यहा साल के 365 दिन लगातार गिरता है बजरंग बली की प्रतिमा पर पवित्र जल !

हनुमान जी के पुरे भारत में कई अनोखे और अद्भुत मंदिर है, हनुमान जी के इन्ही भव्य मंदिर में से उत्तरप्रदेश के बांदा से लगे मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित चित्रकूट धाम का हनुमान धारा मंदिर भी पुरे भारत में प्रसिद्ध है.

इस मंदिर में पौराणिकता का भव्य नजारा देखने को मिलता है वही दूसरी और प्रभु श्री राम के भक्त हनुमान पर उनकी कितनी कृपा थी इसका भी संकेत मिलता है. कहा जाता है की जब लंका जलाने के बाद हनुमान जी को तीव्र अग्नि से पीड़ा हो रही थी तो वे श्री राम का स्मरण करते हुए बोले हे प्रभु मुझे अग्नि की तेज ज्वाला से कष्ट हो रहा है जिस कारण मुझे अन्य कार्य करने में भी बढ़ा महसूस हो रही है अतः मेरी इस पीड़ा का निवारण करे. तब प्रभु राम श्री राम ने मुस्कराते हुए हनुमान जी से कहा था ” हे हनुमान आप चिंता ना करे तथा चित्रकूट पर्वत पे जाये.

वहा अमृत के समान शीतल जल लगातार आप पर पड़ेगी जिससे आप की इस पीड़ा का अंत होगा. आज भी हनुमान धारा मंदिर में हनुमान जी की बायीं भुजा पर जल लगातार गिरता हुआ नजर आता है.

यह जल हनुमान जी को स्पर्श करता हुआ बहता है इसलिए इसे हनुमान धारा कहते है. धारा का जल पहाड़ में ही विलीन हो जाता है, यह जल कहा जाता है यह अभी तक एक रहस्य बना हुआ है. यहा विराजे हनुमान जी के साथ में भगवान श्री राम एक छोटा सा मंदिर है. इस मंदिर के दर्शन मात्र से व्यक्ति तनाव मुक्त हो जाता है और उसकी हर इच्छाए पूर्ण हो जाती है.

इस मंदिर के दक्षिण में प्रयाग घाट है जहा तपस्विनी मंदाकिनी और गायत्री नदिया आकर मिलती है. जानकीकुंड यहा का सबसे पवित्र स्थान है वही नदी के किनारो पर सफेद पथरो पर चरण चिन्ह बने हुए है. लोगो के अनुसार यहा माता सीता स्नान किया करती थी. हनुमान धारा से ठीक उपर 100 सीधी चढ़कर सीता रसोई है जहा माता सीता ने भोजन बनाकर भगवान राम और देवर लक्ष्मण को खिलाया था.

हनुमान धारा में बंदरो की भरमार है मंदिर को ओर जाते हुए भक्तो को रास्ते में इन्हे चना खिलाते हुए जाना पड़ता है. सिंदूर और तेल में रचे बसे हनुमान जी की भव्य प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्त निचे बने पवित्र कुण्ड में हाथ धोना नही भूलते. कहा जाता है की हनुमान जी को स्पर्श करने वाले इस पवित्र जल को पिने से अनेक बीमारियो से मुक्ति मिलती है.

दमा पीड़ित काफी लोगो को इस पवित्र जल के पिने से लाभ प्राप्त हुआ है.दिवाली और रामनवमी के अवसर पर यहा का नजारा देखने लायक होता है. चित्रकूट की श्रेष्ठ तीर्थ भूमि हनुमान धारा से और भी पावन बन चुकी है.