आखिर क्यों चुना श्री कृष्ण ने महाभारत के लिए कुरुक्षेत्र !

why kurukshetra was chosen for mahabharat:

ये तो हम सभी जानते है की महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में लड़ा गया पर आखिर श्री कृष्ण  ने कुरुक्षेत्र को ही क्यों चुना इस युद्ध के लिए , इस का कारण यह की श्री कृष्णा जिन लोगो में असुरता बढ़ चुकी थी उन्हें इस युद्ध के जरिये नष्ट करना चाहते थे और उन्हें यह भय था की यह युद्ध भाई – भाई ,सम्बन्धी – कटुम्भीयो ,गुरु और शिष्य के बीच है तो कहीं ये एक दूसरे को देख संधि न कर ले. अतः वह एक ऐसी भूमि चाहते थे जहाँ क्रोध और द्वेष की भावना अपने आप उत्पन हो इसलिए श्री कृष्ण ने अपने दूतो को अलग अलग दिशाओ में भेजा और वहाँ घट रही घटनाओ के बारे में बताने को कहा.

कृष्ण के एक दूत ने एक घटना का वर्णन करते हुए बताया की एक बड़े भाई ने अपने छोटे भाई को खेत की मैड से वर्षा के पानी को रोकने के लिए कहा ,इस पर छोटा भाई क्रोध से आग बबूला हो गया और अपने बड़े भाई से बोला में तुम्हारा नौकर नही हु,जाओ खुद करो .इसके बाद वह उसे गली देने लगा इस पर बड़े भाई को क्रोध आ गया और उसने अपने छोटे भाई को चाकू से मर दिया तथा उसकी टांग पकड़कर उसे घसीटता हुआ मैड के पास ले गया और उसकी शरीर को कुचल कर वहाँ पानी रोकने के लिए लगा दिया. इस नृशंस्ता को सुनकर श्री कृष्ण ने निश्च्य किया की यह भूमि भाइयो और सगे सम्बन्धियों के युद्ध के लिए उप्युकत रहेगी और यहाँ पहुचने पर व्यक्ति के मन में कभी भी प्यार व स्नेह की भावना  जागृत नही होगी तो ऐसे में युद्ध में दो पक्षों के बीच संधि का सवाल ही नही उठता.

एक मान्यता ये भी है की कुरुक्षेत्र नाम राजा कुरु के कारण पड़ा था जो कौरवो और पांडवो के पूर्वज थे. वामन पुराण  के अनुसार राजा कुरु यहाँ आकर सरस्वती नदी के किनारे बस गए थे और यहाँ अध्यात्म  की खोज में उन्होंने कुछ अच्छे कार्य किये जिसमे प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें दो वरदान दिए – एक ये धरती हमेशा पवित्र  मानी जाएगी और दूसरा की जो भी यहाँ से मृत्यु को प्राप्त होगा उसके स्वर्ग में जाने की संभावना होगी.

यही स्थान करुक्षेत्र बना जहाँ महाभारत लड़ी गई. महाभारत की यह कथा हमे बताती है की हमारे द्वारा किये शुभ और अशुभ कार्यो का प्रभाव इस भूमि में देर तक रहता है.अतः जिस भूमि में शुभ विचारो और कर्मो का समावेश हो हमे उस भूमि में निवाश करना चाहिए !

 

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