आखिर क्यों महादेव शिव और माँ जगदम्बा को अर्धनारीश्वर का रूप धारण करना पड़ा !

Story Of Shiv Ardhnarishwar Incarnation:

शिवजी के प्रमुख गणो में एक गण भृंगी भी आते है. भृंगी के विषय में पुराणो में एक अनोखी कथा है जिसके कारण महादेव शिव और माँ जगदम्बा को अर्धनारीश्वर का रूप धारण करना पड़ा. भृंगी शिव के महान भक्त थे. हर समय वे शिव के ध्यान में मग्न रहते थे. उन्होंने स्वपन में भी शिव के अतिरिक्त किसी और का ध्यान नही किया था. यहाँ तक की माँ जगदम्बा को भी वे शिव से पृथक मानते थे.

एक बार शिव भक्त भृंगी कैलाश पर्वत शिव की आराधना करने पहुंचे. सदा की तरह शिव ध्यान में मग्न थे तथा उनके समीप माँ जगदम्बा बैठी थी. शिव प्रेम में लीन भृंगी का साहस इतना बढ़ गया की उन्होंने माँ जगदम्बा को शिव से अलग होकर बैठने का अनुरोध किया ताकि वे शिव की परिक्रमा कर सके. माँ देवी ने इस पर आपत्ति जताई क्योकि वह तो महादेव की शक्ति है. वह परमशिव से कैसे पृथक हो सकती थी. इसलिए माँ पारवती ने भृंगी को समझने का प्रयास किया तथा वेदो के उदहारण बताये परन्तु भृंगी बहुत हठी थे. उन्होंने शिव की परिक्रमा की ठान रखी थी. माँ पार्वती द्वारा भृंगी को समझाइ गई हर बात विफल रही.

उन्होंने शिव की परिक्रमा पूरी करने के लिए सर्प का रूप धारण किया और शिव की परिक्रमा करने लगे. सरकते हुए माँ जगदम्बा और शिव के बीच से निकलने की कोशिश करी. उनकी इस बेवकूफी से भगवान शिव के ध्यान में बाधा आई तो उन्होंने अर्धनारीश्वर का रूप धर लिया. जब शिव भक्त भृंगी को शिव के अर्धनारीश्वर रूप के कारण उनकी परिक्रमा में बाधा महसूस हुई तो उन्होंने चूहे के रूप धारण कर लिया तथा एक और मूर्खतापूर्ण कार्य करने लगे.

वे शिव के अर्धनारीश्वर रूप को कुतरने लगे तथा दोनों को एक-दूसरे अलग करने का प्रयास करने लगे जिस से माँ जगदम्बा को क्रोध आ गया और उन्होंने भृंगी को श्राप दिया की तूने मातृशक्ति का अपमान किया है अभी तुझ से तेरी माता का अंश समाप्त हो जाये.

इंसान के शरीर में हड़िया और पेशीय पिता से मिलती है परन्तु मास और रक्त माँ से मिलती है अतः तत्काल भृंगी के शरीर से रक्त और मास अलग हो गया. उन्हें भयंकर पीड़ा से गुजरना पड़ा. इस पीड़ा की वजह से भृंगी को मातृशक्ति के महत्व का ज्ञान हुआ तथा यह ज्ञात हुआ की माता पिता दोनों ही पूजनीय होते है.

माता को भृंगी पर दया आ गई और उन्होंने उनकी पीड़ा को समाप्त किया. जब माता अपना श्राप वापस ले रही थी तो भृंगी ने उन्हें रोका और कहा की मुझे इस तरह ही रहने दे ताकि में अन्य जीवो के लिए उदाहरण बन सकु जिससे कोई फिर से मेरी तरह भ्रम में पड माता पिता को अलग ना समझे.

अर्धनारीश्वर भगवान शिव और माँ जगदम्बा ने भृंगी से प्रसन्न होकर उन्हें प्रमुख गणो में स्थान दिया तथा उन्हें तीन पैर प्रदान किये ताकि वे अपने शरीर का भार संभाल सके .भृंगी को वह पद प्राप्त हुआ जिस के लिए इंद्र आदि प्रमुख देवता भी ललायित रहते है !

अब आप बिना Internet अपने फ़ोन पर पंचांग, राशिफल, आरती, चालीसा, व्रत कथा, वेद और पुराणो की कथाएं, हिन्दू धर्म की रीति-रिवाज और प्रमुख एवं अजीबो गरीब मंदिरो की जानकारी प्राप्त कर सकते है ! Click here to download