जानिए भगवान विष्णु के पाचवे अवतार के बारे में !

story of vishnu avatars:

story of vishnu avatars सतयुग में दैत्यराज प्रह्लाद के पोत्र बलि ने स्वर्ग में अधिकार कर लिया था. सभी देवता इस विपत्ति से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु के पास गए. तब भगवान विष्णु ने देवताओ से कहा की में स्वयं देवमाता अदिति के गर्भ से जन्म लेकर तुम्हे स्वर्ग का राज्य दिलाऊंगा. कुछ समय पश्चात भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को भगवान विष्णु ने वामन अवतार के रूप में जन्म लिया. इधर दैत्यराज बलि ने अपने गुरु शुक्रचार्य और मुनियो के साथ दीर्घकाल तक चलने वाले यज्ञ का आयोजन किया.

बलि के इस महायज्ञ में ब्रह्मचारी वामन जी भी गए. वे अपनी मुस्कान से सब लोगो के मन मोह लेते थे. दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने अपने तपो बल से वामन के रूप में अवतरित भगवान विष्णु को पहचान लिया. उन्होंने बलि को बताया की तुम्हारी राजलक्ष्मी का अपरहण करने भगवान विष्णु वामनरूपी अवतार में आये है. story of vishnu avatars गुरुदेव की बातो को सुन कर राजा बलि ने कहा – हे गुरुदेव आप क्यों धर्म विरोधी वचन कह रहे है, भगवान विष्णु स्वयं मुझ से दान मांगने आये है इस से बढ़कर और क्या हो सकता है. मैं तो केवल भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए यह यज्ञ कर रहा हुँ. यदि भगवान विष्णु स्वयं पधारे है तो में कृतार्थ हो गया.

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तभी वामनजी बलि के यज्ञशाला में पधारे, उन्हें देख राजा बलि अपने दोनों हाथ जोड़ के उनके सामने खड़े हो गए और कहा, हे प्रभु मुझे अपनी सेवा का अवसर दीजिये.तब वामन भगवान ने उनसे तीन पग भूमि मांगी और कहा भूमिदान का महात्म्य महान है. राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य भगवान विष्णु की लीला समझ गए और story of vishnu avatars उन्होंने राजा बलि को दान देने से मना किया. लेकिन फिर भी बलि ने भूमि दान के संकल्प के लिए कलश उठाया परन्तु गुरु शुक्राचार्य उस कलश में घुस गए. भगवान विष्णु यह जान गए की गुरु शुक्राचार्य कलश में घुसकर जल की धारा को रोक रहे है .अतः उन्होंने कुश के अग्र भाग को कलश के मुख में घुसेड़ दिया जिसने गुरु शुक्राचार्य की एक आँख को नष्ट कर दिया. पीड़ा से व्याकुल होकर गुरु शुक्राचार्य उस कलश से बाहर निकले .

तब बलिं ने तीन पग दान का संकल्प लिया. भगवान विष्णु ने विशाल रूप धारण कर पहले एक पग पूरी धरती को नाप लिया तथा अपने दूसरे पग में उन्होंने पुरे स्वर्गलोक को नापा.जब तीसरे पग के रखने के लिए कोई जगह नही बची तो बलि के सामने संकट उत्पन्न हो गया.वामन भगवान ने उन्हें भय दिखाया की यदि तुमने अपना संकल्प पूरा नही किया तो ये अधर्म होगा. तब तीसरे पग के लिए अपने आप को समर्पित करते हुए राजा बलि ने अपना सर उनके पग के निचे रख लिया. story of vishnu avatars वामन भगवान के तीसरा पग रखते ही बलि पाताललोक पहुंच गया. बलि की दानवीरता को देख वामनरूप भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल का राजा बना दिया और इस तरह भगवान विष्णु ने इंद्र को स्वर्गलोक सोपा !

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