक स्थलों के बारे में !

 

हिन्दू सनातन धर्म के अनुसार हर किसी व्यक्ति को अपने जीवन काल में एक बार तीर्थ जरूर जाना चाहिए क्योकि तीर्थ द्वारा मनुष्य अपने जीवन में किये गए समस्त पापो से मुक्ति प्राप्त करता है. पुण्य तथा पाप का की भावना सभी धर्मो के साथ जुडी है, पुण्य का संचय तथा पाप का निवारक ही हर धर्म का मुख्य उद्देश्य होता है.

समान्य रूप से किसी जलखण्ड या जल के किनारे स्थित पुण्य भूमि को तीर्थ स्थल समझा जाता है, देवो की भूमि कहलाने वाले हमारे भारत में अनेको तीर्थ स्थान है जिनमे कुछ तीर्थ स्थल अत्यंत दुर्गम स्थान पर है . इन तीर्थ स्थलों की यात्रा करने पर अनेको प्रकार की समस्याए आती है जैसे की ये दुर्गम स्थल कई गुना मीटर उच्चाईयो पर होते है जहा एक प्रकार से पहुचना असम्भव सा प्रतीत होता है, इन दुर्गम तीर्थ स्थलों के मार्ग प्राकृतिक आपदाओ से घिरे होते है साथ ही विषम जलवाए का समाना करना पड़ता है.

इन तमाम मुसीबतो के बावजूद ये आध्यात्मिक और धार्मिक तीर्थ स्थल भक्तो को अपनी और आकर्षित करते है तथा हर वर्ष लाखो भक्त इन तीर्थ स्थलों के दर्शन को जाते है. आइये जानते है भारत के वे 10 प्रमुख तीर्थ स्थल जो बहुत ही दुर्गम स्थान पर स्थित है.

Kailash Mansarovar

कैलाश मानसरोवर:-

कैलाश मानसरोवर पर्वत भारत के दुर्गम तीर्थ स्थानो में से एक है इसकी उचाई 6740 मीटर है. हमारे धर्म ग्रंथो के अनुसार इसे भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है तथा यह समस्त 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ है. यहाँ की यात्रा को तय करने में 28 दिनों का समय लगता है.

ऐसी मान्यता है की भगवान शिव के बुलावे पर ही कोई भक्त यहाँ के दर्शन कर पता है. इस यात्रा को केवल युवा व्यक्तियों द्वारा ही पूर्ण करी जा सकती है क्योकि निर्बल तथा बुजर्ग लोगो के लिए यह यात्रा जोखिम भरी सिद्ध हो सकती है. भारत के उत्तराखंड राज्य और चीन की सीमा से लगे नाथुलादर्रे का मार्ग खोल देने से यह यात्रा अब थोड़ी आसान हो चुकी है.

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बद्रीनाथ:-

उत्तराखंड राज्य में स्थित बद्रीनाथ हिन्दुओ के चार धमो से एक है तथा अलकनंदा नदी के बाये तट पर नर व नारयण नाम के दो पर्वतो के बीच स्थित है. यहाँ यात्री तप्तकुण्ड में स्नान करते है क्योकि यहा के शीत मौसम होने के कारण अलकनंदा में स्नान करना बहुत ही कठिन है.

बद्रीनाथ समुद्र तल से 3,050 मीटर की उचाई पर स्थित है. यहाँ पहुचने का मार्ग भी बहुत ही दुर्गम है, बद्रीनाथ धाम स्थल को भगवान विष्णु का निवास स्थान कहा जाता है.

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शिखर जी :-

शिखर जी विश्व का सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल कहलाता है जो झारखंड के गिरिडीह जिले में छोटा नागपुर पठार पर स्थित है. 1350 मीटर उच्चा यह स्थान झारखण्ड का सबसे उच्चा स्थान भी है यह पारसनाथ पर्वत विश्व प्रसिद्ध है.

यहाँ देश भर से कई जैन धर्मावलम्बियों आते है. पहाड़ की चढ़ाई उतराई की यह यात्रा करीब 28 मिल की है जो बेहद दुर्गम है. जैन धर्म शास्त्रो में लिखा है की शिखर जी के तीर्थ की एक बार यात्रा करने पर व्यक्ति को नरक से मुक्ति मिलती है तथा उसे अगले जन्म में पशु का रूप नही लेना पड़ता.

Pavagadh-Gujarat

पावगढ़ :-

पावगढ़ मंदिर एक काफी उच्चे पहाड़ पर स्थित है, यह गुजरात के पुरानी राजधानी चंपारण के पास स्थित है.इस मंदिर के जगह का नाम पावगढ़ रखने का कारण यह है की यहाँ मंदिर के चारो तरफ से खाइयाँ है अतः हवा का वेग भी चारो तरफ से मदिर पर पड़ता है.

पावगढ़ का मतलब होता है जहा हवा का वास हो.काफी उच्चे पर बने इस दुर्गम तीर्थ स्थल की यात्रा बेहद कठिन है, इस समस्या के निवारण के लिए सरकार ने यहाँ रोप-वे की सुविधा उपलब्ध करा दी है जिस से अब इस मंदिर की यात्रा काफी आसान हो चुकी है.

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नैनादेवी :-

नैनादेवी का यह तीर्थ स्थल देवी सती के 51 शक्तिपीठो में से एक माना जाता है. यह हिमांचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में शिवालिक श्रेणियो की पहाड़ी पर बसा हुआ है तथा समुद्र तल से 11000 मीटर की उच्चाई पर स्थित है . यहाँ का मार्ग काफी दुर्गम होने के कारण लोग पालकी का सहारा लेकर या घोड़े के पीठ पर सवार होकर यात्रा करते है.

मान्यता है की यहाँ पर देवी सती के नेत्र गिरे थे, यहाँ पर पीपल का एक पेड़ आकषर्ण का केंद्र है यह कई शताब्दी पुराना है. मंदिर के समीप ही एक गुफा है जिसे नेना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है.

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गंगोत्री और यमनोत्री :-

गंगोत्री और यमनोत्री दोनों ही उत्तरकाशी जिले में स्थित है यमनोत्री समुद्रतल से 3235 मी. ऊंचाई है और यहां देवी यमुना का मंदिर है। तीर्थ स्थल से यह एक कि. मी. दूर यह स्थल 4421 मी. ऊंचाई पर स्थित है. दुर्गम चढ़ाई होने के कारण श्रद्धालू इस उद्गम स्थल को देखने की हिम्‍मत नहीं जुटा पाते. यहां पांच किलोमीटर की सीधी खड़ी चढ़ाई है. इसी तरह गंगोत्री गंगा नदी का उद्गम स्थान है.

गंगाजी का मंदिर, समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.भागीरथी के दाहिने ओर का परिवेश अत्यंत आकर्षक एवं मनोहारी है. यह स्थान उत्तरकाशी से 100 किमी की दूरी पर स्थित है. इस क्षेत्र में बर्फीले पहाड़,ग्लेशियर,लंबी पर्वत श्रेणियां,गहरी घाटियां,खड़ी चट्टानें और संकरी घाटियां हैं. यह भी काफी दुर्गम है. इस स्थान की समुद्र तल से ऊंचाई 1800 से 7083 मीटर के बीच है.

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वैष्णो देवी :-

वैष्णो देवी मंदिर देवी शक्ति को समर्पित एक पवित्रतम हिन्दू मंदिर है जो जम्मू और कश्मीर राज्य के जम्मू में कटरा नगर में स्थित है. यह भारत के सबसे पूजनीय पवित्र स्थलों में से एक कहलाता है. यह कटरा समुद्रस्थल से 2500 फुट की उच्चाई पर स्थित है तथा यहाँ की यात्रा बेहद दुर्गम है.

सर्दियों के मौसम में यहाँ का तापमान 4 से 2 डिग्री तक पहुंच जाता है तथा अधिकतर यहाँ चटटनो के खिसकने का खतरा बना रहता है.कहते है की माता के आशीर्वाद से यहाँ आने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है. हसीन वादियों में त्रिकुट पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी के मंदिर में हर वर्ष लाखो भक्तो की भीड़ जमा होती है.

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हेमकुंड साहेब :-

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हेमकुंड सीखो का पवित्रतीर्थ स्थल है जहा की यात्रा बहुत ही लम्बी और दुर्गम है. यह तकरीबन 19 किलोमीटर की यात्रा होती है जिस पैदल या खच्चर में सवार होकर पूरा किया जाता है जो काफी जोखिम भरी होती है.

इस तीर्थ स्थल का मार्ग बड़ी-बड़ी खाइयो से होकर गुजरता है अतः यात्रियों का हमेसा खाइयो में गिर जाने का खतरा बना रहता है.

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अमरनाथ :-

यह हिन्दुओ का प्रमुख तीर्थ स्थल कहलाता है व इसका मार्ग काफी दुर्गम है. समुद्र तल से इसकी उच्चाई लगभग 13600 फुट है. इस यात्रा के लिए भारत सरकार द्वारा 24 घंटे सैनिक सहायता के लिए रखे जाते है तथा कमजोर और वृद्ध यात्रियों को इस यात्रा के शुरू होने से पहले ही वापस भेज दिया जाता है.

सुरक्षा की दृष्टि से अमरनाथ की यात्रा बहुत ही संवेदनशील मानी जाती है.अमरनाथ गुफा में भगवान शिव के बर्फ से बने शिवलिंग का अद्भुत नजारा देखने प्रतिवर्ष श्रद्धालु आते है.

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