जब महाभारत के युद्ध में मारे गए समस्त योद्धा, एक रात के लिए हुए जिन्दा !

unheard stories of mahabharata

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unheard stories of mahabharata:

करुक्षेत्र में महाभारत का बहुत ही भयंकर युद्ध लड़ा गया था जिसमे अनेको वीर योद्धाओ और सेनिको की जान गयी. परन्तु क्या आप जानते है की महाभारत में मारे गए सभी योद्धा और सैनिक एक रात के लिए पुनर्जीवित हुए थे. इस घटना का वर्णन मह्रिषी वेदव्याश के महाभारत ग्रन्थ में आश्रमवासिक पर्व में मिलता है.
महाभारत युद्ध का अंत होने के  बाद पांडव पुत्र युधिस्ठर को हस्तिनापुर का राजा बनाया गया तथा युधिस्ठर न्याय व धर्मपूर्वक राज्य चलाने लगे. युधिस्ठर हमेसा  धृतराष्ट्र गंधारी और कुंती के आशीर्वाद के साथ अपने दिन की शुरुवात करते थे तथा अन्य पांडव पुत्र और द्रोपदी भी धृतराष्ट्र और गंधारी की सेवा में लगे रहते थे तथा उन्हें उनके पुत्रो की कमी का अहसास नही होने दिया. परन्तु भीम कभी-कभी धृतराष्ट्र को कटु वचन कह देते थे.
हस्तिनापुर में पांडवो के साथ रहते हुए जब धृतराष्ट्र और गंधारी को 15 साल बीत गए तो एक दिन भीम के द्वारा कहे किसी बात से आहत होकर धृतराष्ट्र ने वन में जाने का निर्णय लिया.धृतराष्ट्र के  साथ वन में जाने के लिए गंधारी के साथ कुंती विदुर और संजय भी तैयार हो गए. जब युधिष्ठर को पता चला की धृतराष्ट्र भीम की कहि बातो से दुखी होकर वन जा रहे हे तो वे दुखी हुए तथा उन्हें वन में जाने से रोकने लगे. धृतराष्ट्र वन में जाने का दृढ़ निश्चय कर चुके थे जब युधिस्ठर उन्हें मनाने आये तो वे नही माने तब ऋषि वेदव्यास के कहने पर युधिस्ठर उनको वन में भेजने के लिए राजी हो गए. जब उन्हें पता लगा की धृतराष्ट्र के साथ गंधारी, कुंती, संजय और विदुर भी जा रहे है तो उनके दुःख का कोई ठिकाना नही रहा.
वन में जाने से पूर्व धृतराष्ट्र ने अपने अन्य परिजनों के श्राद के लिए धन माँगा तो भीम ने उन्हें धन देने से मना कर दिया तब युधिस्ठर ने भीम को फटकार लगाते हुए धृष्टराष्ट्र को बहुत से धन के साथ वन के लिए विदा किया उनके साथ गंधारी, कुंती, विदुर व संजय भी वन की और चल दिए. पहली रात उन्होंने गंगा नदी के तट पर व्यतीत करी इसके बाद वे करुक्षेत्र में मह्रिषी वेदव्यास के आश्रम में आ गए जहाँ उन्होंने वेदव्यास की दीक्षा ली तथा मह्रिषी सत्युप के आश्रम में रहने लगे.
इस प्रकार वन में रहते हुए धृतराष्ट्र आदि को लगभग एक साल बीत गया वही हस्तिनापुर में युधिस्ठर को अपने परिजनों से बिझड़े हुए लम्बा समय होने के कारण उनकी याद सताने लगी. एक दिन युधिस्ठर  धृतराष्ट्र, गंधारी और कुंती से मिलने के लिए अपने भाइयो के साथ वन की और चल दिए. अपने परिजनों को देख पांचो भाई बहुत प्रसन्न हुए तथा एक रात अपने परिजनों के साथ आश्रम में ही रहे. अगले दिन धृतराष्ट्र के आश्रम में मह्रिषी वेदव्यास आए तथा पांडवो और धृतराष्ट्र आदि ने उनका सेवा सत्कार किया. जब वे आश्रम से जा रहे थे तो उन्होंने धृतराष्ट्र आदि से कहा की आप की जो इच्छा है मांग लो. तब धृतराष्ट्र और गंधारी ने अपने पुत्रो को देखने की इच्छा जताई वही कुंती और पांडवो ने भी अपने परिजनों को देखने की इच्छा रखी. तब मह्रिषी ने कहा ऐसा ही होगा तथा आज रात तुम सब मेरे साथ गंगा नदी के तट पर चलो जहाँ पर मेरी तपश्या के प्रभाव से महाभारत में मारे गए सभी योद्धा पुनर्जीवित होंगे.
उस रात मह्रिषी वेदव्यास के साथ सभी गंगा नदी के तट पर एकत्रित हुए तथा मह्रिषी ने पांडव और कौरव पक्ष के सभी योद्धाओ का आह्वान किया. आह्वान के साथ ही भीष्म, द्रोणाचार्य, अश्वथामा, कर्ण, दुर्योधन, अभिमन्यु आदि सभी योद्धा जल से निकलने लगे. ये सभी योद्धा शांत थे किसी के मन में कोई अहंकार और क्रोध नही था. धृष्टराष्ट्र और आदि सभी अपने परिजनों से मिलकर बहुत प्रसन्न हुए तथा वह रात उन्होंने अपने परिजनों के साथ बिताई. इस प्रकार वह अद्भुत व अनोखी रात समाप्त हुई !