क्या हुआ भगवान श्री राम और भगवान शिव के प्रलयंकारी युद्ध का परिणाम !

Why did Lord Shiva fight with Lord Vishnu

Why did Lord Shiva fight with Lord Vishnu

Why did Lord Shiva fight with Lord Vishnu:

जब भगवान राम रावण को पराजित कर अयोध्या लोटे तो उन्होंने अयोध्या में अपना एकछत्र राज्य स्थापित किया. इसी बीच एक दिन उन्होंने अश्मेधयज्ञ करवाया तथा उस यज्ञ में बड़े-बड़े ऋषि मुनियो एवं विद्वानो को सम्ल्लित किया. इस यज्ञ में एक अश्व को छोड़ा गया जो किसी भी राज्य से होकर गुजरता तो वह राज्य राजा राम के अधीन होता चला जाता. यदि कोई राजा अपने राज्य की रक्षा के लिए उस घोड़े को पकड़ने का साहस भी करता तो वह उस अश्व के पीछे चल रहे अयोध्या की सेना द्वारा पराजित हो जाता. इस सेना का नेतृत्व स्वयं वीर हनुमान, सुग्रीव, शत्रुघ्न तथा भरत के पुत्र पुष्कल कर रहे थे.

यज्ञ का घोडा अनेक राज्यों को अयोध्या के अधीन करते हुए देवपुर पहुंचा, जहा का राजा वीरमणि था जो भगवान शिव का परम भक्त था. भगवान शिव ने राजा वीरमणि के तपश्या से प्रसन्न होकर स्वयं उसके राज्य की रक्षा करने का वरदान दिया था. अश्व जैसे ही वीरमणि के राज्य में पहुचा तो उनके पुत्र रुक्मानन्द ने उसे बंदी बना लिया तथा शत्रुघ्न के पास युद्ध की चुनौती का संदेश भेज दिया. जब यह बात वीरमणि को पता चली तो उन्होंने अपने पुत्र को समझाया की तुमने श्री राम से शत्रुता मोल लेकर अच्छा नही किया. श्री राम हमारे परम मित्र है, अतः अयोध्या जाकर यज्ञ का घोडा वापस लोटा आओ.

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अपने पिता की बात सुनकर रुक्मांनद बोला की पिताश्री मेने तो श्री राम को युद्ध की चुनौती भी दे दी है. इसलिए अब घोडा वापिस करना हमारे और श्री राम दोनों के लिए अपमान की बात होगी क्योकि क्षत्रिय कभी अपनी बात से पलटे नही. अब आप मुझे सिर्फ युद्ध की आज्ञा दे. वीरमणि ने अपने पुत्र की बात उचित समझी परन्तु वह राम और उनकी शक्तिशाली सेना से भी परिचित था अतः उसने भगवान शिव से मदद मांगते हुए अपने पुत्र को युद्ध में जाने की आज्ञा दे दी.

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