जानिए गुप्त नवरात्री तथा उससे जुड़े 10 महाशक्तिशाली मन्त्र जिनसे होती है सभी मनोकामनाएं पूर्ण !

Gupt navratri:

हिन्दू सनातन धर्म में माँ दुर्गा के आराधना के लिए नवरात्रियों को अत्यन्त महत्वपूर्ण माना गया है तथा इसमें माता की अलग-अलग नौ रूपों में पूजा की जाती है. गुप्त नवरात्री में भी देवी दुर्गा को अन्य नवरात्रो की तरह ही पूजा जाता है परन्तु गुप्त नवरात्री विशेषकर तंत्र साधना, शक्ति साधना तथा महाकाल की साधना से जुड़े लोगो के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है.

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आषाढ़ तथा माघ महीने के शुक्ल पक्ष में जो नवरात्री पड़ती है उसे गुप्त नवरात्री के नाम से जाना जाता है. जिस तरह नवरात्रियों में नौ माताओ(navratri images) की पूजा की जाती है उसी तरह गुप्त नवरात्रियों में दशमहाविद्याओं की साधना कर उन्हें सिद्ध करना होता है. गुप्त नवरात्रियों को करने के लिए बेहद कड़े नियम और कठोर व्रत के साथ साधना करनी होती है. इस नवरात्री के द्वारा लोग लम्बी साधना कर बेहद दुर्लभ शक्ति प्राप्त करने का प्रयास करते है.

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गुप्त नवरात्री(navratri wishes) में साधक विशेष प्रकार के सिध्य प्राप्त करने के लिए माँ भगवती की विशेष रूप में पूजा करता है. नवरात्र की यह मंगलमय बेला शास्त्रो में अनुष्ठान और साधना के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण बताई गई है तंत्र साधना की सिद्धि के लिए तो यह बहुत ही विशेष महीना माना गया है . धार्मिक दृष्टि से भी हम जानते है की नवरात्री देवी स्मरण से देवी शक्ति की साधना के लिए उपयुक्त शुभ घडी है. धर्म ग्रंथो के अनुसार मुख्य रूप से गुप्त नवरात्रियों में महादेव शिव और माँ शक्ति की आराधना होती है तथा माँ दुर्गा को साक्षात देवी शक्ति का स्वरूप कहा जाता है. दुर्गा शक्ति में दमन का भाव भी जुड़ा होता है और यह दमन होता है हमारे शत्रु रूपी दुर्गुण, दोष, मनो विकार व रोगों का. यह सभी हमारे जीवन में अड़चन और बाधा बनकर हमारे जीवन के सुख-शांति छीन लेती है. यही कारण है की देवी दुर्गा के विशेष काल को उनके शक्तिशाली मंत्रो और आराधना द्वारा सिद्ध कर शत्रु, अड़चने, रोग, दोष तथा बाधा को दूर करने वाला मना गया है.

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गुप्त नवरात्री की 10 महादेविया तथा उन्हें प्रस्सन करने के लिए 10 अत्यन्त शक्तिशाली मन्त्र :-
गुप्त नवरात्रियों में साधक दिव्य शक्ति और महाविद्या की प्राप्ति के लिए माँ काली, तारा देवी, त्रिपुरी सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माता ध्रुमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते है.
इन 10 प्रकार की महाविद्याओ की साधना से आप मनचाही मनोकामना प्राप्त कर सकते है.

काली
लम्बी आयु, बुरे ग्रह का प्रभाव , मांगलिक बाधा, अकाल मृत्यु, काल सर्प आदि से बचाव के लिए माँ काली की आराधना करनी चाहिए. सर्वप्रथम मंदिर में माता को लाल चुनरी व गुड हलवा का प्रसाद लगाकर उनके समक्ष धुप, दिप, नवैद्य तथा फल-फूल आदि सामग्री चढ़ाए तथा माता काली को प्रसन्न करने के लिए हकीक की माला लेते हुई निम्न शक्तिशाली मन्त्र का जाप करें, इस मन्त्र का नौ माला जप कम से कम करना चाहिए.
”क्रीं हीं हुं दक्षिणे कालिके स्वाहा”

तारा
तीव्र बुद्धि तथा उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिया माता तारा की पूजा करनी चाहिए.
नील कांच की माला से मन्त्र का जप करना चाहिए.
बारह बार मन्त्र का जाप करना चाहिए.

” ॐ हीं स्त्रीं हुंम फट”

त्रिपुर सुंदरी
व्यक्तित्व विकास, पूर्ण स्वास्थ तथा सुन्दर काया की प्राप्ति के लिए त्रिपुर सुंदरी की आराधना की जाती है .
रुद्राक्ष की माला से मन्त्र का जाप करना चाहिए.
कम से कम दस बार मन्त्र का जप करना चाहिए.

”ॐ ऐं हीं श्रीं त्रिपुर सुंद्रिये नमः”

भुवनेस्वरी देवी
भूमि, भवन तथा वाहन के सुख के लिए भुवनेस्वरी देवी की आराधना करनी चाहिए.
स्फटिक की माला से मन्त्र का जाप करना चाहिए.
ग्यारह बार मन्त्र का जप करना चाहिए.

”ॐ हीं भुव्नेश्वरिये नमः”

छिन्नमस्ता देवी
रोजगार में सफलता, पदोन्नति तथा नौकरी पाने के लिए माता छिन्नमस्ता की पूजा करी जाती है.
रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें.
दस बार मन्त्र का जाप करें.

”ॐ हीं श्रीं ऐं वज्र वेरोचनिए हीं फट स्वाहा ”

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त्रिपुर भैरवी
मनचाहा वर या वधु प्राप्ति, प्रेम में सफलता प्राप्ति के लिए त्रिपुर भैरवी की आराधना की जाती है.
मुंगे की माला से मंत्रो का जप करें.
पंद्रह बार मंत्रो का जाप करें.

”ॐ हीं भैरवी कालों हीं स्वाहा”

धूमावती देवी
भुत प्रेत, तंत्र-मन्त्र तथा जादू टोना आदि के प्रभाव से बचने के लिए माँ धूमावती की आराधना करनी चाहिए.
मोती का माला द्वारा मंत्रो का जाप करना चाहिए.
नौ बार मंत्रो का जप करें

”ॐ धूम धूम धूमावती देव्यै स्वाहा”

बगलामुखी देवी
शत्रु का नाश, क़ानूनी मामलो में सफलता तथा प्रतियोगिता में सफलता प्राप्ति के लिए माँ बगलामुखी की आराधना करनी चाहिए.
हल्दी की माला या पिले रंग की माला का प्रयोग करें.
आठ बार मन्त्र को सिद्ध करें.

”ॐ ह्लीं बगलमुखी देव्यै ह्लीं देव्यै नमः”

मातंगी देवी
संतान प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति आदि के लिए मातंगी देवी की आरधना करनी चाहिए.
स्फटिक की माला का प्रयोग करें.
बारह बार मंत्रो को सिद्ध करें

”ॐ हीं ऐं भगवती मटंगेश्वरी श्रीं स्वाहा”

कमला देवी
धन तथा सुख-सम्पदा की प्राप्ति के लिए तथा माँ लक्ष्मी की कृपा के लिए देवी कमला की पूजा करनी चाहिए .
कमलगटे की माला को प्रयोग में लाना चाहिए.
दस बार मंत्रो का जाप करना चाहिए.

”हसौ जगत प्रस्तुत्ये स्वाहा”

माता चंडी मंदिर, महासमुंद – यहाँ भालुओं का झुण्ड आता है माता के दर्शन करने !