रामायण से जुडी कुछ ऐसी बाते जो शायद ही पहले आप ने कभी सुनी हो !

Facts about ramayan:

भगवान राम के जीवन काल को लेकर अनेक ग्रन्थ लिखे गए है इनमे दो ग्रन्थ मुख्य माने गए है, पहला ग्रन्थ ”राम चरित मानस” गोस्वामी तुलशीदास द्वारा लिखा गया है तथा ”रामयण” के रचियता वाल्मीकि जी है. परन्तु क्या आप को पता है की इन दोनों ही ग्रंथो में अनेको बाते असमान है आइये जानते की कौनसी ऐसी बाते है जो इन दोनों ग्रंथो में अलग-अलग प्रकार से बताई गयी है तथा रामायण से संबंधित कुछ ऐसी घटना जो शायद ही आप को पता हो.

1. रामचरित मानस में कहा गया है की राजा जनक ने सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रचाया था जिसमे अनेको देशो के राजा आये थे. इस स्वयंवर में श्री राम ने शिव धनुष  को उठाया था तथा प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह बीच से टूट गया था. परन्तु रामायण में यह बात कहि गयी है की ऋषि विश्वामित्र  अपने दोनों शिष्यों के साथ मिथिला पहुंचे थे तथा विश्वामित्र ने ही राजा जनक से उस शिव धनुष को दिखाने को कहा था जिसे राम ने उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया पर वह बीच से टूट गया. क्योकि राजा जनक ने प्रतिज्ञा ली थी की जो भी शिव धनुष को उठाएगा वे उसका विवाह अपनी पुत्री से करा देंगे अतः उन्होंने श्री राम से अपनी पुत्री सीता का विवाह कराया. वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में सीता स्वयंवर का वर्णन ही नही हुआ है.

2. रामचरित मानस में यह बताया गया है की परशुराम  सीता स्वयंवर के समय वहा आये थे तथा उनका लक्ष्मण के साथ वाद-विवाद भी हुआ था वही रामायण में कहा गया है की जब सीता के साथ विवाह कर राम वापस अयोध्या की ओर लोट रहे तो मार्ग में परशुराम उनके पास आये थे. उनसे अपने धनुष पर बाण चढ़वाने के बाद वे पुनः वापस लोट गए थे.

3. हिन्दू सनातन धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओ  की मान्यता है जबकि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अरण्यकाण्ड के चौदहवे श्लोक के चौदहवे सर्ग में सिर्फ 33 देवताओ की ही बात कहि गयी है जिनमे बारह आदित्य, 11 रूद्र, 8 वसु, तथा 2 आदित्य है.

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4. एक बार जब रावण भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत  पहुंचा तो उसे मार्ग में नंदी आते दिखाई दिए. नंदी को देख रावण जोर-जोर से हसने लगा तथा मजाक में उसने नंदी को बंदर के मुख वाला कहा. नंदी ने रावण से क्रोधित होकर उसे श्राप दिया की वानरों के कारण ही तेरी मृत्यु होगी.

5. भरत  को अपने पिता दशरथ की मृत्यु का आभास पूर्व ही उनके एक स्वप्न के माध्यम से हो चूका था. इस स्वप्न में उन्होंने राजा दशरथ को काला वस्त्र, लाल चन्दन, व फूलो की माला पहने तथा गधे से जुते हुए रथ पर सवार होकर तेजी से यम की दिशा दक्षिण की ओर जाते देखा.

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6. विश्व विजय की इच्छा लिए जब रावण स्वर्गलोक  में पहुंचा तो उसे वहा रम्भा नाम की एक अप्सरा दिखी. उसे प्राप्त करने के लिए जब रावण उसकी ओर बढ़ा तो वह अप्सरा बोली की मुझे स्पर्श करने का प्रयास ना करे में आपके भाई कुबेर  के बेटे नलकुबेर के लिए आरक्षित हु अतः में आपकी पुत्रवधु हु, परन्तु रावण ने उस अपसरा के साथ दुराचार किया. जब यह बात नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को श्राप देते हुए कहा की आज के बाद जब भी रावण बिना इच्छा के किसी स्त्री को छूने का प्रयास करेगा तो उसके सर के 100 टुकड़े हो जायेंगे.

7. रावण की बहन सुपर्णखा ने स्वयं रावण को उसके सर्वनाश का श्राप दिया था. सुपर्णखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह  था जो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था. जब रावण अपने विश्व विजय के लिए निकला था तो उसने कालकेय के साथ विद्युतजिव्ह का भी वध कर दिया था तब सुपर्णखा ने रावण को श्राप देते हुए मन ही मन ये कहा था की में ही तेरे मृत्यु का कारण बनूँगी.

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8. अपने विश्व विजय की इच्छा लिए रावण यमलोग भी पहुंचा जहा उसका यम के साथ बहुत भयंकर युद्ध हुआ. यम ने क्रोध में आकर रावण पर कालदंड से प्रहार करने का प्रयास किया तो उसी समय ब्रह्मा  उनके सामने प्रकट हुए तथा उन दोनों के बीच का युद्ध रोका क्योकि रावण को किसी भी देवता के हाथो न मरने का वरदान था.

9. एक बार रावण के पुत्र मेघनाद  ने अपने बल से देवराज इंद्र को बंदी बना लिया था तब स्वयं ब्रह्मा ने उसके सामने प्रकट हो इंद्र को मुक्त करने को कहा. इंद्र को बंदी बनाने के कारण ही मेघनाद का नाम इंद्रजीत पड़ा था.

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10. जिस समय राम और रावण का युद्ध चल रहा था उस समय देवराज इंद्र ने रावण के वध के लिए राम को अपना दिव्य रथ दिया था जिस पर चढ़ कर राम ने रावण का वध किया था.

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